हिंदी के सबसे छोटे बेटे , कवि बृजमोहन स्वामी’बैरागी’ की साहित्य झोंपड़ी में आपका स्वागत है।
“ज्ञान से ज्यादा कल्पनाशक्ति जरूरी है।”

हिंदी/राजस्थानी/उर्दू कहानी और कविता
के साथ साथ नाट्य और पटकथा लेखन में विशेष रुचि।

Copy link to share

जुत्ते बाहर उतारें : लाचारी / बृजमोहन स्वामी 'बैरागी' की घातक कविता

एक लाचारी है, जो ब्याह की तरह हंसती है आगे और लिखा जा सकता है यह बात कहीं नही छापी गई है इसलिए जिन्दा है अभी बिल्कुल गुलाब ... Read more

लोग : जो मार दिए गए...

हम सब मर जायेंगे एक दिन, केवल कुछ गुलमोहर ही बचेंगे, न दिखने वाली सुंदरता के लिए। आप उस रात आराम से नही सो सकते, जब कोई अधनं... Read more

लाल लिपस्टिक की भूख : मानवता की मौत

आलू खाकर मर सकता है एक आदमी/और बिना जहर पीये मर सकती है एक औरत। और बच्चों की मौत का मैं कोई तरीका नही बता पाता हूँ। (यह आसान है... Read more

ऐश्वर्या राय का कमरा...!

चला जाता हूँ/ उस सड़क पर जहां लिखा होता है- "आगे जाना मना है।" मुझे खुद के अंदर घुटन होती है मैं समझता हूँ लूई पास्चर को... Read more