Kiran Panchal

Delhi

Joined November 2017

Lecturer

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ग़ालिब की ज़ुबानी

~* गज़ल *~ ग़ालिब की ज़ुबानी सोचूँ ! क्यूँ न कह जाऊं, मैं आज अपनी कहानी ज़ख्मों को लपेट लब्ज़ों में,... Read more

~* कविता *~ मेरे मन की नायिका

~* कविता *~ मेरे मन की नायिका ~~~~~~~~~~~ देखा तुम्हे, नज़र फिर कहाँ हटने वाली , वही नज़ाकत, वही अदा, इठलाने वाली ... Read more

~* मुक्तक *~

विरह वेदना सही ना जाये, आ जाओ मन मीत l हम तुम दोनो मिल कर गायें, प्रेम प्रीती के गीत l तुम बिन सूनी मन की नगरी, सूनी है सुबह... Read more

~* कविता *~

. ~= कविता =~ बहुत याद आती है मुंडेर वाली लड़की ************* वो उसका हल्की सी धुप में, बालो का सु... Read more