Jyoti rai

Singrauli

Joined May 2018

kavyitri

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गज़ल

हम इश्क में हो गये बरबाद इस शहर में हैं परिन्दे भी नहीं आजाद इस शहर में, हर तरफ बौने ही दिख रहें हैं हमको तो क्या नही कोई भी शम... Read more

गज़ल

जीवन सफ़र है सबर रख ले तू कहाँ है ज़रा-सी ख़बर रख ले तू कहीं तुझको बहका के भटका न दे अपनी नज़र पर नज़र रख ले तू चला ही जो ह... Read more

गज़ल

जरूरत हो तो मेरी लेखनी अंगार लिखती है नहीं तो ये मुहब्बत के मधुर अशआर लिखती है जो अपनी जान देकर भी हमें महफूज़ रखते हैं ये ... Read more

मुक्तक

सिर्फ खुशियों के सहारे ज़िंदगी कटती नहीं आसमां पर फूंकने से बदलियाँ छंटती नहीं झूठ के बल पर कोई चेहरा बगावत क्या करे आईने की सादग... Read more

मुक्तक

जरूरत हो तो मेरी लेखनी अंगार लिखती है, निर्भीकता से यह गद्दार को गद्दार लिखती है ये मेरी लेखनी ही है मैं जिसके साथ जीती हुँ, यही ... Read more

हिन्दी

हम सबकी हो भाषा हिंदी, सबकी हो अभिलाषा हिंदी, भारत की गौरव-गरिमा का, गान बने हिंदी भाषा, अंतरराष्ट्रीय मान और, सम्मान बने हिंदी ... Read more

मुक्तक

हम बदलते वक़्त की आवाज़ बनना चाहते हैं, हम नई तहज़ीब का अंदाज़ बनना चाहते हैं, माना हम नन्हें परिन्दे आपकी नज़रों में हैं जो नई प... Read more

मुक्तक

उम्र भर रहिये उगाते आप गमले में गु़रूर। हम बहुत खुश हैं जड़ों में और बीजों में हुज़ू़र। कुर्सियों की रोशनी में कुछ नज़र आता नहीं ... Read more

मुक्तक

रिश्तों का दर्पण टूट रहा है बीच बहस में, सबके सब बैठे है आंखे मीच बहस में, मन्दिर, मस्ज़िद, गिरजे, गुरूद्वारे बौने सबकी ऊँचाई शाम... Read more

मुक्तक

दर्द में भी सदा मुस्कराते रहे, प्यार भरकर दिये में जलाते रहे, दर्द की हिमशिलाएँ पिघलती नहीं, स्वयं को हम शिला सी बनाते रहे, Read more

गीत

Jyoti rai गीत Apr 28, 2019
मैं अंगारा तुम अगर तपन से प्यार करो तो आजाना मैं जैसी हूँ, मुझे वैसे ही स्वीकार करो तो आजाना, मन में आकाश भरा है पर है धरा न पा... Read more

मुक्तक

जीवन की इस कर्मभूमि में ठीक नहीं है बैठे रहना, बहुत ज़रूरी है जीवन में सबकी सुनना, अपनी कहना, सुख जो पाए हम मुस्काएं, दर्द सभी हंस... Read more

मुक्तक

धर्म नहीं इंसान को इंसान से है बाँटता । धर्म नहीं जुनून में कभी सिर किसी का काटता || जग में दु:ख का या दर्द का नाम कुछ होता नहीं ... Read more

हमारी हिन्दी

कवियों के हृदय का उदगार है हिन्दी, कबीर के दोहों का संसार है हिन्दी, मीरा के मन की पीर बनकर गूँजती घर-घर सूर के स्नेह का विस्त... Read more

गज़ल

रेंग रहे हैं विषधर इनसे बचकर रहना, आस्तीन के सर्प हैं इनसे बचकर रहना, भले लोग ही बसे यहाँ हैं इन भवनों में, रोज फेंकते हैं ये प... Read more

मुक्तक

शब्दों में कैसे उनके अब अंगार आ गए, अपने रहे ना अपने क्यों दरार आ गए मोल मिट्टी के बिके रिश्ते तब बाज़ार में, जब दोस्तों के वेश ... Read more

कविता

मन में कपट कटार है मुख पे झुठी मुस्कान गली-गली में घूम रहे भेडिए बन इंसान, नफ़रत सींची रात -दिन ,खेला खूनी खेल आग लगाकर डाल दी... Read more

कविता

क्या कहूं मै जाहिल तूने तो हर मर्यादा पार किया, कटु शब्दों के हथियार से नारी पर तूने वार किया, सच कहने की बारी आयी तो इतना घबराय... Read more

गीत

Jyoti rai गीत Apr 14, 2019
सिंधु चरण पखारे जिसके हर नयनों का तारा है , कनक - क्रीट गिरिराज वही तो भारत देश हमारा है ! जहाँ सुधा की धारा बनकर नदियाँ बहती... Read more

गीत

Jyoti rai गीत Apr 14, 2019
हिंदू ,मुस्लिम और इसाई ना मेरी पहचान हो, मेरे परिचय में शामिल यह मेरा हिंदुस्तान हो ! भारत माँ के अर्चन मे मेरे सुबहो शाम ... Read more

गीत

Jyoti rai गीत Apr 13, 2019
जिसके चरण पखारे सिंधु , हर नयनों का तारा है जिसका मुकुट हिमालय है वो भारत देश हमारा है, जहाँ सुधा की धारा लेकर नदियाँ बहती रहती... Read more

मुक्तक

जारी है मेरा सफर धीरे-धीरे, खोलूँगी ख़्वाबों के पर धीरे-धीरे, जहाँ पहुँचे हैं सब छ्लांगे लगाकर, पहुँचुंगी मै भी मगर धीरे-धीरे Read more

मुक्तक

कुदरत की बेहतर रचना से इन्कार नही करते, सत्य अगर कोई कहता है हम तकरार नही करते, प्रतिभा को सहयोग मिले ख्वाहिश है मेरी लेकिन कोई ... Read more

गज़ल

माँ हर पल बच्चों पर ही अपने ध्यान देती है लुटाके हर ख़ुशी अक्सर उन्हें पहचान देती है, दुखों का बोझ हैं ढ़ोती सदा हँसकर हमारी माँ... Read more

गज़ल

सच कहूँ माँ के ही ज़ैसी है वतन की धूल ये ज़ख्म पे बन जाती मरहम वतन की धूल ये, दूर जब परदेश में आकर बसा कुछ दिन याद में बस जाती ... Read more

मुक्तक

रौशनी को दीप हम मिलकर जलाएँगे, तीरगी के पाँव फिर खुद लड़खड़ाएँगे, अब तो काँटें ही काँटे सभी डाल पर हाँ मगर फूल बनकर के मुस्कुराए... Read more

गज़ल

डाल से बिछुड़े परिंदे आसमाँ मे खो गए इक हकी़क़त थे जो कल तक दास्ताँ मे खो गए जुस्तजू में जिसकी हम आए थे वो कुछ और था ये जहाँ कु... Read more

कविता

हम अँग्रेज़ी को तज देंगे आओ यह सकल्प उठाएँ हिन्द निवासी, हिन्दी वालो आओ हिन्दी को अपनाएँ Read more

गज़ल

मुहब्बत का हमे इज़हार करना ही नहीं आया, मेरी कश्ती को दरिया पार करना ही नहीं आया. जिसे जो चाहिए था तोड़ कर वो ले गया उनसे, दरख... Read more

गज़ल

यहाँ मुस्कुराना जरूरी बहुत है हक़ीक़त छुपाना जरूरी बहुत है, अगर ख़्वाब संजीदा होने लगें तो उन्हें गुदगुदाना जरूरी बहुत है, ज... Read more

मुक्तक

सियासी मोहरे में उलझी हर चाल को समझो, जरूरी है सियासत की बिछाई जाल को समझो, सभी ने रंगों पर भी धर्म का एक रंग चढाया है, रंगों के ... Read more

मुक्तक

उन्हें लगता है उनको इश्क़ के क़ाबिल समझते हैं, हम उनको राह जीवन की उन्हें मंजिल समझते हैं, हमे साहिल से जो मँझदार मे लेकर के आए है... Read more

मुक्तक

कोशिश की जरा हँसने की तो तुमने रुला डाला, ग़मों की आग मे फिर से मुझे तुमने जला डाला, सजाए मौत तुमने इस तरह से दे दिया हमको रही स... Read more

मुक्तक

मज़हब की चिंगारी से अंगार बनाने आए हैं, जाति, धर्मों का फिर से व्यापार बनाने आए हैं सत्ता की कश्ती इनकी मझदार में आकर उलझी गई तो... Read more

मुक्तक

गौर से सुन लो जुम्मे को इतवार बनाने आए हैं, जीवन के पतझड़ को ये गुलजार बनाने आए हैं, भूख गरीबी लाचारी खत्म करेंगे इन वादों से फिर... Read more

मुक्तक

कोशिश है उनसे मुलाकात की बौछारें है दिल में सवालात की, दर्द जनता के अब वो समझने चले , कद्र जिनको नहीं थी जज्बात की Read more

मुक्तक

जब इस बार हारेंगे तो जाने फिर कहाँ होंगे, ज़मीं की गोद में होंगे या फिर आसमाँ होंगे, छुपाओ लाख सच्चाई मगर अब छिप नही सकती, उठेंगी... Read more

गीत

गौरवमयी इतिहास जहां है वीरों के बलिदान की, वो धरती हिंदुस्तान की वो धरती हिंदुस्तान की, रीत वही है प्रीत वही है सब जानी पहचानी ह... Read more

गज़ल

दो-तिहाई विश्व की ललकार है हिंदी मेरी माँ की लोरी व पिता का प्यार है हिंदी । बाँधने को बाँध लेते लोग दरिया अन्य से पर भँवर क... Read more

मुक्तक

बदला बदला मौसम है शातिर बहुत हवायें हैं, अफ़वाहों की चादर में लिपटी सभी दिशाएँ हैं, बदल रही है पल पल अब तो दुनिया की पहचानें, सर्व... Read more

मुक्तक

भाषण में नेता तो अपना बहुत सगा सा लगता है, सत्ता में आते ही धोखा और दगा सा लगता है, रंग बदलता रूप बदलता आए दिन वह रोल बदलता इनकी ... Read more

मुक्तक

कोशिश सब बेकार दिख रही पप्पु की नादानी में, मान लो मेरा कहना फिर से भैंस गई अब पानी में, बातें तो ईमान धरम की करते हैं सब मंचों से... Read more

मुक्तक

तू ही है बोलता मुझमें तुझे ही सुन रही हूं मैं, कहीं मुझमें बसा है तू कही तुझमें बसी हूँ मैं, मेरे रब तू ही मेरा तेरे बिन है और क्य... Read more

गज़ल

भले नेताओं को मंदिर कहीं मस्जिद बनाना है मेरी बस एक कोशिश है मुझे भारत बचाना है, सियासी लोग इस चालाकियों में व्यस्त हैं भाई लग... Read more

मुक्तक

कुछ कर गुज़रने के लिए मौसम नहीं मन चाहिए, हर प्यास को जो दे बुझा वह एक सावन चाहिए, है सही, क्या है गलत जो भेद बतला दे हमें सत्य... Read more

गीत

भावनाएँ इन्सान की आज बर्फ़ बन गईं, ज़िन्दगी की हर खुशी बस दर्द बन गईं। मीठा जहर पिला रहा मानव को मानव आज, प्रतिशोध की आग में स... Read more

मुक्तक

सवाल गूँज के चुप हैं जवाब आए नहीं जो आने वाले थे वो इंक़लाब आए नहीं, वो एक नींद की जो शर्त थी अधूरी रही हमारी जागती आँखों में ख... Read more

मुक्तक

तुमको क्या बताएँ हम कैसे गम छुपाते हैं, ज़माने को दिखाने को हँसी ओठों पे लाते हैं, बडी खुदगर्ज़ है दुनिया यह तो जानते है हम गमो ... Read more

गीत

वृक्षारोपण करो सभी फल फूल से भरा बनाओ तुम धरा हमारी बोल रही है मुझको हरा बनाओ तुम , जिसनें दिया तुम्हें जन्म है,उसको न यूँ सता... Read more

मुक्तक

इक जहान के अंदर कई जहान लिए, ये जारी है सफर मेरा नई उडान लिए, मैं चल पड़ी हूँ सितारों की रौशनी लेकर ज़मीन पाँव तले सर पे आसमान लिए Read more