sahity sadhk

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मुक्तक - रोला छन्द में

***** तुमसे मिलकर बात , समझ मेरे ये आई | जीवन है सुर ताल , नहीं विपदा विपदाई | कल तक थी ये शाम,घोर रजनी का आँचल अब लगती है साँच ... Read more

"गीत"

स्थाई- ***** माँ वाणी को शीश झुकाना | वन्दन अर्चन करते जाना || कविवर तुम समाज के दर्पण | दोष दिखाना राह बताना || माँ वाणी को श... Read more

"गीत"

“गीत” ___ स्थाई - ***** जाग है जिन्दगी | फाग है जिन्दगी | छंद सा जी इसे , राग है जिन्दगी |.... अंतरा - ***** एक हो मीत ... Read more

"गीतिका"

गीतिका - ------ ये' जीवन विधाता का' उपहार है | ये' माने वही जो समझदार है | बुलाती हैं’ गलियाँ मे’रे देश की विदेशी ये’ राहें... Read more

"गीतिका"

गीतिका - * * * * * साथ तेरा मिला हम सँभलने लगे | ये समय को न भाया बदलने लगे | क्या अजब रीत है इस जहाँ की सुनो पास पैसा नह... Read more

"गीत"

प्रिय तुम छेड़ो साज वही जो पहली बार सुने थे | राग वही अनुराग वही प्रिय तुम छेड़ो साज वही ..... नजरें मेरी जम जायें लब दोनों ही ... Read more

"गीत"

यदि पुष्प तेरी कामना | तो शूल भी स्वीकारना | आगे अचल पहाड़ हो पर हार तुम मत मानना मत मौन हो संग्राम में बन सिंह तुम ललकारना | ... Read more