Khushboo kumari

Joined November 2018

अपनी शब्दों से वफ़ा करती हूँ,
एक कवि हूँ मैं, अपने परिचय को लफ़्ज़ों में अदा करती हूँ

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सुरज

धूप देता है, छाँव करता है, सूरज, हर सुबह उगता है, न ही किसी से उम्मीद, न ही किसी से कोई मांग, उगता है रोज वो, करता रहता है अपना क... Read more

गोल दुनिया

ये दुनिया का भूगोल है, धरती हमारी गोल है, अर्थशास्त्र पर दुनिया है, दौलत ही हमारी मुनिया है, राजनीति एक स्रोत है, व्यवस्था में ... Read more

माँ

तेरा रूप है मुझमे, मैं रहती हूँ तुझमें, हर आह में तुझे बुलाऊँ, तेरी आँचल में, सुकुन की नींद सो जाऊँ, माना कि कह देती हूँ तुझे झिझक... Read more