मन के भावों को उन्हीं की तासीर के शब्दों के साथ कागज पर उतारना मुझे अच्छा लगता है….। मैं अपने लेखन के माध्यम से संबंधों के मानवीयकरण और प्रकृति पर लिखना पसंद करती हूं…। मुझे लगता है हमारे संबंध तभी गहरे हो सकते हैं जब वे मानवीय होते हैं, उनकी प्रकृति को समझने की आवश्यकता है…। मेरा लेखन मन के अहसासों की एक शब्दगाथा है…।

Copy link to share

कर्मपथ

जब भी हो कठिन डगर न आंको अपने को कमतर बस धैर्य को बांधे हुए कर्मपथ पर रहो अडिग माना बेशकीमती चीजों की होती है मुश्किल डगर लेकि... Read more

ये स्वच्छंद सी लड़कियां

स्वच्छंद चंचल सी लडकियां दहलीज के उस पार... न जाने कब ... सयानी बन जाती हैं जो आंखों में संजोती थीं हर रोज अपने नये सपने अब वो... Read more

ये रिमझिम फुहारें...

जब मैंने उनींदी आंखों से खोले घर के बंद दरवाजे प्रकृति बरसा रही थी नेह की अमृत वर्षा झरोखे से झांक रही थी बारिश की रिमझिम फुह... Read more

ये रिश्ते...

औपचारिकता की चकाचौंध में है एक अजीब सा आकर्षण जिसके वशीभूत होकर मैं भी सोचती रही क्यों हूं मैं ऐसी स्पष्ट और खरी सी। क्यों नह... Read more

नदी सी बहती मैं....

मैं वेग हूं जलधारा की, बहती चली सतह पर। पाप-पुण्य का भेद किये बिना, सब जल में समाहित करती चली। दिशा के प्रवाह में प्रवाहित, ... Read more

आखिर कब तक...

यात्रा के दौरान मिले खट्टे-मीठे अनुभव जहां सफर को आसान बनाते हैं वहीं कुछ स्मृतियां हमारे जेहन में रह जाती हैं। ऐसा ही कुछ यात्रा वृ... Read more

ये गणित और ये जिंदगी

जिंदगी भी गणित के फार्मूले जैसी ही है, समझ में आ जाए तो आसान है वरना इस उलझन से बाहर निकलना मुश्किल है। जब गणित विषय पढ़ा था तब इतना ... Read more

अनंत गहराई

तेरी मोहब्बत का, कुछ यूं हुआ असर, हम खुद से ज्यादा, तुझ पर यकीं करने लगे। कभी-कभी लगता है डर, तेरे प्यार की गहराई से, कहीं डूब... Read more

मन से गुजरती ट्रेन

ट्रेन मेरे लिए एक सफर तय करने का संसाधन मात्र नहीं थीं, इसकी रफ्तार के साथ मेरी जिंदगी की रफ्तार तय होती थी। उनींदी अवस्था में भी ट्... Read more

...नन्हीं परी

क्यों कोख में ही हो जाता भेदभाव उस अजन्मी बच्ची से जो कोख से प्रस्फुटित हो ..... अंकुरित होने को है व्याकुल इस गर्भ गृह से निक... Read more

परवाह

सौम्या गांव में पली बड़ी एक सरल स्वभाव की लड़की थी। उसने गांव में रहकर ही शिक्षा प्राप्त की थी, सौम्या बाहरी दुनिया से बेखबर थी। पढ़ने ... Read more

...तुम केंद्र हो जीवन वृत्त की

नारी तुम सिर्फ जीवन वृत्त नहीं इस वृत्त की केंद्र बिंदु हो चाहे इसके चारों ओर परिधि की हो लकीरें खीचीं केंद्र हो फिर भी तुम क्यो... Read more