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'        प्रकृति चित्रण     

विष्णुपद छंद प्रकृति चित्रण भोर हुए जो लाली नभ में,दिनकर है भरता। देख उसे मन मेरा चहका,दिनभर है रहता। संध्या को भी वो ही लाली,... Read more