KR wanika

Joined January 2017

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जीवन-रंग

-:जीवन-रंग:- ऊसर धरा को उर्वर कर तुम आज मुझे खिल जाने दो, खो गया था खुद से मैं कबका पर अब खुद से मिल जाने दो। कई बरसों की त... Read more

वृक्ष और बेटी

-:वृक्ष और बेटी:- तुम फलते हो मैं खिलती हूँ, तुम कटते हो मैं मिटती हूँ; तुम उनके स्वार्थ की खातिर, मैं उनके सपनों की खातिर। ... Read more

वृक्ष और बेटी

-:वृक्ष और बेटी:- तुम फलते हो मैं खिलती हूँ, तुम कटते हो मैं मिटती हूँ; तुम उनके स्वार्थ की खातिर, मैं उनके सपनों की खातिर। ... Read more