Jyoti rai

Singrauli

Joined May 2018

Social worker

Copy link to share

कविता

“आज कहती हूँ मेरा यह वंदन सुन लो, धैर्य धरकर जरा वक़्त की धड़कन सुन लो, तुमने कई बार है श्रृंगार लिखा गीतों में, तुमने कई बार बह... Read more

मुक्तक

"उठाया जब कलम हमने दबे जज़्बात लिख डाले, गुज़रते बेबसी मे जो वही हालात लिख डाले, बहुत हैं दूर खुशियों के ठिकानों मुफलिसी मे अब, त... Read more

शायरी

रोज़ मुमकिन नहीं तारे का टूटना मेरी मन्नत पे सूरज उगा दीजीए, दीजिए रुख़सती अपनी दहलीज़ से अपने लब से मुझे बस दुआ दीजीए Read more

मुक्तक

सूरज से माँग बैठी उजाले उधार के, अरमान नीचे दब गए कर्तव्य भार के, मुश्क़िल वहीं था मोड़ जहाँ मुड़ न पाए तुम पलटी थी कितनी बार मैं... Read more

मुक्तक

"याद मेरी , गुलशनों की , दास्ताँ बन जाएगी, कोई इक डाली ही, मेरा आशियाँ बन जाएगी, फ़ूल भी, सपने भी इसमें, आस भी, अहसास भी, मेरी खु... Read more

मुक्तक

हैं दास्ताँ निराळी, दुनिया की दास्ताँ में, यदि शँख में है जादू, तो रंग हैं अजाँ में नादान हैं वो यारों जो जानते नहीं हैं, अपने ... Read more

मुक्तक

"धरती को जगमगाओ ,रौशन करो गगन को, अपने लहू से सींचो ,इस प्यार के चमन को, उनको निकाल फेंको , नफरतों जो बो रहे हैं, सोने की चिड़िया... Read more

मुक्तक

यूं मुस्करा हम मिले इतने दिनों के बाद, आएं हैं दिन बहार के इतने दिनों के बाद , ... Read more

मुक्तक

"जब से ज़िंदगी ये ज़िंदगी होने लगी, दिये में इक नई सी रौशनी होने लगी, नई कुछ हसरतें दिल में बसेरा कर रही हैं, बहुत आबाद अब दिल की... Read more

मुक्तक

यूँ सड़क तक छोड़ने भी आपको आते हैं लोग, आपकी निंदा ही करते लौट कर जाते हैं लोग, हर मसीहा को यहाँ सूली पे लटका दिए, और फिर अपने कि... Read more

मुक्तक

"औरों को अपने शब्द से पहचान बेहतर चाहिए, कविताओं में उन्हें क़ब्रिस्तान बेहतर चाहिए, मेरी रचना है नही मोहताज़ वाह वाही कि, मुझको त... Read more

मुक्तक

तीर खंजर की न अब तलवार की बातें रहें, जिन्दगी में आइये बस प्यार की बातें रहें, तितलियों की बात हो या फिर गुलों की बात हो क्या जरू... Read more

मुक्तक

जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं दर्द में भी अधरों पर मधुर मुस्कान रखते हैं उसी की बात होती है, उसी को पूजती दुनिया जो भ... Read more

मुक्तक

दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान है हौसलों की हमारे ये पहचान है लाख कोशिश करो आके जाती नहीं याद इक बिन बुलाई सी मेहमान है Read more

मुक्तक

तुझे दिल याद करता है तो नग्‍़मे गुनगुनाती हूँ, जुदाई के पलों की मुश्किलों को यूं ही घटाती हूँ घटायें, धूप, बारिश, फूल, तितली, चां... Read more

गज़ल

औरों के यूँ दर्द जगाना, ठीक नहीं दीवारों से सर टकराना, ठीक नहीं हम आँखों की भाषा भी पढ़ लेते हैं हमको बच्चों सा फुसलाना, ठीक नह... Read more

मुक्तक

"भूला कर ग़म सभी आओ जरा - सा गुनगुनाते हैं, ख़ुशी में दूसरों की झूम कर हम गीत गाते हैं, कवायद मत करो यारों किसी को भी बदलने की सु... Read more

मुक्तक

" ज़मीं के चाँद को जब चाँद का दीदार होता है, इबादत में मुहब्बत का नया विस्तार होता है, तुम्हें ऐ चाँद हिन्दू देख लें तो चौथ हो जाए... Read more

मुक्तक

" अपनी लगाई आग के शोलों में जल जाते हैं लोग, अब तो अँधेरे में यूं हीं बस रोशनी पाते हैं लोग, काश इक पल अपनी मर्ज़ी से भी ज... Read more

गज़ल

"गुल भी नहीं रहे अब गुलशन नहीं रहा, दहलीज़ सूनी घर में ऑंगन नहीं रहा, रखता था बाँध कर हमें जो एक डोर से आपस में अब वो प्यार का ... Read more

होली आई है

"करें जब पाँव खुद नर्तन, तो समझो होली आई है, हिलोरें ले रहा हो मन, तो समझो होली आई है, इमारत इक पुरानी सी, रुके बरसों से पानी सी... Read more

मुक्तक

"इस समय मैं ज्योति को विस्तार देने में लगी हूँ, भावों को मैं गीत का आकार देने में लगी हूँ, यह समय अंधियार के अवसान का है, यह समझकर... Read more

मुक्तक

"तेरे होंठों पर रही जो, वो हँसी अच्छी लगी तुझसे जब नज़रें मिलीं थीं वो घड़ी अच्छी लगी तुमने जब हँसते हुए मुझसे कहा` तुम हो मेरे ` ... Read more

मुक्तक

हमेशा पास रहते हैं मगर पल-भर नहीं मिलते, बहुत चाहो जिन्हें दिल से वही अक्सर नही मिलते, हकीकत में उन्हें पहचान अवसर की नहीं होती ... Read more

मुक्तक

"जो रहे सबके लबों पर वो हँसी अब चाहिए, बँट सके सबके घरों में वो खुश़ी अब चाहिए, देखिए तो आज सारा देश ही बीमार है हो सके उपचार जिस... Read more

मुक्तक

" उँगलियों की ये छूअन मुझको बहकाने लगी सच कहें तो ये अदा मन को बहुत भाने लगी, प्यार का जब नाम लोगों ने लिया था एक दिन, तब तुम्हा... Read more

मुक्तक

"सच को समझाना है तो कहना पडता है, दुनिया की बातों को भी सहना पड़ता है, जब सारे के सारे ही बेपर्दा हों जाएं ऐसे में तो खु़द ही पर्... Read more

मुक्तक

" सफ़र में मुश्किलें आएं तो जुर्रत और बढ़ती है, रास्ता कोई जब रोके तो हिम्मत और बढ़ती है, अगर बिकने पे आ जाओ तो लग जाती भले कीमत ... Read more

मुक्तक

"खुशामद में महारत से, उसूलों की तिजारत से, ख़ुदा मेरी क़लम को दूर ही रखना सियासत से चलाना ज़ोर फूलों पर बहुत आसान है साहिब मैं डा... Read more

मुक्तक

"शब्द मेरे बोलते हैं बादलों की बात , घुंगूरुओं कि ना कोई पायलों की बात, तमाम खेत बन रहे निवाले शहरों के, किसान क्या कहे अब हलों क... Read more

मुक्तक

"जिंदगी से हम सभी काँटें निकाल देते हैं, अपने सारे दर्द को शब्दों में ढाल देते हैं हमारी नींदों में अक्सर जो डालती हैं ख़लल, ऐसी... Read more

मुक्तक

"ज़ात,मज़हब,रंग के भेद अब सारे हुए, आदमी था एक जिसके लाख बँटवारे हुए, लफ़्ज़, जिनका था हमारी ज़िंदगी से वास्ता आपके होंठों पर आकर... Read more

मुक्तक

जीना है तो जी लें पुष्प बनकर शूल चुभता है जिसको निरंतर, तोड़ती दुनियाँ जिसे फिर भी सदा रहता वो गले का हार बनकर Read more

मुक्तक

"हवा भी क़ैद कर में होती कहीं जाने नहीं देते, किसी के खेत पर बादल भी ये छाने नहीं देते, सूरज चांद पर भी जो हुक़ूमत चल गयी होती, स... Read more

मुक्तक

" सिपाही हूँ कलम की मैं तो मन की बात करती हूँ , नही हिन्दू और मुस्लिम की, वतन की बात करती हूँ, हमें मत वास्ता देना कभी मंदिर औ मस्... Read more

मुक्तक

सम्भल के तुम जरा चलना, कहीं पंगा न हो जाये कहीं रुसवा यहाँ मज़हब और ये गंगा न हो जाये चुनावी रोटियाँ सिकने लगी हैं, फ़िर से सूबे म... Read more

मुक्तक

अगर झूठ और लालच की हम भाषा पढ़ गए होते, अगर कलम बेच दी होती तो आगे बढ़ गए होते हुनर जो आ गया होता मुझे भी जी-हुजूरी का हम सफ़लता ... Read more

मुक्तक

सकूँ मिलता नहीं ये बेकरारी उम्र-भर की है, दवा कोई नहीं लगती बीमारी उम्र-भर की है, किसी से दिल लगाने का तज़ुर्बा ये हुआ मुझको नशा ... Read more

मुक्तक

"तुम्हारे साथ जो गुज़रे, ज़माने याद आते हैं मिलन के वो सभी मौसम सुहाने याद आते हैं बरसते थे कभी मुझपर तुम्हारे प्यार के बादल, मुझ... Read more

मुक्तक

दौलत से कभी रिश्तों को हम तोला नहीं करते, दुखाए दिल किसी का लफ्ज वो बोला नही करते, मेरी हसरत मेरी चाहत निगाहों में ही पढ़ लेना, ल... Read more

मुक्तक

"हमारे दर्द का दिल से बहुत रिश्ता पुराना है, बहुत ग़म सह लिये हमने, ज़रा अब मुस्कराना है, तुम्हारे और हमारे दरमियाँ इतना सा रिश्त... Read more

मुक्तक

"सभी बस जख्म देते हैं दवाएं कौन करता है, दिल से माँ के अलावा अब दुआयें कौन करता है, यहाँ इंसान की छोड़ो परिन्दे भी समझते हैं, मुह... Read more

गज़ल

"मै तेरी राह तकती हूँ , तुम्हें ये मन बुलाता है, चले आओ तुम्हें सूना मेरा आँगन बुलाता है, बरसती हैं मेरी आँखें, ये बारिश अब नहीं... Read more

गज़ल

" ज़िंदगी से दर्द पाने का भी अपना ही मज़ा है, चोट खाकर मुस्कराने का भी अपना ही मज़ा है, कौन कहता, है ज़रूरी जंग जीती जायें सब प... Read more

मुक्तक

"जताने की ज़रूरत क्या,नज़ारे बोल देते हैं, हाले दिल तो आँखों के इशारे बोल देते हैं, इस दहलीज़ पर आने से पहले ही तेरे साजन खुशी से ... Read more

मुक्तक

"अब कहाँ ईमान का कुछ दाम है, रिश्वतों का ही बोलबाला आम है, आस की मद्धम-सी लौ जलती है जो उससे ही तो रौशन हमारी शाम है " Read more

मुक्तक

" हर बातें चुभती हैं अब तो ख़ारों की तरह, अब दूरियां बढ गयी हैं किनारों की तरह, पढ़ चुका चाहे हज़ारों ही किताबें इंसां सुलूक आज भ... Read more

मुक्तक

ख़ुद से ख़ुद में ही उलझी है हमारी जिंदगी, दीखती आज़ाद लेकिन कैद-सी है ज़िन्दगी, कश्मकश के जाल में हर शख़्स है उलझा हुआ दायरों ही ... Read more

मुक्तक

" चमन में ख़ुद को ख़ारों से बचाना है बड़ा मुश्किल, बिना उलझे गुलों की बू को पाना है बड़ा मुश्किल, न छोड़ी चोर ने चोरी, न छोड़ा सां... Read more

मुक्तक

मौन थी मेरी कलम उसको रवानी दे गये, जाते-जाते मुस्करा कर इक निशानी दे गये, जिनके आने से बढ़ी थीं रौनकें चारों तरफ, देश के खातिर वो... Read more