अर्जुन सिहँ kaluram ji

MP district Bhopal Village jagmeri

Joined September 2018

🕊🕊🌷🌹अर्जुन सिंह kaluramji🌷🌹🌈🌼
बचपन से मेरी ख्वाहिश थी कि मेरे को उच्च कोटि का कवि बनु
विद्या गीत छंद दोहे मुक्तक काव्य गजल गीत सुंदर सुंदर कविताएं लिखना मेरा शौक है

Copy link to share

फौजी भाई के लिए कविता

काश मैं कवि होता, तो हिंदुस्तान पे,कविताऐ लुटा देता ! कभी मैं सोचता हूं ,अगर मैं फौजी होता , वतन के लिए जान लुटा देता ! क... Read more

उनसे बात करने को दिल करता है

उनसे बात करने को दिल करता है l बात करने को दिल करता है । आते हैं जब वह मेरे सामने बात कर नहीं पता हूं l ऐसा क्या है । उस मासू... Read more

मेरे मेहबूब मैंने तुझे कहा ना ढूंढा

मेरे मेहबूब मैंने तुझे कहा ना ढूंढा। मैंने तुझे ख्वाबों में देखा फिर मुझे मैंने तुझे हकीकत में ढूंढना चाहा । मैंने तुझे दिन के... Read more

मेरे आंगन की ज्योति बिटिया।

बिटिया तू आंगन की चिड़िया है। बिटिया तू दीपक की ज्योति है । बिटिया तू हर घर की लक्ष्मी है । बिटिया तू आंगन ... Read more

"माँँ" की ममता,

विषय "माँ" विद्या गीत >>मेरी "माँ" मेरा आदर्श है, "मा" ईश्वर द्वारा दिया गया इंसान को एक बहुत बड़ा वरदान है, जिसक... Read more

तुम्हें समर्पण

शीर्षक🖋🖋 तुम्हें समर्पित 🖋🖊लेखक कालूराम जी अहिरवार🎸🎻 >> तेरे नाम के बाद ही मेरी याद आती है । किसी और को हासिल ह... Read more

हंसते गाते मुस्कुराते जिंदगी एक सफर है चलते चलो

जिंदगी एक सफर है । कदम बढ़ाते चलो हंसते गाते मुस्कुराते बढ़ाते चलो, ऐ चलने वाले मुसाफिर सफर लंबा है । कदम बढ़ाते चलो राह में रुक... Read more

एक पिता का प्यार अपने पुत्र के लिए

नन्ही सी आंखें और मुड़ी हुई उंगलियां थी। यह बात तब है जब दुनिया मेरे लिए सोई हुई थी। नंगे से शरीर पर नया कपड़ा पहनता था मुझे हो... Read more

मेरी पहली यात्रा ट्रेन से भोपाल टू इंदौर

जिन्दगी एक सफ़र की तरह है । जिसकी आखिरी मंजिल मौत है। लेकिन कई लोग इस सफ़र को शानदार तरीके से जीते हैं । और कई लोग एक बोझ समझ कर ... Read more

इस दुनिया का सच

इस दुनिया में हर व्यक्ति परेशान है । अपने पास सब कुछ होने के बावजूद भी वह परेशान है। गरीब भी परेशान है ,और अमीर भी परेशान है। ... Read more

एक लेखक के अंतर्मन की आवाज

: जमाने में आए हो तो जीने का हुनर भी सीख लो दोस्तों क्योंकि दुश्मनों से कोई खतरा नहीं बस अपनो पे नजर रखना छोड़ तो सकता हूँ,मगर..छोड़... Read more

यम के द्वार की कुछ झलकियां

हास्य एवं श्रृंगार रस की कविताएं यम के द्वार की कुछ झलकियां एक समय की बात है। तीन औरतों का देहांत हो जाता है। यम के दूत उन्हे... Read more

मैं क्यों लिखता हूं

जब एक लेखक लिखता है । तो उसकी जुबान नहीं उसकी कलम बोलती है । लेखक जो आंख से देखता है। कानों से सुनता है। और जो अपने आसपास के... Read more

मैं क्यों लिखता हूं

बहुत सुनने के बाद ताजमहल देखा। 4 पंक्तियों का जन्म हुआ। आप तक पहुंचाता हूं। मिस्टर शाहजहां एक बार फिर इस दुनिया में आओ। अ... Read more

मैं क्यों लिखता हूं

बहुत 4 पंक्तियों का जन्म हुआ आप तक पहुंचाता हूं कि मिस्टर शाहजहां एक बार फिर इस दुनिया में आओ अरे इस बार आगरा में नहीं भोपाल में अपन... Read more