Kavi Kuldeep Prakash Sharma

Gola Gokaran Nath-Lakhimpur(Kheri)

Joined February 2018

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धन्यवाद!
कवि कुलदीप प्रकाश शर्मा”दीपक”
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खाता हूं बाजार का डब्बा(मेरी प्यारी माँ)

खाता हूं बाजार का डब्बा, तो दिल से फरियाद आती है। माँ के हाथ की बनी रोटियां, आज भी बहुत याद आती है।। रचयिता-कवि कुलदीप प्रकाश... Read more

भोजपुरी गीत-खेले राधा संग कन्हाई, रे होली भैया

खेले राधा संग कन्हाई; रे होली भैया। मुबारक हो सबही के; होली दिन भैया।। होली घर-घर; खुशियाँ लावेला। इक-दूजन के; प्यार सिखावेला।।... Read more

कवि बनने का राज

मैं इक सीधा साधा बच्चा था। पढ़ने में बहुत न अच्छा था।। तो इक दिन मिली मुझे माया। संगेमरमर थी उसकी काया।। देख उसे पेड़ में एक न... Read more

लड़कियों से कभी भी; आंखे न मिलाना(आधुनिक प्रेम)

लड़कियों से कभी भी;आँखे न मिलाना। ये चाहती है हर दिन;इक नया दीवाना।। प्यार करो कितना भी;ये अपनी होती नहीं। इनका दिल है पत्थर क... Read more

अर्थी-सच्चे प्रेमी की

जिस दिन उठेगी तेरी डोली,किसी और के घर; उस दिन इस मजनू की अर्थी उठेगी; फूल तुझ पर भी लोग बरसाएंगे; फूल मुझ पर भी लोग बरसाएंगे;... Read more

क्या हो गयी खता हमसे,कहने लगी जो गैर

क्या हो गयी खता हमसे,कहने लगी जो गैर। माना तुझे सदा अपना,हम जिये न तेरे बगैर।। बात न होती जब तुमसे तो;है दिल ये कहीं लगता नहीं।... Read more

इश्क़ में गम का तराना

बात ही कुछ ऐसी है,गम का तराना गाने लगा हूँ। देखा जबसे तुमको मैंनें,तबसे प्यार करने लगा हूँ।। ऑंखें चार होती है जब,मन में खटक सी... Read more

नववर्ष-नवजीवन

करता हूँ स्वागत,नव वर्ष तुम्हारा। हरो इस जगत का,तुम अंधियारा।। सबके मन में,जगे नयी आशा। बोले सभी जन,प्रेम की भाषा।। घर-घर म... Read more

नववर्ष-जिंदगी का एक वर्ष कम

एक वर्ष जिंदगी का,दोस्तों कम हो गया है। पुरानी यादों पे फिर से,मरहम हो गया है।। कुछ तमन्नाएं थी दिल में,दिल में ही रह गयी। तो... Read more

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम पर कविता

चला गया वो आधुनिक;भगवान हमारा। धरती सूनी हुई है;जग सूना हुआ हमारा।। चले गए भगवान वो;तो जहाँ सारा रोया है। देखो यारो मेरे देश ... Read more

महात्मा गाँधी जयंती पर कविता

अहिंसा के पुजारी गाँधी को; नमन हमारा है। ये देश है बलिदानों का;जो प्राणों से प्यारा है।। देखा था बापू जी ने ;जो देश खातिर सपना।... Read more

स्वामी विवेकानंद जयंती पर कविता

आओ युवाओं फिर से,आज हम लेखनी चलाते है। शत-शत नमन करें उनको,विकेकानंद जो कहलाते है।। माता भुवनेश्वरी और पिता विश्वनाथ घर,था जन्म ... Read more

महिला सशक्तिकरण दिवस पर कविता

महिलाओं तुम आगे आओ,है जरूरत तुमको सशक्त बनने की। आ गयी है बारी अब,इस समाज की संकीर्ण सोच बदलने की।। महिलाओं स्वयं तुमको ही खुद आ... Read more

पिता की पुत्र से इच्छा

बेटा!कच्ची उम्र में कच्चे अकल है। तुम्हारे पिता का इसमें दखल है।। मंजिल है लंबी यदि लक्ष्य पाना, मेहनत करो वरना मेरा कतल है।। ... Read more

बदलते दिन-माँ-बाप पर कविता

सब देवो में सबसे पहले पूजे जाते है,श्री गणेश भगवान। की मात-पितु परिक्रमा ब्रह्माण्ड सम,कहा मात-पितु महान।। याद कर अपने बचपन को,... Read more

मेरे पापा

मेरे खातिर किसी से,मेरे पापा डरते नहीं। मेरी फिक्र के सिवा,वो कुछ सोचते नहीं।। आज तक मैंने न देखा,उनके जैसा कोई धनवान; जेब खाल... Read more

जिंदगी से पश्चाताप

आज मैं अपनी जिंदगी का सबसे प्यारा गीत अर्ज करता हूँ, सभी का जीवन बहुत महत्वपूर्ण(स्वर्णिम) है, इस गीत में अर्ज किया है कि व्यक्ति आत... Read more

कोई जी रहा है सनम,तुम्हे देखकर

कोई जी रहा है सनम,तुम्हे देखकर। मुझे याद रखना तुम, हर डगर पर।। साथ न छोड़ना,कभी तुम मेरा। रहे नाम हर वक्त,जुबां पर तेरा।। जी... Read more

बेवफा प्रेमिका की रंगीन होली

कि चली गयी वो मुझको धोखा देके, अब मोहब्बत अधूरी,रह गयी है हमारी। वो किसी और के रंगों में भीग रही है, और यहाँ दर्द में भीगी,जिंदगी... Read more