MA B Ed (sanskrit) My published book is ‘ehsason ka samundar’ from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

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प्रात काल जब सूरज निकला

-विष्णुपद छंद विधान--२६ मात्रा १६,१०पर यति,और चरणान्त वर्णिक गुरु से प्रात काल जब सूरज निकला,फैला उजियाला । नव प्रकाश नव जीवन ... Read more

बोलो कृष्ण कन्हैया।

नमन छन्दप्रवाह विधा-मद लेखा छन्द(वर्णिक) (२२२ ११२ २) ********************************** बोलो कृष्ण कन्हैया। श्री बृंदावन छैया।... Read more

मुक्तक

अमीरी नर्म बिस्तर पर गुजारे शौक़ से जीवन। ठिठुरती रात में बेबस पड़ा फुटपाथ पर निर्धन। कराहा कर्ज से जितना सताया सर्द ने उतना- क... Read more

मुक्तक

उम्र पढ़ने खेलने की माँगते हैं भीख क्यों? देश के भावी धरोहर पा रहें ये सीख क्यों? बेबसी से हो विकल ये बाल मन कुत्सित हुआ, मुख ... Read more

मुक्तक

कड़कड़ाती ठंड में वो काँपते नंगे बदन। भूख से बेकल हुए क्यों आज ये मासूम मन। पात्र भिक्षा का लिए बचपन खड़ा है राह में- दृश्य ऐसा... Read more

शीत

# -आनंद वर्धक छंद_ -------------------------------------- 2122 2122 212 सनसनाती है हवाएँ शीत की। ये कहानी कह रही है प्र... Read more

नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई।

********************************** _ सार छंद नवल वर्ष का स्वागत करने,देखो सर्दी आई। नवल रूप धरती पर बिखरा,मंगलमय ध्वनि छाई। ... Read more

मुक्तक

यादों की ओढ़ी चुनर, पहन याद की पायल। जिनसे जख्मी है जिगर, दिल उनका है कायल। नहीं बदन पर चोट का, दिखता कोई निशान- आँखों से रिसता ... Read more

सागर की लहरें सुनों

#विधा_दोहा_गीत सागर की लहरें सुनों, तुम से करूँ गुहार। झूठ-मूठ का ही सही,हमसे कर लो प्यार। । मोती मानिक से भरे,तुम हो बहुत ... Read more

मुक्तक

विरह अग्नि में जलता तन मन, भभक उठी चिन्गारी । आँखें बंद करूँ या खोलूँ, सूरत दिखे तुम्हारी। भँवर याद में उलझी रहती,कैसे सहे जुदाई... Read more

मुक्तक

गंध मादक दे रही प्रिय रातरानी नेह में। लग रही ज्यों घोलती रति गंध चंदन देह में। चाँदनी बरसे गगन से राग कितने झर रहे - पूर्ण जग... Read more

मुक्तक

जब उसने दुत्कारा मुझ को,अरमान दिलों का तोड़ चला। जीवन के सब रंगी मौसम,तब साथ हमारा छोड़ चला। नभ में सन्नाटा-सा छाया,बस दुख का ... Read more

मुक्तक

नित नयनों में बादल अटके। आँसू बन पलकों पर लटके। मोती के कमलों पर बैठी- विरहन का मन इत-उत भटके। -लक्ष्मी सिंह नई दिल्ली Read more

है नहीं मुश्किल ज़रा तुम प्यार कर देखो।

2122 2122 21222 है नहीं मुश्किल ज़रा तुम प्यार कर देखो। जीत कर भी प्यार में तुम हार कर देखो। हो भरा मन में अहं तो प्रेम क... Read more

प्रेम

राधा-मीरा की तरह,हुई प्रेम में बाध्य। दवा लगा जाओ हृदय, ओ! मेरे आराध्य। ओ मेरे आराध्य,श्याम सुंदर मनमोहन। चीर वेदना शेष,रहे बेक... Read more

जाति धर्म

प्रदत्त चित्र पर आधारित दोहे --------------------------------------- अलग अलग हर खोपड़ी, बोल रहा इक मंत्र। सब धर्मों को मान दो,तभ... Read more

मुक्तक

उठाऊँ लेखनी जब भी हृदय का दर्द झरता है। मनाऊँ लाख मैं खुद को नहीं दिल धीर धरता है। जगत को देख कर रोई बिगड़ते हाल पर रोई, कठिन ... Read more

राह कोई नयी-सी बनाते चलो।

◆छंद:-वाचिक सृग्विणी ◆मापनी:-212 212 212 212 राह कोई नयी-सी बनाते चलो। दूरियाँ मंजिलों की मिटाते चलो। जिंदगी में खुशी के कभ... Read more

मुक्तक

मृगनयनी नयनों में काजल। तीर बिना ही करती घायल। इस नयनों से कितने मरते, कितने हो जाते हैं पागल। -लक्ष्मी सिंह नई दिल्ली Read more

मुक्तक

शारदा लक्ष्मी दुर्गा नाम, त्याग की प्रेम,दया की खान। द्रोपदी अनसुइया सुख धाम, सप्त सुर सरगम-सी मुस्कान। सर्व गुण संस्कारों स... Read more

मुक्तक

जब घिरते यादों के बादल। कर जाते हैं मुझको पागल। रात रात भर रोती रहती, घुल जाते नयनों से काजल। लक्ष्मी सिंह Read more

कविता

गीतिका छंदाधारित गीत भावना के फूल खिलते,हैं तभी कविता बने। तूलिका से भाव बह कर, काव्य की सरिता बने। जब हृदय में ताप बढ़ती,... Read more

वेदना

कठपुतली बन कर रही, किसी और के हाथ। तड़प वेदना का रहा,जीवन भर का साथ।। मन की अंतर्वेदना, समझ सका है कौन। बढ़े पीर हद से अधि... Read more

करो नारी खुद पर विश्वास

************************** श्रृंगार छंद 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य ★★★★★★★★★★★★ करो नारी खुद पर विश्वा... Read more

शब्द रंगोंली

गम खुशियों की खेले होली। शब्दों से बनती रंगोली। कभी हृदय में शूल चुभातें , कभी कर्ण में मिश्री घोली। अंतर मन को छलनी कर दे... Read more

वीर बालिका

नन्हीं-मुन्हीं वीर बालिका, भय नाशक अरु देश सेविका । शीश उठाकर सीना ताने। ये दीवाने हैं मस्ताने। खाकी वर्दी टोपी डाले। कां... Read more

कुर्सी

देखो कुर्सी के लिए, नेता में तकरार। यहाँ सभी के मूँह से, टपक रहे हैं लार।। बीच सड़क नेता खड़े,लगा रहें हैं टेर। इक दूजे का द... Read more

नारी शक्ति

सहमा सहमा है चमन, डरा हुआ हर फूल। खूनी पंजा हर जगह, लिए हाथ में शूल।। सभी शक्तियों की रही, नारी ही अवतार। पर सदियों से सह रह... Read more

भोर

महाश्रृंगार छंद सृजन भोर ने जब भी खोली आँख लालिमा लेकर अपने संग। मिटा अवसादों का हर जाल, दिशा हो जाती है खुश रंग। मल... Read more

नारी

महाशृंगार_छंद_सृजन_ ईश करते नारी में वास,यही देवी दुर्गा अवतार। भरे नित जीवन में उल्लास,जगत जननी ये पालन हार । बहन ,बेटी,... Read more

मँहगाई

श्रृंगार छंद 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य नित्य मँहगाई करे कमाल। आम जनता की उधरे खाल। तीन सौ के लह... Read more

मुक्तक

पंचचामर (मापनी युक्त मात्रिक) विधान - 2121 2121 2121 212 हैं उजास पूर्ण राम, रूप ध्यान कीजिये। हैं दयालु, दीन बन्धु,दीप दान की... Read more

मुक्तक

पंचचामर छंद (मापनी युक्त मात्रिक) विधान - 2121 2121 2121 212 जो कभी गुमान दंभ, भूल से नहीं किया। प्रात काल राम नाम,नित्य प्... Read more

गधा चला पढ़ने विद्यालय,

सार छंद 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 गधा चला पढ़ने विद्यालय, ले हाथों में बस्ता। चलते-चलते भूल गया वह, विद्यालय का रस्ता। इधर- उधर वह दे... Read more

प्याज

श्रंगार छंद हुआ अच्छे दिन का आगाज़। जेब में रखकर घूमो प्याज़। प्याज़ मिलता है मँहगे दाम। नमक मिर्ची से चलता काम। नहीं अ... Read more

गौरैया

विधा.. लावणी छंद ★★★★★★★★★ बिन वर्षा जंगल सूखा है, सूखे सब ताल तलैया। सूखी टहनी पर बैठी हूँ,मैं गुमसुम-सी गौरैया। उजाड़ दि... Read more

मुक्तक

देखो मोबाइल की सबको,लगी है कैसी बीमारी । क्या बूढ़े क्या बच्चे सब पर, हुआ है ये अब तो भारी । खाते-पीते,सोते-उठते, इसी को ढ़ूढ़ा ... Read more

बोल बम-बम कांवड़िया बोल।

शृंगार छन्द 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य बोल बम-बम कांवड़िया बोल। सदा शिव की मस्ती में डोल। पुण्य ... Read more

देव अब जो करना निर्माण।

******************** शृंगार छंद 16मात्रा/आरंभ में त्रिकल, द्विकल फिर त्रिकल अनिवार्य ******************* देव अब जो करना निर्... Read more

रुगी छंद

छोटी रोटी थोड़ी मोटी लड्डू गोल मीठी बोल। खीरा छोड़ हीरा तोड़ माथे झोल पेटी खोल माया जाल बूरा हाल बैठा काल तोड़... Read more

मार-पीट से बच्चा

मार-पीट से बच्चों का, कोमल मन होता तार-तार। मानसिक तौर पर कर देता है बच्चों को बीमार।। मारने वालों के प्रति पैदा होता ह... Read more

पलाश

1) पलाश सखी सौन्दर्य के प्रतीक आभा वसंती। 2) लाल-लावा दुनिया को सजाता रंग लुटाता। 3) पलाश आया उपवन मुस्कारा फागु... Read more

दीनानाथ

विधा-बरवै छन्द ****************** बहुत दीन अनाथ हूँ, दीनानाथ। सिर पर अब रख दो प्रभु ,अपना हाथ।। दुनिया रंग बिरंगी,मिले न मीत... Read more

मुक्तक

मुश्किलों को देख कर भी वीर घबराते नहीं। चल पड़े जिस राह पर फिर, लौट कर आते नहीं। कर्म योद्धा जो बना सब,यत्न से हासिल करें- मंजि... Read more

जय श्री राम।

विधा-बरवै छन्द ****************** नित्य जपो मन मेरे,जय श्री राम। प्यारा प्रभु की नगरी, प्यारा नाम।। जीवन छोटी नैया, प्रभु पतव... Read more

भोर का आनंद लै लो

छन्द - रजनी मापनी युक्त मात्रिक । 23 मात्रा , 19 - 9 पर यति । यह छन्द राधा का वाचिक रूप है । मापनी - 2122 2122 2122 2 श... Read more

बालमा ओ बालमा (विरह गीत)

विधा-रूपमालाछंद ★★★★★★★★★★ बालमा ओ बालमा जी,क्यों गये परदेश। चार पैसे के लिए दिल,पर लगा कर ठेस। हाय तेरी नौकरी से, छिन गया सुख... Read more

बचपन

रूपमाला छंद +++++++++- बाल मन निर्मल बहुत है,और हैं मासूम। रूठते पल में मनाते, खिलखिलाते झूम। रूप है भगवान जैसा, है, हृदय ... Read more

सर्द की रात( विरह)

रूपमाला छंद शिल्प-14'10की यति पर चरणान्त गुरु लघु मापनी-2122,2122, 2122 21 ********************************* काटते कटती नहीं ... Read more

क्रोध की ज्वाला

क्रोध से क्रोध को लगी हवा। क्रोध की ज्वाला भभक उठा। क्रोध से क्रोध पर त्योरियाँ चढ़ी। उचित- अनुचित सब दूर खड़ी। यकायक तन झंक... Read more