Laxman Singh

जयपुर

Joined January 2018

1978 से प्रिंट मीडिया से जुड़ा हूं। अभी बुलेटिन टूडे में कार्यरत हूं

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जाने कब इस जिन्दगी की शाम हो जाए

जाने कब इस जिन्दगी की शाम हो जाए मुंतजिर हूं ना जाने कब आराम हो जाए उजड़ जाया करते हैं शजर मौसमे खिंजा में फ़स्ल ए गुल की आली-... Read more

झरना

झरने पर ना जाने क्या लिखकर डाला पढ़ ना पाया जाने क्या लिखकर डाला पहाड़ों से यह क्या धरा पर उतर आया शरीर से हृदय तक मदमस्त कर ड... Read more

हर शख्स मय में शान ए महफिल हो गए

हर शख्स मय में शान ए महफिल हो गए ना लिये थे वो दरबान ए महफिल हो गए गुफ्तगू वहां कि हम मय -ए- बहक हो गए नजदीक आकर देखें हम तो म... Read more

मुलाकातों के चर्चे सरेआम क्या हुये

मुलाकातों के चर्चे सरेआम क्या हुये हर जगहां निगाहों के कैदखाना हुये _____________________________ बुरी नजरों के जाल इस कदर हो ग... Read more

ये चर्चे सरे आम थे कभी दबाये जाते नहीं

ये चर्चे सरे आम थे कभी दबाये जाते नहीं उसकी यादों के परिंदे छोड़ कर जाते नहीं अल-सुबह अंगडाई ले वो हाथ जो उठाते थे मिरे जहन से... Read more

शब्दों का चुरा ले गया कोई

शब्दों का चुरा ले गया कोई कागज़ को भीगो गया कोई आँखों से सपने ले गया कोई नज़र नहीं धुंधला गया कोई Laxman Singh Read more

अभी घर से मकां के बीच का है फासला बाक़ी

अभी घर से मकां के बीच का है फासला बाक़ी तेरे आने न आने का है करना फैसला बाक़ी हैं मयख़ाने में जाम-ओ-मय-ओ-पैमाने बहुत लेकिन लबो ... Read more

आओ मिलकर गणतंत्र उत्सव मनाये

किसी ने कपास बोया किसी ने पानी पिलाया किसी ने निराई गुडाई की किसी ने कपास का सूत काता किसी ने उलझे को सुलझाया किसी ने हाथों स... Read more

क्‍यों है

मुफलिसी में रोटी और भूख में तकरार क्यों है इबादत के लिए मंदिर मस्जिद अलहदा क्यों है सजदा जमीं पर वो देखता आसमान से क्योंं है आब... Read more

बसन्‍त आने से

ये सर्दी भी गुलाबी हो गई बसन्त आने से गर्मी भी अंगडाई ले रही सुप्त अवस्था से पीत रंग धरा धरा ने तेरे बसन्त आने से राजा रंक पु... Read more

मुझसे टकरा के बिखर जाते है

नहाकर जब जुल्फ झटकते हैं दिल ए जज्बात उभर जाते हैं सज संवर सामने पड़ जाते है इश्क ए रंग भी गहरा जाते हैं सहर ए बाग को जब जा... Read more

शेर

हमने टूट कर चाहना चाहा उसे जो चाहा हो गया और टूट गया लक्ष्‍मण सिंह Read more

एक शेर

मत पूछ कि कैसे काली रात में उजाला हो गया ये दिल जला और उसके घर में उजाला हो गया लक्ष्‍मण सिंह Read more

कसक ......

वो सर्वोच्च है मेरा सहारा सर्वोच्च है ऐसा ही भान पल रहा था जनता में खम्बा जिस पर न्याय महल टिका हो दरख गया विश्वास वो दरार दे... Read more

प्‍यार खुदा की कीमती नेमत है दोस्त

प्‍यार खुदा की कीमती नेमत है दोस्त इसे सरे राह शय में शुमार मत करना परवरिश ए मां बाप ही है तेरा ये वजूद अपने से दूर गैरों के हव... Read more

पतंग

वो लहरा रही थी वो उड़ान भर रही थी दिल पाने को मचल रहा था उसका घर आने का इंतजार था ना जाने कौन उसे थामे था उसकी राह में घर अ... Read more

कुछ दिल की तुम कहो

कुछ दिल की तुम कहो कुछ दिल की मैं भी कहूं कुछ तुम मुझे पहचानों कुछ मैं भी तुम्हें जानूं कुछ पीड़ा मेरी तुम हरो कुछ पीडा मैं तु... Read more

बे वक्त ना आया जाया करो

बे वक्त ना आया जाया करो मेरे खलल को टाल जाया करो सहर पर भी निकल जाया करो कदम से कदम भी मिलाया करो शाम को लोटूं तो मिल जाया ... Read more

दोहा

दिल से निकरे दिल में रमे सो लेखनी दिमाग से उपजे चरणन रमे सो भक्ति लक्ष्‍मण सिंह जयपुर Read more

आईना अगर तू बन जाये

आईना अगर तू बन जाये सामने आ मैं भी संवर जाऊँ जब भी सामने तुम्हें देखूं मेरे सामने मैं ही दिख पाऊँ आसूं तुझमें भी महसूस क... Read more

बेटी का मान

चल रहा एक अभियान मेरी बेटी मेरा अभिमान कह रहे नई शुरुआत श्रीमान क्यों हो रहा दिखावे का ज्ञान मेरी बेटी तो मेरा अभिमान उसकी बे... Read more

इंतजार करता है

अब फिर नहीं आऊंगा मन करता है पर एक दिन और इंतजार करता है बसंत से पतझड़ तक लगता जाता है क्यों एक दिन और इंतजार करता है सूरज क... Read more

नींद तुम यूं ही परेशान हो मुझसे

वो मेरे नजर के सामने हो तो क्यूं कर बंद कर दो ये आँखे नींद तुम यूं ही परेशान हो मुझसे… वो मेरे नजर सामने ना हो तो क्यूं कर... Read more

दोहा

दिल से निकरे दिल में रमे सो लेखनी दिमाग से उपजे चरणन रमे सो भक्ति लक्ष्‍मण सिंह Read more

लेकर ख्वाब आया कौन था वो अजनबी

ना मिलकर भी मिल गया कैसी पहेली लेकर ख्वाब आया कौन था वो अजनबी .. सर्द ठुठरन भी क्यों कर लग रही भली भीड़ के कौलाहल में भी किसक... Read more

मुक्‍तक

दिल में हो अगर आग लगी तो जाहिर ना करना बाहर दिख जाय तो गैरों को आता है हाथ सेखना लक्ष्‍मण सिंह जयपुर Read more

नववर्ष

वर्ष तुम हर बार नववर्ष हो जाते हो अच्छीष बुरी स्मृ ति को इतिहास बना जाते हो नई ऊर्जा का संचार कर स्‍वप्नर दिखा जाते हो पीडा... Read more

कोई अहसास है जो

कोई अहसास है जो दिल को धड़का जाता है चलती आहों और सांसों को रफ़तार दे जाता है कोरा कागज सी जिन्दंगी को इस कदर बिखेर जाता ... Read more