Kuldeep mishra

Bhopal (Madhyapradesh)

Joined May 2020

●कलाम साहब ने कहा हे, यदि आप चाहते हो कि आप आने वाले समय में याद किये जाओ तो “लिखने लायक कुछ कर जाओ” या “पढ़ने लायक कुछ लिख जाओ”।
●मेरे अनुसार कविता की वास्तविक सार्थकता तभी है जब वह मूकों की आवाज , निर्जीवों की जान ,स्वंय का आत्मसम्मान बनें।

ईश का ,स्यम्भू का
अंश हूँ, आकार हूँ।
स्वयं की खोज में भटकता,
‘दीप’ हूँ ,कलमकार हूँ।

©-कुल’दीप’ मिश्रा

●जय हिंद

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भुट्टे की शाम !

भुट्टे की शाम। खास मित्र के साथ, टप टप करती बारिश की बूंदों के साथ कहाँ लगते इसके आगे महंगे , बड़े-बड़े जाम, भुट्टे की... Read more

खुद से खुद की जंग!

रंग में भी भंग है, भंग में भी रंग है जिंदगी की रेस में खुद से खुद की जंग है। युद्ध है छिड़ा हुआ इंसा है घिरा हुआ ईश के चक्रव्... Read more

जिंदगी!

हारना जरूरी न जीतना जरूरी ये जिंदगी एक खेल है , इसे खेलना जरूरी। जब तक के तुम बेठो, हर ठोकरों के बाद कुछ देर रूककर , फिर चल पड़न... Read more

मति भ्रम!

अति भ्रम , मति भ्रम न कोई हमसा , न कोई में हैं हम न बुद्धि ,विवेकम न कोई कमी , हर जगह हमीं हम मैं से पूरित अति, विश्वासी है स... Read more

आकर्षण का सिद्धांत!

“यह कविता मेरे “”आकर्षण के सिद्धांत””( law of Attraction) पर बहुत दिनों से” किये जा रहे लघुशोध को काव्यरूप देने का छोटा सा प्रयास ह... Read more

कुछ नूतन करो!

क्षण क्षण हर क्षण, पल पल प्रति पल यह ध्यान करो कुछ नया करो यथार्थ में जिओ ,बीता भूलो संबारो भविष्य, इतिहास रचो प्रति स्वांस, स... Read more

प्राकृतिक अहसास!

क़ुदरती अहसास को काव्य रूप देने का एक छोटा सा प्रयास…… कुदरत से मिलन , अद्धभुत मिलन एक ऐसा मिलन मिले ,अंतः करण बाते भी हुई, अहस... Read more

पापा आपकी ,बहुत याद आती है!

पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों का तर्पण करते समय पापाजी की बहुत याद आ रही थी,उन्ही यादों को काव्यरूप देने का लघुतम प्रयास। ●पापा आपक... Read more

पितरों का आशीर्वाद है!

पितृपक्ष विशेष! जहां जहां श्रध्दा है, वहीं वहीं श्राद्ध है। आज हम जो भी हैं, पितरों का आशीर्वाद है। उन्नति ,सुख-दुःख बैभव, ... Read more

गिलहरी की अंत्येष्टि!

प्राकृतिक विद्युत शवदाह हो गया। ●पितृ पक्ष के प्रथम दिवस दो दिवसों से जीवमृत बारिश के हल्के झोंके से प्राकृतिक विद्यु... Read more

वर्क फ्रॉम होम : कितना सुखद , कितना दुखद !

पिछले दिनों से फैली महामारी और उसके चलते हुए लॉकडाउन ने अनेक क्षेत्रों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ को जीवन की अनिवार्यता बना दिया है। महामा... Read more

जिंदगी कैसी रही!

यह कविता मेरे द्वारा अनुभव किये एक घटनाक्रम काव्य रूप है मौत उसके सामने खड़ी मुस्कुरा के उससे कहने लगी जिंदगी कैसी रही थी व... Read more

अंग अंग में जिसके शूल ,अपनी गाथा बतलाता बबूल!

अंग अंग में जिसके शूल, अपनी गाथा बतलाता बबूल। हूँ बदनाम कांटो के कारण बनस्पतियों में हूँ ,मैं आसाधारण मेरी पत्तियाँ छा... Read more

तोते का जलवा!

तोते की चोंच वो गाजर का हलवा…. चप चप करती चोंच , ऐसा है इनका जलवा। अंगूर न भाये, न भाये इन्हें जाम , भाता है केवल इनको ... Read more

झींगुर,झिं-झि ध्वनी करता!

●झींगुर झिं-झि ध्वनी करता। ●छोटे से नाजुक से चौड़े चोड़ें भूरे से दो पंखों से उड़ता कुलाचे भरता। ●कभी बैठता माथे पर ... Read more

टर टर टर टर , करते दादुर!

●टर टर टर टर करते दादुर। शायद हमसे कुछ कहते दादुर। •कहते धरा पर हम भी हैं, है अस्तित्व हमारा भी भूल न जाओ मानव तुम हमको... Read more

हे बप्पा ,लंबोदर महाराज!

हे बप्पा ,लंबोदर महाराज, नमन तुम्हें ,आ जाओ गणराज। गजानन ,बिगड़े बनाओ काज , हे बप्पा , लंबोदर महाराज। प्रथमेश्वर ,एकदन्त ,ओमकार... Read more

बर्षा!

●वर्ष के एक विशेष मौसम में होंने वाली घटना वर्षा । ●बादलो का बनना और बूंदों के रूप में बरसना बर्षा। ●टप ... Read more

अच्छा लगता है

"एक खेल" ●अच्छा लगता है जब एक खेल ढलती उम्र के साथ भी, यौवन का अनुभव कराता है। ●अच्छा लगता है जब हजार जिम्मेदारिय... Read more

स्वांस स्वांस में भारत बसता है।

चाह नही सब कुछ पाने की स्वांस स्वांस में भारत बसता है। खुशनसीब हूँ ,आभारी हूँ, जन्मभूमि भारत माता है। -जारी Read more

हालातों से युद्ध हो हुआ।

इस काव्य रचना में उन क्षणों का दर्द है जिसे इस संसार में कोई जब तक नही समझ सकता जब तक वो क्षण उस व्यक्ति की जिंदगी में ना आएं। जब क... Read more

मित्र ह्रदय का संम्बल है ! मित्रता दिवस विशेष !

सुख में दु:ख में हर मुश्किल में, हंँसकर साथ निभाता है। खड़ी दुपहरी में जो सर पर, बनकर छांँव बचाता है। अवगुण को जो छांँट-... Read more

परममित्र ,एक सी जिंदगानी

हम तीनों की एक कहानी परममित्र ,एक सी जिंदगानी अनहोनी हुई ,तीनों के साथ में कोई पिता,कोई माँ के सुख से बंचित प्राणी साध... Read more

बहन! रक्षाबंधन विशेष!

कौन सी कविता लिंखू बहनों तुम्हारे लिए , कौन सा गीत लिंखू बहनों तुम्हारे लिए तुम ही मेरी कविता ,गीतो की शब्दसः बोली हो , म... Read more

पुलिस सिपाही ,कोरोना योद्धा।

पुलिस सिपाही ,कोरोना योद्धा, बहुशः सभी का अभिनन्दन। संकटकाल में बुलंद हौसले, बारम्बार आप सब को वंदन। घर परिवार का मोह त्यागकर,... Read more

प्रयत्न कर, तू हल निकलेगा

प्रयत्न कर, तू हल निकलेगा आज नहीं तो, कल निकलेगा। अर्जुन के तीर सा, तू सध, मरूस्थल से भी, जल निकलेगा। मेहनत कर, सपने रूपी प... Read more

गुरु ईश का रूप धरा पर

गुरु ईश का रूप धरा पर जग को यही चलाते है। पंचतत्व के पुतले को, नर से भगवान बनाते हैं। बचपन में , प्रथम रूप में, माँ बनकर के आ... Read more

स्वयं का स्वयं बचाव करो!

एक विषाणु जो है जन्मा, हमारी मानवीय भूल से। पड़ा विश्व खतरे में , जिसके भीषण शूल से। अब रहना होगा संयमित , खुद के प्रति होकर ... Read more

इश्क़ हो गया।

अजीब कशमकश में है परीक्षार्थी ए जिंदगी मंजिल की तलाश में सफर से इश्क़ हो गया ये उम्र थी , इश्क ,प्यार मोहब्बत, जताने की हम... Read more

खुला लोकतंत्र

हमारे लिए , हमारे द्वारा हमारा भविष्य निर्माता, ज्ञानार्जन हेतु वेदमंत्र खुला लोकतंत्र ,सफलता का मंत्र मंजिल जब हो निकट हमारे... Read more

मैं स्वयं एक संसार हूँ!

ईश का , स्यम्भू का उस ,सर्वशक्तिमान का अंश हूँ, आकार हूँ, मैं स्वयं एक संसार हूँ। जीवन-धारा में प्रवाहित, जीवन का संचार हूँ। ... Read more

माँ शारदे !

हे मैया ,शारदे माँ ज्ञान दे ,विज्ञान दे। शब्दों को मैं माँझ सकूँ मुझको ये वरदान दे। मेरी मति मैं मैया शब्द दे, विचार दे। ... Read more