कवि विपिन शर्मा

रामपुर, उत्तर प्रदेश पिन कोड 244901

Joined January 2018

पिता–श्री हरस्वरूप शर्मा
जन्म–02 अगस्त 1979
ग्राम–मेघानगला जदीद, पोस्ट रास डंडिया
जिला रामपुर, उत्तर प्रदेश, पिन 244901
फोन नंबर 9719046900, 9458830001

Books:
कई पत्र–पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन
आकाशवाणी केंद्र रामपुर से काव्य पाठ प्रसारण

Awards:
वर्ष 1994 में तत्कालीन राज्यपाल उत्तर प्रदेश रोमेश भंडारी द्वारा राज्य पुरस्कार से सम्मानित

Copy link to share

गीत-समय बड़ा बलवान

*गीत* वक्त के हाथों जीवन के कमान की। जय बोलो, बोलो समय बलवान की।। तुमको आज सुनाएं किस्सा, जो है आंखों देखा। जीवन था निर्वाध,न... Read more

नेताजी सुभाष चन्द्र बोष की जयंती पर....

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा, जोश भरे ऐसे उदघोष को प्रणाम है। दिल में भवानी और खून में जवानी दिखे, वतनपरस्ती वाले जोश क... Read more

गजल

दिन बुरे हों, या हों अच्छे, वो ढल ही जाएंगे। यकीन मानिए, इक दिन बदल ही जाएंगे।। आत्मविश्वास में ताकत है गजब की यारो। ठान लोगे त... Read more

मुक्तक

कुछ साँप आस्तीन में पलते ही रहे हैं, जब भी मिला मौका, हमें छलते ही रहे हैं। फिर भी बुझा पाईं नहीं नफरत की हवाएं, उम्मीद के दीपक स... Read more

मुक्तक

बेशक, तमाम मुश्किलों का हल नहीं पाया, फिर भी निराश भाव कभी पल नहीं पाया। मजबूत बहुत है मेरी उम्मीद का सूरज, जो भी रहे हालात मगर ढ... Read more

मुक्तक

जख्मों को छुपाया और मरहम छुपा लिया, पलकों से अपनी आँख का शबनम छुपा लिया। तुम रोके भी गम अपना जरा कम न कर सके, हमने हंसी की आड़ मे... Read more

मीटू अभियान पर मेरी ताजा रचना.....

देखो तो कुछ विष कन्याएं ज्ञान बांटने निकली हैं। मीटू को हथियार बनाकर गला काटने निकली हैं।। जुल्फों की लट से, नयनों से, यौवन के अ... Read more

गजल

मुश्किल हालात में भी फूल सा खिलकर रहिए। बनकर सूरज, हरेक भोर निकलकर रहिए।। वक्त के साथ बुरे दिन भी बदल जाते हैं। होकर मायूस यूं ... Read more

एक गीत स्वच्छता के नाम

गीत नहीं, गाथा है ये, स्वच्छ भारत अभियान की। बनें जागरूक, जानें हम सब, महिमा कूड़ेदान की।। ये कूड़ा-कचरा ही तो सब बीमारी का वाहक ह... Read more

मुक्तक

मिला बचपन में जो तुमको वही अधिकार दे देना, इन्हें तुम जिंदगी जीने का कुछ आधार दे देना। ये बूढ़े हो चले तो क्या हुआ मां बाप हैं आखि... Read more

मुक्तक

जो भी एहसास के शोलों पे मचल जाएंगे वे हवाओं के इक झोंके से ही जल जाएंगे। अपना दिल मोम सरीखा तो बनाकर देखो है ये दावा, दिल-ए-पत्थर... Read more

काकोरी कांड के बलिदानियों को नमन----

नौ अगस्त 1925 में जो गढ़ी कहानी। युगों-युगों तक याद करेगी माटी हिन्दुस्तानी। काकोरी स्टेशन पर डाला ऐतिहासिक डाका, अंग्रेजों का लूट... Read more

मुक्तक

बहू-बेटी, बहू-बेटी है, मेरी हो, तुम्हारी हो, इन्हें सम्मान से देखें, नजर ऐसी हमारी हो। निगाहें जो बुरी डाले, उसे फांसी पे लटका दो,... Read more

ग़ज़ल

तलब उठी है, फिर खून से नहाने की। होने लगी है तैयारी, नए बहाने की।। जहर मजहब का घोलने की सुगबुगाहट है। साजिशें रच रहे हैं, बस्ति... Read more

मुक्तक

दबी सी भावनाओं को मेरी आकार दे देना, सिकुड़ती जिंदगानी को जरा विस्तार दे देना। तुम्हारी भांति मैं भी मन की बातें कर सकूं खुलकर, मु... Read more

मुक्तक

जीवन को महकाने वाले, इत्र कहां मिलते हैं, प्रीत हो जिससे रेखांकित, वे चित्र कहां मिलते हैं। बदल रहे परिवेश में केवल स्वार्थ निहित ... Read more

ग़ज़ल

ठोंकरें खाके जो राहों में संभल जाते हैं। ऐसे ही लोग बहुत दूर निकल जाते हैं।। सैंकड़ों में से कोई एक बुझाता है शमआं। बाकी परवाने ... Read more

गजल

खुद से खुद को बचाना, ठीक नहीं। दूर अपनों से जाना, ठीक नहीं।। है खतरनाक, मौसम-ए-बारिश। इस तरहा भींग जाना, ठीक नहीं।। हैं चांद... Read more

गजल

दो दिल के दरमियां गर, तकरार नहीं होती। आंगन में फिर खड़ीं यूं, दीवार नहीं होती।। अब तो जमाने भर की, हैं ठोंकरे उसी को। जिसकी समय... Read more

ग़ज़ल

रंजो-गम अपना, छुपाना आ गया है। हां, मुझे भी मुस्कुराना आ गया है।। अब न रुसवा कर सकेंगे अश्क मुझको। आंख में उनको दबाना आ गया है।... Read more

गजल

इस मशीनी दौर में क्या हो रहा है आदमी। खा नशे की गोलियों को सो रहा है आदमी।। छा रही है हर तरफ, मतलबपरस्ती इस कदर। स्वार्थमय रिश्... Read more

भारत माँ से प्यार करो

जिस धरती पर जन्म लिया है, उस भू का आभार करो, रोम-रोम आनंदमयी हो, मन का वह श्रृंगार करो। प्रेयसी से ये नैनमटक्का, क्षणिक स्वर्ग है ... Read more

मुक्तक

खुदा के रूप का सम्मान कम होने नहीं देना, बुढ़ापे में इन्हें तुम कोई गम होने नहीं देना। यकीं मानों तुम्हें मिल जाएंगी, खुशियां जहां ... Read more

मेरा प्रेम अटल है

तन मेरा हरिद्वार सरीखा, दिल में गंगाजल है, होंठों पर अमृतधारा सा, निश्छल प्रेम अटल है। सुंदरवन की परियां भी, ना मुझे लुभा सकती हैं... Read more

मुक्तक

जो सरे बज़्म है, मैं उसको छुपाऊं कैसे, एक चेहरे पे कई चेहरे लगाऊँ कैसे। मैं आम आदमी हूँ, मैं कोई सियासींदा नहीं, तेरी मर्ज़ी के ... Read more

आँखें

हर रिश्ते का भाव, तोल देती हैं आँखें, क्या है मन में बात, बोल देती हैं आँखें। होंठ-ज़ुबां का तालमेल, जो चाहे कह दे, सच व झूठ का र... Read more

बदलाव

सूरज को भी उगते, ढलते देखा है, बंजर भू को फूलो, फलते देखा है। सदा एक सा कभी, किसी का रहा नहीं, हमने सबका वक़्त, बदलते देखा है।। ... Read more

सियासत

तन भी भगवा, मन भी भगवा, कण-कण भगवाधारी है, यूपी में यह रंग गेरुआ, हुआ आज सरकारी है। जाति-धर्म में बँटे हुए थे, अब रंगों में बाँट द... Read more

बेटी बचाओ

बेटी बचाने की मुहिम जो चलाई, उस अभियान को सार्थक भी बनाइए, नीति राजनीति की बदलिए हुज़ूर, त्राहि-त्राहि करे देश इस देश को बचाइए। र... Read more

सियासत

रंगों पर सियासत है, दिन मुश्किल के हैं, रंग बने पहचान कि हम किस दल के हैं। कल तक जिनको डरते देखा रंगों से, वे ही अब गिरगिट सा रंग... Read more

पर्यावरण

सोचो जब भी सूरज चाचा आग बबूला हो जाएंगे, तपिश भरी तब होगी धरती, जीव-जन्तु न बच पाएंगे। तब धरती को एक सहारा केवल वृक्षों का ही होगा... Read more

आसाराम

करे चिंता जहां भर की, वही भगवान बनता है, दया-आदर हो मन में तब, मनुज इंसान बनता है। रति के पति को जो पूजे, बसाए वासना मन में। तो ऐ... Read more

जीवन

कहीं प्रतिबंध है जीवन, कहीं अनुबंध है जीवन, कहीं पर राग है जीवन, कहीं पर द्वंद्व है जीवन। कहीं ठहराव सागर सा, कहीं उन्मुक्त अंबर स... Read more

वेलेंटाइन डे पर ख़ास...

जिनसे जीवन पाया आओ गीत उन्हीं के गाएं, उनको खुशियां देकर अपना जीवन धन्य बनाएं! इनसे बढ़कर नहीं है कोई पूंजी इस जीवन की, मात-पिता ... Read more

बजट

वाह रे, वित्त मंत्री! तुमने कैसा बजट बनाया, आम आदमी की कराह पर कतई तरस न खाया। थी उम्मीद मिलेगी अबकी आयकर में कुछ राहत, कमरतोड़ पह... Read more

मुक्तक

होंठो पर मुस्कान नहीं है, नम आँखें हैं, बस क्रन्दन है, ह्रदय द्रवित है हर मानव का, कराह रहा उर स्पंदन है। कई गुना बेहतर था वह कल, ... Read more

मुक्तक

गीता में जीवन जीने की, यही रीत मिलती है, मन न करो उदास, हार के बाद जीत मिलती है। प्रेम में मीरा को मोहन, शवरी को राम मिलते हैं, म... Read more

मुक्तक

मदमस्त गज की तरह देखो झूम रहे है, डाकू, लुटेरे आज खुले घूम रहे है! नेताजी बने जब से भाग्य ही बदल गया, कानून के रक्षक भी कदम चूम ... Read more

मुक्तक

दृढ़ निश्चय कर लो फिर कोई कदम रोक न पाता है, चट्टानें ढह जाती हैं पर्वत भी शीश झुकाता है! शिलालेख वे ही लिख पाते हैं जिनमें कुछ सा... Read more

मुक्तक

संगत का असर आता तो हालात बदलते, विषधर ना विष उगलते, वे चंदन सा महकते। फूलों के साथी चुभते नहीं पाँव में कभी, ये शूल भी फूलों की क... Read more

कविता

मन की बातें बहुत हुईं इक काम करो अब मोदी जी, छप्पन इंची सीने का सम्मान करो अब मोदी जी। भारत का हर एक नौजवां केवल इतना चाह रहा, दे... Read more

मुक्तक

अमरीका से हुई दोस्ती, और अहं में फूल गए, शेरों जैसी चाल बची ना, सत्तामद में झूल गए। भारत का हर एक नौजवां यही कह रहा मोदी जी, छप्प... Read more

मुक्तक

‪छप्पन इंची छाती वाले ख़ून के आँसू रोए होते,‬ ‪अब तक बदला ले लेते, ना सत्तामद में खोए होते।‬ ‪होता ये एहसास तुम्हें भी, दर्द मौत क... Read more

मुक्तक

मिले जो जख्म अपनों से, नहीं आसान था सीना, जहां में है बड़ा मुश्किल, लहू के घूंट को पीना। कभी गिरकर उठे, उठकर गिरे, गिरकर उठे फिर ... Read more

कविता

सत्ताधीशों आप सभी का, इतना सोना ठीक नहीं, ज़्यादा दिन तक गांधीवादी, सोच को ढोना ठीक नहीं। खुली छूट सेना को दे दो, आर-पार हो जाने द... Read more

व्यंग्य

दाएँ को बायाँ ही बताया करते हैं। दर्पण भी सच कहाँ दिखाया करते हैं।। -विपिन शर्मा Read more

अपना तो यही मिज़ाज है___

ग़लत बात बर्दाश्त नहीं है, ग़लत नहीं सुनकर दूँगा। जिस भाषा में बोलोगे, उस भाषा में उत्तर दूँगा।। -विपिन शर्मा Read more

मुक्तक

वफ़ा को वेवफा, और वेवफा को वावफ़ा लिक्खें, सुलगती दोपहरी को भी, ये सावन की घटा लिक्खें। बदलते वक्त से मजबूर हैं, नारद के वंशज भी, य... Read more

मुक्तक

दिल में हो गर दर्द भरा, तो होंठ भला मुस्काएं कैसे, कोहराम चहुंओर मचा हो, तो मल्हार सुनाएं कैसे। हरियाली तब ही आएगी, भू औ वातावरण स... Read more

‪टूटने का महज मंजर दिखाई देता है

‪टूटने का महज मंजर दिखाई देता है!‬ ‪नहीं महफूज अब ये घर दिखाई देता है!!‬ ‪मैं कब तलक तुम्हें सीने से लगाऊंगा भला,‬ ‪तुम्हारे हा... Read more