लक्ष्मी सिंह

नई दिल्ली

Joined January 2017

MA B Ed (sanskrit) My published book is ‘ehsason ka samundar’ from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.
Email- eknayishuruyat1234@gmail.com

Copy link to share

मुक्तक

जब उसने दुत्कारा मुझ को,अरमान दिलों का तोड़ चला। जीवन के सब रंगी मौसम,तब साथ हमारा छोड़ चला। नभ में सन्नाटा-सा छाया,बस दुख का ... Read more

मुक्तक

नित नयनों में बादल अटके। आँसू बन पलकों पर लटके। मोती के कमलों पर बैठी- विरहन का मन इत-उत भटके। -लक्ष्मी सिंह नई दिल्ली Read more

है नहीं मुश्किल ज़रा तुम प्यार कर देखो।

2122 2122 21222 है नहीं मुश्किल ज़रा तुम प्यार कर देखो। जीत कर भी प्यार में तुम हार कर देखो। हो भरा मन में अहं तो प्रेम क... Read more

प्रेम

राधा-मीरा की तरह,हुई प्रेम में बाध्य। दवा लगा जाओ हृदय, ओ! मेरे आराध्य। ओ मेरे आराध्य,श्याम सुंदर मनमोहन। चीर वेदना शेष,रहे बेक... Read more

जाति धर्म

प्रदत्त चित्र पर आधारित दोहे --------------------------------------- अलग अलग हर खोपड़ी, बोल रहा इक मंत्र। सब धर्मों को मान दो,तभ... Read more

मुक्तक

उठाऊँ लेखनी जब भी हृदय का दर्द झरता है। मनाऊँ लाख मैं खुद को नहीं दिल धीर धरता है। जगत को देख कर रोई बिगड़ते हाल पर रोई, कठिन ... Read more

राह कोई नयी-सी बनाते चलो।

◆छंद:-वाचिक सृग्विणी ◆मापनी:-212 212 212 212 राह कोई नयी-सी बनाते चलो। दूरियाँ मंजिलों की मिटाते चलो। जिंदगी में खुशी के कभ... Read more

मुक्तक

मृगनयनी नयनों में काजल। तीर बिना ही करती घायल। इस नयनों से कितने मरते, कितने हो जाते हैं पागल। -लक्ष्मी सिंह नई दिल्ली Read more

मुक्तक

शारदा लक्ष्मी दुर्गा नाम, त्याग ममता सुख की खान। द्रोपदी अनसुइया सुख धाम, सप्त सुर सरगम-सी मुस्कान। सर्व गुण संस्कारों स... Read more

मुक्तक

जब घिरते यादों के बादल। कर जाते हैं मुझको पागल। रात रात भर रोती रहती, घुल जाते नयनों से काजल। लक्ष्मी सिंह Read more

कविता

गीतिका छंदाधारित गीत भावना के फूल खिलते,तब कहीं कविता बने। तूलिका से भाव बह कर, काव्य की सरिता बने। जब हृदय में ताप बढ़ती,... Read more

वेदना

कठपुतली बन कर रही, किसी और के हाथ। तड़प वेदना का रहा,जीवन भर का साथ।। मन की अंतर्वेदना, समझ सका है कौन। बढ़े पीर हद से अधि... Read more

करो नारी खुद पर विश्वास

************************** श्रृंगार छंद 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य ★★★★★★★★★★★★ करो नारी खुद पर विश्वा... Read more

शब्द रंगोंली

गम खुशियों की खेले होली। शब्दों से बनती रंगोली। कभी हृदय में शूल चुभातें , कभी कर्ण में मिश्री घोली। अंतर मन को छलनी कर दे... Read more

वीर बालिका

नन्हीं-मुन्हीं वीर बालिका, भय नाशक अरु देश सेविका । शीश उठाकर सीना ताने। ये दीवाने हैं मस्ताने। खाकी वर्दी टोपी डाले। कां... Read more

कुर्सी

देखो कुर्सी के लिए, नेता में तकरार। यहाँ सभी के मूँह से, टपक रहे हैं लार।। निकल पड़े नेता सभी,ले दल-बल हथियार। इक दूजे पर कर ... Read more

नारी शक्ति

सहमा सहमा है चमन, डरा हुआ हर फूल। खूनी पंजा हर जगह, लिए हाथ में शूल।। सभी शक्तियों की रही, नारी ही अवतार। पर सदियों से सह रह... Read more

भोर

महाश्रृंगार छंद सृजन भोर ने जब भी खोली आँख, लालिमा लेकर अपने संग। मिटा अवसादों का हर जाल, दिशा हो जाती है खुश रंग। मलय ... Read more

नारी

महाशृंगार_छंद_सृजन_ ईश करते नारी में वास,यही देवी दुर्गा अवतार। भरे नित जीवन में उल्लास,जगत जननी ये पालन हार । बहन ,बेटी,... Read more

मँहगाई

श्रृंगार छंद 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य नित्य मँहगाई करे कमाल। आम जनता की उधड़े खाल। तीन सौ के ल... Read more

मुक्तक

पंचचामर (मापनी युक्त मात्रिक) विधान - 2121 2121 2121 212 हैं उजास पूर्ण राम, रूप ध्यान कीजिये। हैं दयालु, दीन बन्धु,दीप दान की... Read more

मुक्तक

पंचचामर छंद (मापनी युक्त मात्रिक) विधान - 2121 2121 2121 212 जो कभी गुमान दंभ, भूल से नहीं किया। प्रात काल राम नाम,नित्य प्... Read more

गधा चला पढ़ने विद्यालय,

सार छंद 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 गधा चला पढ़ने विद्यालय, ले हाथों में बस्ता। चलते-चलते भूल गया वह, विद्यालय का रस्ता। इधर- उधर वह दे... Read more

प्याज

श्रंगार छंद रोज गिर रहा दीन पर गाज। हुआ है कितना मँहगा प्याज़। प्याज़ मिलता है ऊँचे दाम। नमक मिर्ची से चलता काम। नही... Read more

गौरैया

विधा.. लावणी छंद ★★★★★★★★★ बिन वर्षा जंगल सूखा है, सूखे सब ताल तलैया। सूखी टहनी पर बैठी हूँ,मैं गुमसुम-सी गौरैया। उजाड़ दि... Read more

मुक्तक

देखो मोबाइल की सबको,लगी है कैसी बीमारी । क्या बूढ़े क्या बच्चे सब पर, हुआ है ये अब तो भारी । खाते-पीते,सोते-उठते, इसी को ढ़ूढ़ा ... Read more

बोल बम-बम कांवड़िया बोल।

शृंगार छन्द 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य बोल बम-बम कांवड़िया बोल। सदा शिव की मस्ती में डोल। पुण्य ... Read more

देव अब जो करना निर्माण।

******************** शृंगार छंद 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य ******************* देव अब जो करना निर्... Read more

रुगी छंद

छोटी रोटी थोड़ी मोटी लड्डू गोल मीठी बोल। खीरा छोड़ हीरा तोड़ माथे झोल पेटी खोल माया जाल बूरा हाल बैठा काल तोड़... Read more

मार-पीट से बच्चा

मार-पीट से बच्चों का, कोमल मन होता तार-तार। मानसिक तौर पर कर देता है बच्चों को बीमार।। मारने वालों के प्रति पैदा होता ह... Read more

पलाश

1) पलाश सखी सौन्दर्य के प्रतीक आभा वसंती। 2) लाल-लावा दुनिया को सजाता रंग लुटाता। 3) पलाश आया उपवन मुस्कारा फागु... Read more

दीनानाथ

विधा-बरवै छन्द ****************** बहुत दीन अनाथ हूँ, दीनानाथ। सिर पर अब रख दो प्रभु ,अपना हाथ।। दुनिया रंग बिरंगी,मिले न मीत... Read more

मुक्तक

मुश्किलों को देख कर भी वीर घबराते नहीं। चल पड़े जिस राह पर फिर, लौट कर आते नहीं। कर्म योद्धा जो बना सब,यत्न से हासिल करें- मंजि... Read more

जय श्री राम।

विधा-बरवै छन्द ****************** नित्य जपो मन मेरे,जय श्री राम। प्यारा प्रभु की नगरी, प्यारा नाम।। जीवन छोटी नैया, प्रभु पतव... Read more

भोर का आनंद लै लो

छन्द - रजनी मापनी युक्त मात्रिक । 23 मात्रा , 19 - 9 पर यति । यह छन्द राधा का वाचिक रूप है । मापनी - 2122 2122 2122 2 श... Read more

बालमा ओ बालमा (विरह गीत)

विधा-रूपमालाछंद ★★★★★★★★★★ बालमा ओ बालमा जी,क्यों गये परदेश। चार पैसे के लिए दिल,पर लगा कर ठेस। हाय तेरी नौकरी से, छिन गया सुख... Read more

बचपन

रूपमाला छंद +++++++++- बाल मन निर्मल बहुत है,और हैं मासूम। रूठते पल में मनाते, खिलखिलाते झूम। रूप है भगवान जैसा, है, हृदय ... Read more

सर्द की रात( विरह)

रूपमाला छंद शिल्प-14'10की यति पर चरणान्त गुरु लघु मापनी-2122,2122, 2122 21 ********************************* काटते कटती नहीं ... Read more

क्रोध की ज्वाला

क्रोध से क्रोध को लगी हवा। क्रोध की ज्वाला भभक उठा। क्रोध से क्रोध पर त्योरियाँ चढ़ी। उचित- अनुचित सब दूर खड़ी। यकायक तन झंक... Read more

सरस्वती वंदना

रूपमाला छन्द ★★★★★★★★ हे भवानी! भारती! मुझ पर करो उपकार। हाथ जोड़े हूँ खड़ी कर लो नमन स्वीकार। दीप आशा की जलाये आ गई हूँ ... Read more

सरस्वती वंदना

हरिगीतिका छंद ★★★★★★★ हे भारती! तप साधिका विद्या,कला,शुभदायिनी। हे मात! नत मस्तक नमन है, वंदना नित नंदिनी। माँ!सौम्य रूपा,चं... Read more

उजाला

सदा अँधेरे से घिरा, सपने काले रंग। रहा उजाला ढूँढता, मिला नहीं पर संग।। घनी अँधेरी जिन्दगी, नहीं उजाला साथ। दीपक बन जलना पिया... Read more

बजरंग बली

तिलका छंद विधान-दो सगण सूत्र पर आधारित। ★★★★★ बजरंग बली। दर आज चली। जयकार भली । रिपु तोड़ नली । हृद राम-सिया। गुणगान कि... Read more

प्रेम

-तिलका छंद ★★★★★★ जब प्रेम किया। बस प्रेम किया। मुख मोड़ लिया। जग छोड़ दिया। मन फूल खिला। जब प्रेम मिला। किस राह चल... Read more

संकोच

जितनी सुन्दर भावना, उतनी सुन्दर सोच। सूर्य किरण की तेज से, सिमट गया संकोच।। साहस संयम से बढ़ो, करो नहीं संकोच। किया अगर संकोच... Read more

सूरज/सूर्य

-दोहा गीत सूरज पूरब से उगा, लाया नवल प्रभात। सभी ओर है रोशनी, खत्म हुई अब रात। नव-कलियाँ खिलने लगीं, फूलों पर मुस्कान। ... Read more

वीर साहसी बनो

- रक्ता छंद रगण जगण+गुरु =(७वर्ण) वीर साहसी बनो। यूँ न आलसी बनो। सूर्य चंद्र -सा बनो। रत्न यत्न से चुनो। लक्ष्य साध क... Read more

प्रकृति

प्रकृति एक "माँ“की तरह, रखती सबका ख्याल। हैं ये जीवन दायनी, इसको रखो सँभाल।। १ नीर , हवा , भोजन ,वसन, मुफ्त लुटाती दान। स्... Read more

कभी-कभी

कभी-कभी हर काम में, सबसे होती भूल। गलती गिन कर आप यूँ, नहीं चुभाएँ शूल।। नमक रसोई में रखा,उठ कर लेते आप। बिना नमक का दाल फि... Read more

करवा चौथ

सभी सुहागिनों को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।प्रभु सबको सौभाग्यशाली बनाये रखें। व्रत है करवा चौथ का, पूरा दिन उपवास। चाँद सफल... Read more