MA B Ed (sanskrit) My published book is ‘ehsason ka samundar’ from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

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पुलवामा काला दिवस

आँखों से आँसू बहे, कलम रक्त की धार। हुआ आज कश्मीर में, वीरों का संहार।। बिलख रही माँ भारती, धर लो रूप प्रचंड। उठा रहा रिपु... Read more

मित्र

मद मादक मदमस्त सा,घुला साँस में इत्र। मन मन्दिर महका गया, मोहक मनहर मित्र।। कैनवास पर फैलते, रंग बिरंगे चित्र। भाग्य कर्म ... Read more

परछाई

चाहे कितना भी अधिक, श्वेत मनुज का अंग। उसकी परछाई मगर, होती काली रंग।। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

चंचल हुआ नवल भू यौवन प्रिय । पा स्नेहिल स्पर्श आलिंगन प्रिय। रूप रस गंध की सरिता मचली - करने वसंत का अभिवादन प्रिय। -लक्ष्मी... Read more

विरह वसंत

पिया नहीं आये सखी,क्यों आ गया बसंत। दहके टेसू-सा बदन,तृष्णा भरे अनंत।। १ कोयलिया कुहके सखी, सुध बुध लेती छीन। बौराई हूँ आम सी,त... Read more

मुक्तक

बाहर चंदन सा महक रहा, लेकिन अंदर से खारा है। आने जाने की चक्की में, पिसता मानव बेचारा है। बस लगा रहा अपनी धुन में, ... Read more

मुक्तक

केशरिया वस्त्र पहन, मानो कोई संत आ गया। सकुचाई शकुन्तला, उपवन में दुष्यंत आ गया। मनहारी सकल सृष्टि, मादक सुगंध चहुँ दिश बिखरे - ... Read more

मुक्तक

हे सौम्य रूपा, रूचिर वीणा वादिनी जयति जय माँ। माँ शारदा वागीश्वरी वरदायिनी जयति जय माँ। हे विद्या, कला, बुद्धि प्रदा, तमस हारिनी... Read more

मकरंद

गुंजित सुमनों के अधर,जब नेहों के छंद। केसरिया के रंग से, झड़ते हैं मकरंद।। कवि वसंत पर लिख रहे, कविता दोहा छंद। हर्फ - हर्फ ... Read more

मुक्तक

जो फूल ही फूल है बाहर से। वो जख्म ही जख्म है अंदर से। सहमा- सहमा बेगुनाह चिराग - कुछ सितमगर हवाओं के डर से। -लक्ष्मी सिंह Read more

चाॅक्लेट

मै लाई बाजार से, इक चाॅक्लेट बार। स्वाद भरा इतना अधिक , जैसे माँ का प्यार।। १ चाॅक्लेट डे से हमें, बहुत अधिक है प्यार। क्योंक... Read more

मुक्तक

जुबाँ से कह न पाऊँगी,समझ लो आँखो की बोली। जरा तुम ध्यान से देखो बनी है तेरी रंगोली। समर्पण है समर्थन है मैं बनूँ हर ... Read more

मुक्तक

जागते आँखों में कोई ख्वाब आया था। आसमाँ से जमीं पर आफताब आया था। महक उठा है मेरे मन का हर इक कोना - लगता है मुझ से मिलने गुलाब... Read more

वसंत

1) आया वसंत फूटे कोपल अनंत शीत का अंत। 2) वसंत आता गीत गाता मुस्काता पंख फैलाता। 3) सुन्दर धरा चुनरी ओढ़े हरा फ... Read more

मुक्तक

हरदम हमदम बनाना चाहती हूँ। तेरा हर गम चुराना चाहती हूँ। तेरा हमसफर हमराही बनूँ मैं - कदम से कदम मिलाना चाहती हूँ। -लक्ष्मी सिंह Read more

प्रिय विरह - २

स्मृति प्रेम की नींद में, सुख क्रीड़ा का ध्यान। सुख चपला की छटा, हर लेती है ज्ञान ।। १ अश्रु भीगते नित नयन, अविरल जल की धार। ... Read more

चूड़ियाँ

युग बदला, बदला नहीं, चूड़ी का श्रृंगार। इस युग में भी चूड़ियाँ, मिलते कई प्रकार।। १ फैशन के युग में बने, नित नूतन आकार। हर य... Read more

जुगनू

जुगनू जगकर रात भर, क्या करती हैं खोज। खुद ही खो जाती सुबह, क्रम चलता हर रोज।। १ भरी दुखों से जिन्दगी, नहीं अँधेरा साथ। मैं ज... Read more

तन्हा पलाश

1) तन्हा पलाश, भौंरा आये ना पास, खड़ा उदास। 2) पलाश रस्ते सजे ना गुलदस्ते दर्द सहते। 3) पलाश लाल गूँथता नहीं माल... Read more

क्यो परदेशी होती हैं बिटिया

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया, क्यों परदेशी होती है बिटिया? पिता आँगन जो फूल सी खिलती, महक ले जाती दूसरी बगिया। बाबुल आँगना... Read more

हास्य दोहे

कविता दिल्ली आ गई, छपी खबर अखबार। हमने पढ़कर ये खबर, लिख दी फिर दो-चार।। कविता है मनमोहिनी, बड़ी रसीली नार। जिसको पाने के ... Read more

मरीचिका

मरीचिका हँसती रही, लगा मनुज को बेंत। मृत भू में जल ढ़ूढता,सच है केवल रेत।। १ मन मेरा भरमा गया, इक आशा की फाँस। मरीचिका केवल... Read more

मुक्तक

पानी बहुत अधिक गहरा होता है रेगिस्तान में। मृग मनुज दोनो ही दौड़ते मरीचिका के भान में। लेकिन जल की लुभावनी प्रतिछवि देती केवल मौ... Read more

फिजा

लेकर आई है फिजा, मेरे प्रिय को आज। मैं दिल की कैसे कहूँ, अाये मुझको लाज।। १ दीपक उर में प्रेम की, फिजा हुई सतरंग। बगिया मेरी... Read more

दोहा

प्रात काल उठकर करें, नित भू को स्पर्श। अन्न, जल, आश्रय सदा , देती हमें सहर्ष।। जिस घर में हो प्रभु भजन, वहीं रहे भगवान। जि... Read more

उम्मीद

सब कुछ खो जाये अगर, मत खोना उम्मीद। सपने आते हैं तभी, जब आती है नींद।। एक सजग इंसान ही, करता है उम्मीद। बिन कारण खोता नहीं... Read more

क्रोध

चार नरक के द्वार हैं,काम,लोभ ,मद,क्रोध। जीवन उसका है सफल,जिसको इसका बोध।।१ क्रोध दूसरों में करे, सिर्फ क्रोध संचार। करे शांति... Read more

मुक्तक

गर निगाहें सुन्दर हो तो अदा मार देती है। दिल से जो निकलती है वो सदा मार देती है। उलझा हुआ हूँ मैं अपनी हाथ की लकीरों में - गर ... Read more

मुक्तक

नया कानून माँगती हूँ नूतन संविधान कीजिए । रहे सुरक्षित बहू-बेटियाँ ऐसा जहान कीजिए। नित दिन दरिन्दगी बढ़ रहा है यह देश शर्मसार है... Read more

मुक्तक

तुम ही भारत के बाल वीर हो। अभिमन्यु सरीखे महा धीर हो। अमित शक्ति क्षमता के मालिक तुम- अति तीव्र दो धारी शमशीर हो। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

कश्मीर से कन्याकुमारी। वीरों की यह धरा हमारी। पावन है गणतंत्र देश का- हमें जान से ज्यादा प्यारी। -लक्ष्मी सिंह Read more

बेटियाँ

एक पुत्र को जन्म दूँ, रही सभी की चाह। दो बेटी की माँ बनी, मुझे नहीं परवाह।। १ मुझे मिली जब बेटियाँ, समझ न आई बात। जग ने ताने ... Read more

गणतंत्र

आज बहुत पावन दिवस, आया है गणतंत्र। अमर तिरंगा देश का, गाओ गौरव मंत्र।। १ आज दिवस गणतंत्र है, जिस पर हमको गर्व। देशभक्ति बलिदा... Read more

दुख

दुख के आँचल में छिपा, सभी सुखों का सार। सघन सजल सब भावना, है जिसका आधार।। ऊपर है भगवान तो, नीचे दुख का ढेर। चमके सूरज नित गगन, ... Read more

नारी शक्ति

हे! मृदु स्वर लहरी बदल, कर भीषण ललकार। लाज बचाने के लिए , करो तेज तलवार।। १ फूट पड़े ज्वाला सभी, दो कस कर ललकार। काँप उठे सु... Read more

परिवार

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 इक अभिन्न-सा अंग है, जीवन में परिवार। प्रेम - स्नेह से सींच कर, स्वर्ग बने घर-द्वार।। १ सुन्दर बगिया फूल की, है अपना प... Read more

मुक्तक

नाज-नखरे व लटके-झटके, कभी पसंद न आई। एक मोहिनी भोली सूरत दिल में रही समाई। गजब सादगी में सुन्दरता मन विचलित कर जाए- शर्म ... Read more

मुक्तक

तुझे दिल में उतारूँ मैं। नजर भर कर निहारूँ मैं। छुपाकर याद को तेरी - हकीकत को सवारूँ मैं। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

फूटे हुए मटके में जज्बात भरती हूँ। भरता नहीं है फिर भी दिन-रात भरती हूँ। मिटते नहीं हैं दर्द बेजुबान अश्कों से- टूटे हुए इस दिल... Read more

साग

आया मौसम साग का, पोषण से भरपूर। नित इसका सेवन करें, रोग रहेगा दूर।।१ पालक, चौलाई, चना, सोया, सरसो साग। सदा स्वस्थ तन को रखे,... Read more

काम

हुआ मशीनों का मनुज,कितना आज गुलाम बटन दबाते ही सभी, हो जाते हैं काम।। १ छोटे बच्चे भी कभी, कर जाते वो काम। बड़े-बड़े जिस का... Read more

सर्द

सूर्य देव मद्धिम हुए, उतरा नभ का ताप। श्वेत घना घन कोहरा, बरस रहा चुपचाप।। १ धुआँ-धुआँ-सा बन उड़े, रूई की सी फाह। ठिठुरी ठिठ... Read more

कर्म

होनी तो होकर रहे, मत कर व्यर्थ विचार। कर्म पंथ पर बढ़ लो, यह जीवन का सार।। १ दिल में मानवता रखें, होठों पर मुस्कान। बिना स्... Read more

याद

खट्टी-मीठी सी लगे, भूली बिसरी याद। यादों में आते सभी, जब जाने के बाद।। १ बीत रहा जो पल यहाँ, बन जाते हैं याद। जो गम खुशियों... Read more

विश्वास

जग में मुश्किल कुछ नहीं, हो मन में विश्वास। हिम्मत से बढ़ते रहो, पूरी होगी आस।। १ जीवन पतझड़ सा लगे, होना नहीं उदास। फूल खिल... Read more

भारत और इंडिया तुलनात्मक सृजन

भाव, ताल औ"राग से, निकला भारत देश। आज बना है इंडिया, बदल गया परिवेश।। १ देवों ने जिसको रचा, अपना भारत धाम। बदल दिया अंग्रेज ... Read more

नव वर्ष

आज रात है आखिरी, बीत रहा है साल। झूमे स्वागत में सभी, चमक रहे हैं गाल।। १ साल पुराना हो रहा, आज सभी से दूर। क्या करना जब है य... Read more

मन

1) पावस मन, बतास सा बदन, मग्न झूमता। 2) टेसू सा मन, रंग भरा जीवन, सदा मुस्काता। 3) इत्र सा मन, गुलाबों सा बदन, ... Read more

माँ का चुम्बन

1) चेहरे पर, अधरों की छुअन, माँ का चुम्बन। 2) चोट लगे तो, बनती मलहम, माँ का चुम्बन। 3)प्रथम स्पर्श, प्रथम आलिंगन... Read more

मेरी तकदीर

सब चले जाते हैं। मैं बंद कमरे में अकेली रह जाती हूँ। तन्हाईयों से लड़ती हूँ। उन्हीं से बातें करती हूँ। दरों-दिवार चिखती ... Read more