keshav bhargava

Joined January 2017

चलो संग में…,संग में कुछ गुनगुनाते हैं
कुछ तुम सुनाओ, कुछ हम सुनाते हैं

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पिता बेटी

!!कभी अपनी सी लगती हैं,कभी गैरो सी लगती हैं!! वह घर की देवी होकर भी,हमें क्यों बोझ लगती हैं!! चली जाती हैं एक दिन वह ,लगा मेहंदी ... Read more