KRISHNA SHARMA

BANGALORE

Joined April 2020

श्री कृष्ण कुमार शर्मा
एम.ए.(हिंदी & शिक्षाशास्त्र), बी.एड., एम.फिल.(हिंदी), पीएच. डी.(हिंदी) अध्ययनरत
अध्यापक एवं इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ हिंदी रिसर्च में संपादकीय बोर्ड के सदस्य
जन्म स्थान :- प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
प्रकाशित रचनाएँ :- (1) “शगुन” (कहानी और कविता संग्रह)
(2) “दिशाहीन होती युवापीढ़ी” एक विश्लेषणात्मक अध्ययन |
(3) “शिष्टाचार और संस्कार” एक विश्लेषणात्मक अध्ययन |
(4) “समाजसेवी संत कुरिएकोस एलियास चावरा” का व्यक्तित्व,संक्षिप्त परिचय |

प्रकाशाधीन :- (1) चित्रा मुद्गल जी की कहानियों में संघर्ष
(2) उत्तर की बहू
(3) अवधी का दर्द

ई मेल :- kksharmapbh@gmail.com

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“दिशाहीन होती युवापीढ़ी” एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

जब किसी के ह्रदय की वेदना अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाती है तो साधारण व्यक्ति हो या कितना भी गंभीर इंसान ही क्यों न हो हर कोई अपनी अभिव... Read more

संत कोरियकोस चावरा

जब भगवान महान व्यक्ति को इस धरा पर भेजता है तो जन्म के साथ ही उसके माथे पर लिख देता है क्रांतिकारी, और फिर क्रांतिकारी के पथ में विश... Read more

जन्म दिन का हार

एक शर्मा दम्पति बच्चों के साथ बैंगलोर शहर में रहते थे उनके परिवार में दो नन्हे-नन्हे फूल यानि दो पुत्र थे, एक की उम्र लगभग १२ साल और... Read more

दो-बूंद

आज राजेंद्रनगर की तंग गलियों में एक बी एम् डब्लू के अचानक आकर रुकने से गलियों के बच्चों के लिए मानो एक अजुग्ग चीज देखने को मिल गई थ... Read more

बटी हुई माँ

आज सुनीता का बैग उसकी छोटी बहू जल्दी-जल्दी तैयार कर रही थी क्योंकि आज से अगले छ: महीने के लिए सुनीता अपने बड़े बेटे के पास जाकर रहने... Read more

कोरोना

नाजुके दौर यह कोरोना का, कदापि हितकारी नहीं है | मतिमारी गई उनकी,जो समझे इसे बीमारी नहीं है || दानव सा विकराल रूप, नित ही बढ़ता जात... Read more

फल परिश्रम का

अमनपुर गाँव में एक किसान का घर था उसके दो बेटे थे दोनों बेटे की शादी हो चुकी थी उन दोनों के बीच में चार नाती और तीन नातिने थी | किसा... Read more

गुमान

मैं टीले पर खड़ा, खुद को ऊँचा समझता रहा | कारवां आया चला भी गया, खोया गुमानो में अहम् की रंगरलियों में, थोड़ी सी सफलता में, थोड़ी सी... Read more

चीर-हरण

छा गया अँधेरा धुँआ उठ रहा है, हाल ये ही मेरे भारत हो रहा है | नैतिकता पे भारी अनैतिकता हो रही है, संतरी से मन्त्री सभी मूक दर... Read more

यादें बचपन की

कोई लौटा दे ओ मेरे बचपन की यादें, मिट्टी के घरौंदे बनाना ओ कागज की नावें चलाना | ओ गुल्ली-डंडे का अपना खेल निराला, ओ छुपान-... Read more

दिशाहीन होती युवापीढ़ी

जब किसी के ह्रदय की वेदना अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाती है तो साधारण व्यक्ति हो या कितना गंभीर इंसान ही क्यों न हो हर कोई अपनी अभिव्यक... Read more

मानव

मानव मनुष्य भी क्या जीव है, सपने ही संजोता वो उम्र भर | बालक,भाई,प्रियतम,पिता वो, कभी दुश्मनी निभाता क्रूर बन || कभी प्... Read more

सुन्दर की शाम

सुबह तक़रीबन पौने चार बज रहे होंगे कि सुन्दर की आंख खुल गई उसे उसके प्लाटून कमांडर हरी सिंह जगा रहे थे और जगा कर कहा दो मिनट में तैया... Read more

भारत में कोरोना

मनु नहीं मनुपुत्र तू, तेरे मन की न हार है | माना ये अदमें मौसम, प्रतिकूल अपार है || मानव पर आज 'कोरोना' लिए दानवातार है | अदृश्य ... Read more

अस्तित्व भारत का

हम तपे-खपे जल भट्ठी में, ओ गला सकें औकात नहीं | उगता सूरज रोक सकें वे, उनके बस की बात नहीं || समय चक्र है,घना अँधेरा, पल है उनक... Read more

चिड़िया घर की

'ह्रदय को छू लेने वाली पूर्ण काल्पनिक कहानी " इलाहबाद बीच शहर के एक पुराने मोहल्ले की तंग गली में बने आलीशान मकान की छत पर धूप स... Read more

समय महान

१. किसे सुनाऊॅ कौन सुनेगा, इस मौसम में मेरे मन की बात प्रिये | सभी मूक हैं, पर दर्द एक सा, ... Read more

कोरोना

सुनौ मनस वैश्विक महामारी , आज बनी कोरोना नाथ | कबहुँ न आवे पास जीव, मास्क मुँह औ साबुन धोवे हाथ || बैठ जीव अनोखो घर में, करो न... Read more

कटुक-वचन

कटुक-वचन दुनिया वालों,तुम मिल दीप जलाओ | कटुक वचन तुम छोड़ो, समय हमारे पास नहीं | जीवन बीत रहा मुट्ठी बंद रेत सा, चादर तानो... Read more