Kuldeep Kaur

Joined November 2018

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मांँ मैं तेरी परछाई हूंँ !

तेरे आंँचल में पली मांँ मैं तेरी परछाई हूंँ, कैसी रीत है दुनिया की सब कहते हैं पराई हूंँ। तुझको पाकर मुझको मेरा सुंँदर घर संँसार... Read more

मैं तेरी फ़ौजन

कौन कहता है मुझसे दूर गए हो तुम, करती हूंँ महसूस सांँसों में रम गए हो तुम। पहले ये दिल ही था बसेरा तेरा और अब, हर हिन्दुस्तानी ... Read more

शहादत साहिबजादों की।

सिरसा नदी के किनारे, गुरुद्वारा बीछोड़ा साहिब जी; यही वह स्थान जहां बिछड़ा, परिवार मेरे साहिब का जी। जब हुए होंगे सब जुदा, मा... Read more

वक़्त रेत सा...

वक़्त रेत सा... यूँ हाथों से फिसलता चला गया; बंद मुट्ठी में भी कहाँ रोके वो रुक पाया l वो मुलाकतों से पैहले की जो मुलाकतें थ... Read more

मां... रब का स्वरूप निरा

माँ..सुना है मैंने,तुम्हारी आँखें हुई थीं नम, जब देखा था तुमने, मुझको पहली बार l सब कहते हैं..एक प्यारी-सी, अद्वितीय मुस्कान थी, ... Read more