Raju Kale

Mandleshwar

Joined August 2017

मैं एक कृषक, शिक्षक एवं एक अदना सा कलमकार हूँ |
” मेरी कविता गीत है, छंद है,
और आपके अंतर का द्वन्द है,
रस मत खोजना, पीड़ा मिलेगी,
आपके मन की ही क्रीडा मिलेगी ||”

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एक निवेदन

माँ नर्मदा का जल, मल इसमें ना मिलाओ मानव, दानव जैसा कृत्य, माँ को क्रुद्ध कर सकता है | पावन है नीर, पीर इसकी ना समझी तो, जीवन की ... Read more

आपात काल के नाम

था अंधियारे का काल, जिसका अब तक है मलाल, कहते जिसको "मिसा", उसका नाम आपात-काल था | शासन को था गर्व, कहा अनुशासन पर्व, काल था विव... Read more

सरस्वती वन्दना

माता शारदे तार दे इस जीवन को, शीतल हो ताप संताप सारे हर ले | वाणी की तू देवी, वाग्देवी माता पावकी कि हँस की सवारी वीणा पुस्तक स... Read more