“कमल” तो सिर्फ शायरी का तालिब है!
उस्ताद तो आज भी मीर-औ-ग़ालिब है!

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बेटियाँ

माँ का साया है तो बेटी बाप का गुरूर है ! शान है ससुराल की तो मायके का नूर है !! आज के इस दौर में बेटा बेटी एक से, फ़र्क़ करते दोनों... Read more

ग़ज़ल

ये दिल जब आ गया तुझ पर कहीं अब जा नहीं सकता ! वो ऐसी कौनसी शै है जो तुझसे पा नहीं सकता !! कभी तुम बेवफा होंगे , कभी मैं बेवफा हू... Read more