kamal purohit

Joined January 2017

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मन और बच्चा

कह रहा है दिल में छुप के बैठा इक बच्चा कोई नौकरी से ही क्या ये मन सिर्फ है भरता कोई। अब पढ़ाई, खेल सब ही फोन पर होने लगे ... Read more

जरूरी है

हक़ीकत से सभी को रूबरू होना जरूरी है। अगर पाने की हो ख़्वाहिश तो कुछ खोना जरूरी है। कभी ये जिंदगी ही फाड़ देती तन के कपड़े भी। कि र... Read more

गाँव का बचपन

अभी अहसास फिर जागा कहाँ बचपन गया मेरा ? कहाँ छूटी है मासूमी ? कहीं क्या कुछ मिला मेरा ? किसी मासूम सी मुस्कान को देखा तो द... Read more

किताबें

किताबों से किताबों तक जुड़ा लेखक का नाता है। किताबें हाथ में हो तो हमें फिर कुछ न भाता है। किताबें पढ़ के हमने तो यही जाना हैं दुनिय... Read more

हिंदी

एक दिवस का ज्ञान मिलेगा,हिंदी को सम्मान मिला है। कल देखेंगे हिन्दोस्तां में,इंग्लिश को ही मान मिला है। कभी कभी इक सपना दिन में, आ ... Read more

सफ़र ज़िंदगी का

सफ़र जिंदगी का ख़तम हो रहा है। कि साँसों का चलना भी कम हो रहा है। खुशी है अधूरी बिना ग़म के यारा। रहो खुश की तुमको भी ग़म हो रहा है... Read more

मुसव्विर/चित्रकार

ओ मुसव्विर अक्स मेरी आँख में है प्यार का। देख कर उसको बना दे चित्र मेरे यार का। रंग थोड़ा साँवला है रुख़ दमकता धूप सा। लगता है जै... Read more

ग़ज़ल

आज बैठा हूँ पकाने रिश्तों की मीठी ग़ज़ल। रूह को तस्कीन देने वाली इक प्यारी ग़ज़ल। माँ की ममता और इसमें है पिता का प्यार भी। माँ पित... Read more