sahity sadhk

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मुक्तक - रोला छन्द में

***** तुमसे मिलकर बात , समझ मेरे ये आई | जीवन है सुर ताल , नहीं विपदा विपदाई | कल तक थी ये शाम,घोर रजनी का आँचल अब लगती है साँच ... Read more