Kanchan Gupta

Joined December 2016

Copy link to share

नादान परिंदेे ( नारी प्रेरणात्मक कविता )

नादान परिंदे , उड़ जाओ जाल बिछाये जो बैठे है उनका दाना मत खाओ क्या जानो तुम इनकी भाषा दरिदे बन कर आयें है जाल मेे जो तुम फँस ... Read more