MA B Ed (sanskrit) My published book is ‘ehsason ka samundar’ from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

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मुक्तक

जो भी इधर बढ़ाया कदम वो बूरी तरह जल जायेगा। रिपु की धरती पर सुन लो अब अपना झंडा लहरायेगा। गूँज उठा है नभ मंडल हर हर महादेव के न... Read more

मुक्तक

संकट में हो मातृभूमि तब हर व्यक्ति हुंकारा है। जिसने दृष्टि हम पर डाली उसे कुचल कर मारा है। अब रिपु की धरती भी रक्त के आँसू रोये... Read more

मुक्तक

मुस्कुराता, इठलाता,लगे बचपन प्यारा-प्यारा। जीवन की जीवन्तता, मस्ती के पल ढेर सारा। बेपरवाह, निश्चित, मासूमियत, शरारत से भरा, ई... Read more

मुक्तक

भड़क उठे है दिल में शोले आँखों में अंगार। ऐसे रिपु को जिन्दा छोड़े तो जीवन धिक्कार। हर शहीद का बदला लेगें देगें सीना चीर - युद... Read more

मुक्तक

आतंकी गद्दारों के सीने में गोली भर डालो। संयम टूटा गुस्से का शत्रु का शीश चिता पर डालो। सैनिक की कीमत क्या होती इनको जाकर बतलाओ ... Read more

मुक्तक

चंचल हुआ नवल भू यौवन प्रिय । पा स्नेहिल स्पर्श आलिंगन प्रिय। रूप रस गंध की सरिता मचली - करने वसंत का अभिवादन प्रिय। -लक्ष्मी... Read more

मुक्तक

बाहर चंदन सा महक रहा, लेकिन अंदर से खारा है। आने जाने की चक्की में, पिसता मानव बेचारा है। बस लगा रहा अपनी धुन में, ... Read more

मुक्तक

केशरिया वस्त्र पहन, मानो कोई संत आ गया। सकुचाई शकुन्तला, उपवन में दुष्यंत आ गया। मनहारी सकल सृष्टि, मादक सुगंध चहुँ दिश बिखरे - ... Read more

मुक्तक

हे सौम्य रूपा, रूचिर वीणा वादिनी जयति जय माँ। माँ शारदा वागीश्वरी वरदायिनी जयति जय माँ। हे विद्या, कला, बुद्धि प्रदा, तमस हारिनी... Read more

मुक्तक

जो फूल ही फूल है बाहर से। वो जख्म ही जख्म है अंदर से। सहमा- सहमा बेगुनाह चिराग - कुछ सितमगर हवाओं के डर से। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

जुबाँ से कह न पाऊँगी,समझ लो आँखो की बोली। जरा तुम ध्यान से देखो बनी है तेरी रंगोली। समर्पण है समर्थन है मैं बनूँ हर ... Read more

मुक्तक

जागते आँखों में कोई ख्वाब आया था। आसमाँ से जमीं पर आफताब आया था। महक उठा है मेरे मन का हर इक कोना - लगता है मुझ से मिलने गुलाब... Read more

मुक्तक

हरदम हमदम बनाना चाहती हूँ। तेरा हर गम चुराना चाहती हूँ। तेरा हमसफर हमराही बनूँ मैं - कदम से कदम मिलाना चाहती हूँ। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

पानी बहुत अधिक गहरा होता है रेगिस्तान में। मृग मनुज दोनो ही दौड़ते मरीचिका के भान में। लेकिन जल की लुभावनी प्रतिछवि देती केवल मौ... Read more

मुक्तक

गर निगाहें सुन्दर हो तो अदा मार देती है। दिल से जो निकलती है वो सदा मार देती है। उलझा हुआ हूँ मैं अपनी हाथ की लकीरों में - गर ... Read more

मुक्तक

नया कानून माँगती हूँ नूतन संविधान कीजिए । रहे सुरक्षित बहू-बेटियाँ ऐसा जहान कीजिए। नित दिन दरिन्दगी बढ़ रहा है यह देश शर्मसार है... Read more

मुक्तक

तुम ही भारत के बाल वीर हो। अभिमन्यु सरीखे महा धीर हो। अमित शक्ति क्षमता के मालिक तुम- अति तीव्र दो धारी शमशीर हो। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

कश्मीर से कन्याकुमारी। वीरों की यह धरा हमारी। पावन है गणतंत्र देश का- हमें जान से ज्यादा प्यारी। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

नाज-नखरे व लटके-झटके, कभी पसंद न आई। एक मोहिनी भोली सूरत दिल में रही समाई। गजब सादगी में सुन्दरता मन विचलित कर जाए- शर्म ... Read more

मुक्तक

तुझे दिल में उतारूँ मैं। नजर भर कर निहारूँ मैं। छुपाकर याद को तेरी - हकीकत को सवारूँ मैं। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

फूटे हुए मटके में जज्बात भरती हूँ। भरता नहीं है फिर भी दिन-रात भरती हूँ। मिटते नहीं हैं दर्द बेजुबान अश्कों से- टूटे हुए इस दिल... Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 🌹 कवि की कविता में वो शक्ति जो दिल में देश प्रेम की लगन करें । वीरों के पथ पर गिर जाने की अभिलाषा हर एक चमन करें। नसों... Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 🌹 वर्षा रानी को देख कर खुश हो रहा किसान। मन में उसके सज गये आज हजारों अरमान। गुनगुनाता गीत गाता काधे पर हल लेकर- च... Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 🌹 मैं अंबर, चाँद, सितारा हूँ। धरती का सुखद नजारा हूँ। मैं फूल, हवा औ' खुश्बू में- मौसम का सभी इशारा हूँ। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 🌹 वर्षा बड़ी सुहानी है। ये ऋतुओं की रानी है। प्रकृति स्वयं को सजा रही, बरसा छम-छम पानी है। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 🌹 शून्य का होता है नहीं कोई ओर-छोर। शून्य से करके शुरू चले अनन्त की ओर। इक अजीब सा सुख यहाँ करता भाव विभोर। अजब-गजब दु... Read more

मुक्तक

बिन साजन के सावन कैसा। जलती बूँद अगन के जैसा। बढ जाती है तन की पीड़ा- हर ले प्राण तपन है वैसा। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

अनकहा - सा वादा निभाया। फिर से घिर कर बादल छाया। धरती पर छाई हरियाली- नेह-कलश ले सावन आया। -लक्ष्मी सिंह 💓 ☺ Read more

मुक्तक

आषाढ़ गया सावन आया। हरियाली मनभावन आया। उग आये अंकुर जीवन में- ले निर्मल जल पावन आया। लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

गगन घन कीओढ़ ली ओढ़नी। नाच उठा मन बनके मोरनी। लूट लिया सभी चैन दिलों का- बारिश है या दिल की चोरनी। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

श्रद्धा-प्रेम-विश्वास का मैं पूर्ण समर्पण लाई हूँ। तुम जो चाहो वही दिखाए ऐसा दर्पण लाई हूँ। तन-मन-धन सब सौप दूँ तुमको तुम से ही ... Read more

मुक्तक

तिथि - 23/7 /2018 आज सखी प्रियवर आयेगे, स्वागत में दीप जलाओ। घर-आँगन फूलों से भर दो, धरती-आकाश सजाओ। झोका आया है मधुवन में, ... Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 मेघा छाए जब नील गगन । व्याकुल विरहन की व्यथा सघन। जब विरहानल से तन दहके- तब दग्ध हृदय होगा न सहन। -लक्ष्मी सिंह 💓 ☺ Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 कृषक जनों की सुनकर पुकार। बरसो मेघा मूसलाधार। जूझ रहे हैं वो कमियों से - जीवन में छाया अंधकार। -लक्ष्मी सिंह 💓 ☺ Read more

मुक्तक

🌹 🌹 🌹 रिमझिम कर बरसातें आईं। खुशियों की सौगातें लाईं। मिट जाए हर द्वेष धरा से- प्रीत-प्रेम की बातें छाईं। 🌹 🌹 🌹 -लक्ष्मी सि... Read more

मुक्तक

उमड़-घुमड़ कर छम-छम करती पावस सुख बरसाने आई । पंक्ति बद्ध हो कमर झुकाए करें नारियाँ धान रुपाई । श्रम सुन्दरियाँ तन्मयता से हाथ ... Read more

मुक्तक

टपकता रहता घर जिसका टूटा फूटा छप्पर है। फिर भी 'बारिश हो जाये' ध्यान लगाये नभ पर है। वो खेतों की मेड़ों पर उदास अकेला बैठा है - ... Read more

मुक्तक

हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है। रोकर कभी हँसती है हँसकर के रुलाती है। अरमान सुलगते हैं सीने में चिता जैसे - दुनिया की ह... Read more

मुक्तक

जब बादल की पहली बूँद तपती धरा पर गिरती है। तब धरा से एक सोंधी-सोंधी-सी खुश्बू उठती है। इस खुश्बू पर मंत्र-मुग्ध कवि के मन में अन... Read more

मुक्तक

बड़ी मुद्दतों के बाद एेसी रातआई है। मारे खुशी के आंखों में बरसात आई है। कई बरसों से मैं जो भी सुनना चाहती थी - उनकी जुबाँ पर आज ... Read more

मुक्तक

श्वेत शीतल, निर्मल बूँदों की बरखा पहनी चुनर है। बिजली की पायल पहने बरखा लगती अति सुन्दर है। श्यामल, उज्ज्वल, कोमल,लहराता सुरभित ... Read more

मुक्तक

तन भी सूखा मन भी सूखा, फिर नेह कलश छलकाओ प्रिय । दहक रही हूँ विरह ताप में, अब और नहीं दहकाओ प्रिय । बीत गये हैं कई बरस अब, ... Read more

मुक्तक

पैरों में बेड़ियाँ हैं और हाथ भी बंधे हुए हैं। हर मुस्कुराते चेहरों के पीछे दिल जले हुए हैं। बड़ा ही अजब-सा माजरा है इस दुनिया क... Read more

मुक्तक

कुछ इस तरह से वो प्रीत निभाते रहे। हम तड़पते रहे वो मुस्कुराते रहे। जब भी देखो तन मन को जख्मी करके- फिर नमक भरे हाथों से सहलात... Read more

मुक्तक

जाने क्यों मानव इतना बदलता जा रहा है। अन्दर से पूरा खोखला दहलता जा रहा है। कोई भी अब किसी का दुख दर्द नहीं बाँटता- इन्सानियत ख... Read more

मुक्तक

जब भी किसी को किसी से प्यार होता है। इक पल में ही जीना दुश्वार होता है। तब तो अपने भी लगने लगते हैं पराये, इक अजनबी पर इतना ऐत... Read more

मुक्तक

चारों तरफ दहशत और दरिन्दगी है। भूख, बीमारी, गरीबी, गंदगी है। हो गया मानव अंधा उन्माद भरा, कौड़ियों के मोल बिकती जिन्दगी है। ... Read more

मुक्तक

वक्त ने सताया बहुत, मगर मैं परेशान नहीं हूँ। अपनों ने साथ छोड़ दिया इससे हैरान नहीं हूँ। मिलता रहा है वहीं जो कुछ मेरे नसीब में ... Read more

मुक्तक

बिना नेता के कोई समाज नहीं होता है। देश दुनिया का कोई काज नहीं होता है। देश हित देखें और सही नेता चयन करें, वरना व्यवस्थित कोई... Read more

मुक्तक

विवेक पूर्ण सद् सात्विक आचरण है प्रेम। जग जीतने का सुन्दर आवरण है प्रेम। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय सदा यह, जीवन जीने का सही व... Read more