MA B Ed (sanskrit) My published book is ‘ehsason ka samundar’ from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

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चुनाव

लोकतंत्र इस देश का, दिया हमें अधिकार।। अपना नेता खुद चुने,ले मत का हथियार।। हर मतदाता वोट दे,लेकर निर्मल भाव। बटन दबाना सोच ... Read more

आँसू

होता दिल में दर्द जब, बढ़े हृदय की ताप। मोती बनकर बह चले,आँसू तब चुपचाप।।१ आँसू की होती नहीं, कोई भी पहचान। गम हो चाहे हो खुश... Read more

गर्मी

अब गर्मी बढ़ने लगी, इतना रखना ध्यान। नित पानी छत पर रखें ,बचे परिन्दा जान।। दिल्ली वासी ने किया, जाने कैसा पाप। प्रचंड गर्... Read more

मेरे मन के अंधेरे कमरे में

मेरे मन के अंधेरे कमरे में अनेक ही ख्वाब पलते हैं। कुछ अधुरे से, कुछ पूरे से, इन ख्वाबों के परिंदों को मैं उड़ाना चाहती हूँ।... Read more

तितली

तितली रानी आ गयी, लेकर रंग हजार। फूल फूल पर डोलती, करती उससे प्यार।। -लक्ष्मी सिंह Read more

कलंक

श्वेत धवल से वसन पर,लिपट गया जब पंक। धोने से धुलता नहीं, ऐसा दाग कलंक।। काजल से काला अधिक, जीवन भर का डंक। काजल धुल जाये मगर... Read more

चैत्र माह नववर्ष

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, सब के लिए विशेष। सूर्य-चंद्र आधार पर, नया वर्ष इस देश।।१ प्रकृति में चारों तरफ, छाया शुभ संदेश। नव ... Read more

तारे

श्वेत धवल किरणें लिए, निकले चाँद- सितार। रोज दिवाली है गगन, सजते दीप हजार।।१ टिम-टिम कर हँसते मगन, तारों का संसार। हँस-हँस सब... Read more

अच्छा लगता है

बारिश में भीगना, बूंदों को चूमना, गीले जुल्फों को झटकना, नैनों को मटकाना, कितना अच्छा लगता है। कोयल के संग कूकना, मोर ... Read more

संयम

श्रम ,संयम की वंदना, करता जा तू कर्म। कर्म करे किस्मत बने, जीवन का यह मर्म।। जीवन के हर क्षेत्र में, संयम है अनिवार्य। मंजिल... Read more

हस्तशिल्प

हस्तशिल्प अद्भुत कला, रचनात्मक उत्पाद। जिसमें होता है मिला,रक्त-स्वेद का खाद।। १ हस्तशिल्प है हाथ के, कौशल से तैयार। रीति रिव... Read more

आवास

तिनका-तिनका जोड़कर, बनता है आवास। भाव एक सम हो जहाँ, सुख-शांति का निवास। । छोटा चाहे हो बड़ा, हो अपना आवास। खुशियों से परिपूर्... Read more

नारी

यहाँ शुरू से ही रहा, समाज पुरुष प्रधान। नारी को हरपल मिला,पुरुष बाद स्थान।। हो जिस घर औ” देश में,नारी का सम्मान। रहता घर खुशहा... Read more

सत्य

सदा विजय हो सत्य की, हो असत्य की हार। रहे तनिक भी भय नहीं, साहस जिसके द्वार।। पाप तिमिर सब मिट गया, फैला सत्य प्रकाश। आततायी ... Read more

महाशिवरात्रि

अति शुभ मंगलमय दिवस,आज महाशिव रात। शिव शंकर दुल्हा बने,अद्भुत है बारात।।१ शिव गौरा व्याहन चले, सकल देवता संग। भूत प्रेत पिशाच... Read more

वीर-जवान

सीमा पर डट कर खड़े, रहते वीर जवान। मातृभूमि के वास्ते, हो जाते कुर्बान।। गोली खाकर जो खड़े, रहते सीना तान। बहे देश हित के लिए... Read more

भारत का एयर स्ट्राइक

बंद कलम को मिल गई, ताजी नई खुराक। कानों में जैसे पड़ा, छप्पन इंची धाक।। मंगल ही मंगल रहा, शुभ मंगल है आज। गढ़ दुश्मन का हिल ग... Read more

देश- विरोधी तत्व

साँप-सपोलों की तरह, देश विरोधी लोग। करो शीघ्र उपचार कुछ, खतरनाक यह रोग।। खत्म जड़ों से कीजिये,देश विरोधी तत्व। धर्म जाति के ... Read more

सनम

आज अभी इस बात का, करते हैं इजहार। तू ही दिल धड़कन सनम, तू ही मेरा प्यार।। मैं नदिया की धार हूँ, बहती तेरे संग। रोक सको तो रो... Read more

मुक्तक

जो भी इधर बढ़ाया कदम वो बूरी तरह जल जायेगा। रिपु की धरती पर सुन लो अब अपना झंडा लहरायेगा। गूँज उठा है नभ मंडल हर हर महादेव के न... Read more

मुक्तक

संकट में हो मातृभूमि तब हर व्यक्ति हुंकारा है। जिसने दृष्टि हम पर डाली उसे कुचल कर मारा है। अब रिपु की धरती भी रक्त के आँसू रोये... Read more

मुक्तक

मुस्कुराता, इठलाता,लगे बचपन प्यारा-प्यारा। जीवन की जीवन्तता, मस्ती के पल ढेर सारा। बेपरवाह, निश्चित, मासूमियत, शरारत से भरा, ई... Read more

श्रृंगार रस

भाव रूप उर में बहे, जो बनकर रस धार। सभी रसों का मूल रस, रसपति है श्रृंगार।।१ सब रस में श्रृंगार रस, कहलाता रस राज। जिसने सद... Read more

मुक्तक

भड़क उठे है दिल में शोले आँखों में अंगार। ऐसे रिपु को जिन्दा छोड़े तो जीवन धिक्कार। हर शहीद का बदला लेगें देगें सीना चीर - युद... Read more

मुक्तक

आतंकी गद्दारों के सीने में गोली भर डालो। संयम टूटा गुस्से का शत्रु का शीश चिता पर डालो। सैनिक की कीमत क्या होती इनको जाकर बतलाओ ... Read more

पुलवामा शहीद दिवस

आँखों से आँसू बहे, कलम रक्त की धार। हुआ आज कश्मीर में, वीरों का संहार।। १ इंच - इंच ताबूत में, आया माँ का पूत। भस्म करो आतंक... Read more

मित्र

मद मादक मदमस्त सा,घुला साँस में इत्र। मन मन्दिर महका गया, मोहक मनहर मित्र।। कैनवास पर फैलते, रंग बिरंगे चित्र। भाग्य कर्म ... Read more

परछाई

चाहे कितना भी अधिक, श्वेत मनुज का अंग। उसकी परछाई मगर, होती काली रंग।। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

चंचल हुआ नवल भू यौवन प्रिय । पा स्नेहिल स्पर्श आलिंगन प्रिय। रूप रस गंध की सरिता मचली - करने वसंत का अभिवादन प्रिय। -लक्ष्मी... Read more

विरह वसंत

पिया नहीं आये सखी,क्यों आ गया बसंत। दहके टेसू-सा बदन,तृष्णा भरे अनंत।। १ कोयलिया कुहके सखी, सुध बुध लेती छीन। बौराई हूँ आम सी,त... Read more

मुक्तक

बाहर चंदन सा महक रहा, लेकिन अंदर से खारा है। आने जाने की चक्की में, पिसता मानव बेचारा है। बस लगा रहा अपनी धुन में, ... Read more

मुक्तक

केशरिया वस्त्र पहन, मानो कोई संत आ गया। सकुचाई शकुन्तला, उपवन में दुष्यंत आ गया। मनहारी सकल सृष्टि, मादक सुगंध चहुँ दिश बिखरे - ... Read more

मुक्तक

हे सौम्य रूपा, रूचिर वीणा वादिनी जयति जय माँ। माँ शारदा वागीश्वरी वरदायिनी जयति जय माँ। हे विद्या, कला, बुद्धि प्रदा, तमस हारिनी... Read more

मकरंद

गुंजित सुमनों के अधर,जब नेहों के छंद। केसरिया के रंग से, झड़ते हैं मकरंद।। १ कवि वसंत पर लिख रहे, कविता दोहा छंद। हर्फ - हर्फ... Read more

मुक्तक

जो फूल ही फूल है बाहर से। वो जख्म ही जख्म है अंदर से। सहमा- सहमा बेगुनाह चिराग - कुछ सितमगर हवाओं के डर से। -लक्ष्मी सिंह Read more

चाॅक्लेट

मै लाई बाजार से, इक चाॅक्लेट बार। स्वाद भरा इतना अधिक , जैसे माँ का प्यार।। १ चाॅक्लेट डे से हमें, बहुत अधिक है प्यार। क्योंक... Read more

मुक्तक

जुबाँ से कह न पाऊँगी,समझ लो आँखो की बोली। जरा तुम ध्यान से देखो बनी है तेरी रंगोली। समर्पण है समर्थन है मैं बनूँ हर ... Read more

मुक्तक

जागते आँखों में कोई ख्वाब आया था। आसमाँ से जमीं पर आफताब आया था। महक उठा है मेरे मन का हर इक कोना - लगता है मुझ से मिलने गुलाब... Read more

वसंत

1) आया वसंत फूटे कोपल अनंत शीत का अंत। 2) वसंत आता गीत गाता मुस्काता पंख फैलाता। 3) सुन्दर धरा चुनरी ओढ़े हरा फ... Read more

मुक्तक

हरदम हमदम बनाना चाहती हूँ। तेरा हर गम चुराना चाहती हूँ। तेरा हमसफर हमराही बनूँ मैं - कदम से कदम मिलाना चाहती हूँ। -लक्ष्मी सिंह Read more

प्रिय विरह - २

स्मृति प्रेम की नींद में, सुख क्रीड़ा का ध्यान। सुख चपला की छटा, हर लेती है ज्ञान ।। १ अश्रु भीगते नित नयन, अविरल जल की धार। ... Read more

चूड़ियाँ

युग बदला, बदला नहीं, चूड़ी का श्रृंगार। इस युग में भी चूड़ियाँ, मिलते कई प्रकार।। १ फैशन के युग में बने, नित नूतन आकार। हर य... Read more

जुगनू

जुगनू जगकर रात भर, क्या करती हैं खोज। खुद ही खो जाती सुबह, क्रम चलता हर रोज।। १ भरी दुखों से जिन्दगी, नहीं अँधेरा साथ। मैं ज... Read more

तन्हा पलाश

1) तन्हा पलाश, भौंरा आये ना पास, खड़ा उदास। 2) पलाश रस्ते सजे ना गुलदस्ते दर्द सहते। 3) पलाश लाल गूँथता नहीं माल... Read more

क्यो परदेशी होती हैं बिटिया

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया, क्यों परदेशी होती है बिटिया? पिता आँगन जो फूल सी खिलती, महक ले जाती दूसरी बगिया। बाबुल आँगना... Read more

हास्य दोहे

कविता दिल्ली आ गई, छपी खबर अखबार। हमने पढ़कर ये खबर, लिख दी फिर दो-चार।। कविता है मनमोहिनी, बड़ी रसीली नार। जिसको पाने के ... Read more

मरीचिका

मरीचिका हँसती रही, लगा मनुज को बेंत। मृत भू में जल ढ़ूढता,सच है केवल रेत।। १ मन मेरा भरमा गया, इक आशा की फाँस। मरीचिका केवल... Read more

मुक्तक

पानी बहुत अधिक गहरा होता है रेगिस्तान में। मृग मनुज दोनो ही दौड़ते मरीचिका के भान में। लेकिन जल की लुभावनी प्रतिछवि देती केवल मौ... Read more

फिजा

लेकर आई है फिजा, मेरे प्रिय को आज। मैं दिल की कैसे कहूँ, अाये मुझको लाज।। १ दीपक उर में प्रेम की, फिजा हुई सतरंग। बगिया मेरी... Read more

नित्य-नियम

नित्य दिवस उठ कर करें, सर्व प्रथम यह काम। देख स्वयं निज हाथ को, लेना प्रभु का नाम।। १ प्रात काल उठकर करें, नित भू को स्पर्श। ... Read more