I am kamni gupta from jammu . writing is my hobby.
Sanjha sangreh….
Sahodri sopan-2
Deepshikha
Satyam prabhat
Mehkte lafz.

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कैक्टस !

कैक्टस! जानता हूँ तुम्हें बस फूलों की महक पसंद है, पर मैं तो ठहरा साधारण सा कैक्टस ! जिसमें न महक है और न ही कोई आकर्षण , तुम्... Read more

लगता है !

लगता है ! होली पे तुम सब भूल कर बड़ाओगे कदम आगे , लगता है सच ही तो है ,क्या रखा है छोटी -छोटी बातों को बड़ाने में बार-बार रुठन... Read more

ऐ ज़िन्दगी !

अजीब कशमकश से गुज़र रही है क्यूं। ऐ ज़िन्दगी आजकल संवर रही है क्यूं। बहुत पीछे रह गया है वो मोड़ अब ; वहां लाकर मुझे ठहर रही है... Read more

हाइकू !

१. प्रकृति आपदा हर पल है डरे मानव अब बचाए कौन ! २. असंतुलन प्रकृति का प्रकोप समझो अब ! ३. ये प्रदूषण हरियाली सिमट... Read more

ग़ज़ल(आजकल)

आजकल कुछ ऐसा दस्तूर हो गया है। पैसा ही सब का जी हुजूर हो गया है। रिश्तों में अब पहले जैसा नहीं अपनापन; शोहरत का ही बस सबको गुरू... Read more

लगता है !

लगता है दिल हाथ से जाता रहेगा। नगमें मुहोब्बत के गाता रहेगा। तुम रूठ जाओ कभी तो ऐ सनम; दिल यह तुम्हें यूं ही मनाता रहेगा। आत... Read more

सच यह भी झुठला नहीं सकता !

बात दिल की बता नहीं सकता। गीत भी गुनगुना नहीं सकता। तुम तो ठहरे भंवरे के जैसे ; गुलों के खिला नहीं सकता। बाद मुद्दत के मिले ... Read more

ग़ज़ल

सुख दुख का मिश्रण यह संसार है। मिलता मुशकिल से सच्चा प्यार है। कर दे कुर्बान खुद को जो वतन पर; ऐसा कोई ही होता दिलदार है। म... Read more

ग़ज़ल

कभी कभी खुद को यूं समझाना चाहिए। सोच समझ कर दिल कहीं लगाना चाहिए। कुछ लोग समझते हैं खुद को ही भग्वान; आइना उनको भी कभी दिखाना च... Read more

ग़ज़ल

हवाएं भी कहीं नदी का रुख बताती तो हैं। खामोशी से ही मगर पैगाम दे जाती तो हैं। तुम क्या समझोगे लहरों की इस बेचैनी को; रह रह कर स... Read more

बेटियां

हर जगह अपना नाम कमा रही हैं बेटियां। घर की ज़िम्मेदारी उठा रही हैं बेटियां। ब्याह के जब यह मायके को छोड़ जाती हैं; ससुराल में भ... Read more

भुजंगी छन्द

करें वायदा तो निभाएं वहीं भले साथ कोई चले या नहीं खुशी ही मिलेगी ज़रूरी कहां दुखों को मिटादे उसी का यहां।।। कामनी गुप्ता *** जम... Read more

सूखे पत्तों पर

सूखे पत्तों की अभी सरसराहट बाकि है। तुम्हारे आने की यूंही आहट बाकि है।।। कामनी गुप्ता *** Read more

तिरंगा

जीवन तो है आना जाना। अपने फर्ज कभी न भुलाना। अपने वतन पर मिटेंगे हम; कभी न कदम पीछे हटाना। जो जां काम न आए वतन पर; कैसे मां... Read more

सच्चा सुख

काज सभी ऐसे करें,जग का हो कल्याण रहे न कोई भी दुखी,बढ़े सभी का मान बढ़े सभी का मान,रहें सब ही हर्षाते जो करते शुभ कर्म,वही निज मं... Read more

श्याम

मन में बसी श्याम की मनमोहक काया। सजे अधर पे बंसी सुर मधुर सजाया। भूली सब काम-धाम मैं देखो सखियो; मोर-मुकुट संग ह्रदय क्यों हाय ... Read more

खामोश जब मैं हो जाऊंगा

खामोश जब मैं हो जाऊंगा। न फिर तुमको नज़र आऊंगा। अब तो कहते हो चले जाओ; यादें मगर ऐसी मैं दे जाऊंगा। बदल जाएगा वक्त और हालात;... Read more

प्रकृति

प्रकृति के प्रकोप से सहम गया इन्सां मंज़िल भी पुकारे पर राहें करती हैरां पग-पग आज़माइश है पर न हो परेशां कभी घने कोहरे कभी हिम के... Read more

वक्त के आगे जो झुकते नहीं हैं

वक्त के आगे जो झुकते नहीं हैं। गल्त रास्ते जो चुनते नहीं हैं। भले विरोध मिले कुछ अपनों का भी पर अच्छाई से पीछे हटते नहीं हैं। खु... Read more

कविता या कहानी नहीं

कैसे कह दूं मैं कोई कहानी। न मैं कोई कवि न मैं कोई ज्ञानी।। चंद लफ्ज़ों में कैसे कह दोगे उसकी ज़िन्दगी कहीं। इन्सान है वो कोई क... Read more

मेरा वतन

1-सरहद पर जब जब दुशमन ने वीरों को ललकारा है। बड़ते रहे कदम वीरों के लगाया भारत मां का जयकारा है। 2-अपने तिरंगे की खातिर अपनी जान... Read more

कह न पाए

१-वो बातें अकसर घायल करती रही! चाह कर भी न कह पाए जो हम कभी!! २-मिलकर भी रह जाती हैं कुछ तो हसरतें बाकि! तुम बार बार यूं हमें... Read more

हसरतें

हसरतें दिल में लिए न खामोश रहो तुम कह भी दो अधरों से न रहो खुद में गुम मौसम तो यूंही पल-पल बदलते रहेंगे मगर न फिर आएंगे बीते पल ब... Read more

हमारा देश

बात जब देश की हो तो हर देशवासी अपने देश को प्रगति की राह में जाते हुए आगे बड़ते हुए और समृद्ध देखना चाहता है। पर न चाहते हुए भी आज ज... Read more

खामोश अकसर जब भी मैं रहता हूँ

खामोश अकसर जब भी मैं रहता हूँ। तुम समझते हो मैं चुप ही रहता हूँ। हर बार शब्दों का शोर नहीं मुमकिन इसलिए कभी यूं आँखों से भी कहत... Read more

शेर

बाँट सकूं गम तुम्हारे बस इतनी सी तमन्ना है! खुशियों में गर शामिल न करो तो कोई गम नहीं है!!! रहते हैं संग-संग बहते हैं संग- संग,फ... Read more

जिस दिन सरहद पर जाऊंगा

बाल कविता बन सिपाही जिस दिन सरहद पर जाऊंगा! दुशमन को फिर उस रोज़ मज़ा चखाऊंगा! मां तुम रोना मत गर वापिस न आऊं मैं ! देश का अप... Read more

जो रोज़ बड़ों का अपने आशिष पाते हैं

जो रोज़ बड़ों का अपने आशिष पाते हैं। कांटे उनकी राहों से खुद हट जाते हैं । है मान हमें अपनी सभ्यता पर भी जैसे आओ गुण औेंरों के ... Read more

देश के वीरों को सलाम

है सलाम देश के वीरो तुम्हें शत शत नमन तुम्हीं से कायम आन खिला है यह चमन देश की हिफाज़त बस तुम्हारा ही काम न हो विश्व के भाल की शो... Read more

कौन किसी के लिए रोता है

कहीं चाहतों का असर बेशुमार होता है। पर सच में कौन किसी के लिए रोता है। बदल भी ले कोई राहें अपनी मर्ज़ी से मगर काटता वही इन्सान ... Read more

चेहरा मेरा आया होगा

मेरे जिक्र ने तुमको भी पल-भर के लिए चौंकाया होगा। घड़ी भर के लिए सही पर चेहरा मेरा याद आया होगा। किस्सा पुराना कह कर तुमने तो दा... Read more

कुछ गीला लिखा नहीं है

कागज़ पर कुछ गीला लिखा नहीं है। शायद कोई दर्द नया मिला नहीं है। स्याही भी बिखर जाती थी शब्दों की पर ज़ख्म कभी हमने वो सिला नहीं... Read more

जिसे चाहकर भी भुलाया न गया

दिल से जिसे चाहकर भी भुलाया न गया। आँखों में भी उन्हें फिर छुपाया न गया। महकते गुलो की थी महकती सी खुशबू उनसे भी ज़ख्म दिल का म... Read more

मैं सिपाही

सरहदों को सुरक्षित रखता रहा! खुद को यूंही समर्पित करता रहा!! भेद नहीं आया जाति पंथ का! सबको बस इन्सान समझता रहा!! संभल जाओ अब भी... Read more

सोचता हूँ

कभी कभी सोचता हूँ कुछ शब्दों से परे! हो कोई ऐसा भी जो बस खामोशी को समझे!! हम तो सितारों की तमन्ना में रहे तुम तो चांद ठहरे! आस... Read more

शेर

टूटने लगी हैं सभी जंजीरे अब यूं भी, परिंदों के पर काट कर भी क्या पाओगे।।। सितारों को नहीं शौक है खुद पे इतराने का, हौंसला देत... Read more

आधुनिक नारी( हास्य कविता )

आधुनिक नारी, यह तो है सब पे भारी। कोई न पाए पार,ऐसी इसमे होशियारी। जीवन इसका व्यस्त बहुत हो दिन चाहे रात मोबाईल पे चला ऊंगलियां... Read more

ज़िन्दगी

है खूबसूरत ज़िन्दगी, सब जानते यह बात फिर क्यों गँवाते हैं इसे, प्रभु से मिली सौगात जो जान लेता भेद यह, पा जाए फिर वो पार खुशियां ... Read more

मुक्तक

मन में छुपे हुए कुछ राज़ अभी गहरे हैं पँख पसारते परिंदों की उड़ानों पर पहरे हैं ना मालुम सी बंदिशें हैं शब्दों पर जाने क्यों अधरो... Read more

याद इक किस्सा पुराना आ गया

याद इक किस्सा पुराना आ गया। सामने बीता ज़माना आ गया। अब न कोई देख उनको पाएगा आँसुओं को मनाना आ गया। जीतने का था हुनर उसको पत... Read more

चाँद तुमको समझने लगे हैं।

वो तूफानों से यूूं दूर रहने लगे हैं। संभल के बहुत वो चलने लगे हैं। मिला जब से फरेब अपनो से है हर कदम पे रूक के चलने लगे हैं। ... Read more

ज़िन्दगी गुज़रती होगी

कहीं बंद किवाड़ों में भी आरज़ू सिसकती होगी। अपने अरमानों को पूरा करने को तरसती होगी। कुछ बेड़ियां यूं बेवजह ही कायम थी मगर रह र... Read more

इंतज़ार

आज भी इंतज़ार में वो आंगण तुम्हारा है, बचपन को तुम्हारे याद अब भी वो करता है, तुम व्यस्त हो खबर यह गांव की मिट्टी को भी है, जिसकी... Read more