के.आर. परमाल 'मयंक'

पिपरिया (पचमढ़ी)

Joined September 2019

पूरा नाम – श्री खरगराम परमाल ‘मयंक’, पिता जी स्वर्गीय श्री कोदूलाल, ग्राम – धारपुरा, पोस्ट-चाँदौन, तहसील – बनखेड़ी, शहर- पिपरिया (पचमढ़ी) जिला- होशंगाबाद (म.प्र.) शिक्षक , पिछले 20 वर्षों से अध्यापन कार्य में संलग्न हैं ।
विद्यार्थी काल से ही काव्य रचना प्रारम्भ कर दिया था। वर्ष 1994 में ‘इनके नाम महान’ पहली रचना विद्यालयीन पत्रिका “ज्योत्सना” में सांकृतिक सचिव (विद्यार्थी संघ) के समय प्रकाशित हो चुकी है ।
अभी भी ………………
‘पर्यावरण बचाओ’
हरी-भरी हो धरा हमारी,
सृष्टि सुन्दर बने हमारी
स्वस्थ, स्वच्छ और मनमोहक हो,
हो प्रफुल्लित जगती सारी!
ऐसी तान बजाता हूँ मैं,
अपनी पहचान बनाता हूँ मैं!

जन-जन तक ये अलख जगाएँ,
सब मिल आओ पेड़ लगाएँ,
‘मयंक’ धरा की स्वच्छ छवि हो,
खुशियाँ इस तरह बाँटें हम।
ऐसा राग सुनाता हूँ मैं,
अपनी पहचान बनाता हूँ मैं!

रचयिता : के.आर.परमाल ‘मयंक’

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@माँ! तुम नहीं हो@

दरिद्र दीन-हीन दिन बीत गये सारे, पर माँ! तुम नहीं हो, मिलती भरपेट रोटियाँ साँझ-सकारे पर माँ! तुम नहीं हो! करते हैं प्यार अपार ... Read more

@इत्रों की खुशबू मंद पड़ गई@

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सोफा गद्दीदार गद्दारों को नींद बहुत आती है, घर में बिलख रही माँ, सियासत खिलखिलाती है। उजड़ रही है मांग किसी की गोद उजड़ रही, उ... Read more

' सच्चाई गाँव की'

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*आज गुरु की गरिमा, तार-तार हो गई। * गुरु और शिष्य में तकरार हो गई। झूठ की सच पर इस तरह मार हो गई, *'गुरु कुम्हार शिष्य कुंं... Read more

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तुम्हारे विरह की श़मा में जल रहा हूँ, तुम्हारी यादों के संग-संग चल रहा हूँ ! ख़लने लगा हूँ अब तो दोस्तों को अपने, वे सोचते हैं कि... Read more

'धरती पुत्र किसान'

न धूप कभी विचलित करती, न छाँह कभी आलस भरती। संतोष सदा गहना जिसका, वह देशरत्न कोई और नहीं। वह धरती-पुत्र किसान है। चाह... Read more

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हे माटी के सपूत! तुम्हें शत-शत नमन, बंजर पड़ी धरा भी तुम बना देते चमन। बाजुओं में जमाने की ताक़त है तुम्हारे । तुम पर ही आश्रित श... Read more

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मुझे नज़र आता है बेटी, तुझमें सब संसार। तू शीतल चंदन-सी खुशबू,तू रमणीक बहार।। गर्जन-तर्जन तू बादल-सी,तू बिजली-सा तार। सूरज-सी आ... Read more

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"मैं ऐसा देश बनाऊँगा" जहाँ प्रेम रहे और समता हो, जहाँ हर मानव में ममता हो , बसती जन-जन मानवता हो। मैं ऐसा वतन बनाऊँगा । मैं ऐ... Read more

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मोड़ दो रुख हवाओं का गर बाधा बन बहने लगें। फूँक दो मंत्र कानों में लबों पर शब्द बहने लगें। झुकें न वे जो झुकते हैं थकें न वे जो... Read more

'केसह पताका'

वन्दे मातरम् बोलो वन्दे मातरम्, देश हमारा हिंदुस्तान, बसती इसमें अपनी जान। बोलो वन्दे....... 'केसह' रंग पताका इसकी सदा बढ़ाये शा... Read more

'बेटी'

बेटी कुल का चाँद बनेगी, बेटी सुर का तार। उज्ज्वल दीपक बनेगी बेटी, चमकेगा घर -द्वार । गगन गरजना बनेगी बेटी, पृथ्वी-सा आधार । सू... Read more

'मलिनता का प्रहार'

हो क्‍या गया जाने निगोड़े समाज को, ताक में रख दी है सारी लोक लाज को। अब शिक्षा - मंदिर भी बचे न सुपावन, देख यूँ हृदय रोये, बरसे ज... Read more

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मेरे जीवन की धड़कन है, मेरी पलकों की फड़कन है। बरसते बादलों के बीच, बिजली सी कड़कन है। प्यारी माँ रूप सृष्टि का, दिया जीवन ये उ... Read more

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तुम मरे तो भारतभूमि ने सहर्ष तुम्हें स्वीकार किया । इहलोक से परमलोक तक मानवता का नाम दिया। हमें जिन्दा रहकर भी न जीने का अधिकार... Read more

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देश पर जान कुर्बान करूँ मैं, जन्म मिले सौ बार अगर, सौ बार मरूँ मैं, पल-पल जीवन, कण-कण तन का, स्वदेश पर न्यौछावर करूँ मैं । ... Read more