Jyoti rai

Singrauli

Joined May 2018

kavyitri

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मुक्तक

डोर उम्मीदों की छूटी हर मेहनत बेकार हुई, मेरे जीवन की पीड़ा अब दोधारी तलवार हुई, मुद्दत से ख़ामोश थे लब सन्नाटा था ज़हन में पर ... Read more

मुक्तक

न देना दोस्ती में दाँव, रिश्ता टूट जाता है, यही देखा गया, अच्छे से अच्छा छूट जाता है, किसी का दिल हुआ या आइना रखना हिफाज़त से, कह... Read more

" बेटी "

Jyoti rai गीत Aug 15, 2019
घर आँगन में मुस्कानों से ही खुशियाँ भर लेतीं हैं, भाग्य नहीं सौ-भाग्य है माँ का बेटी जन्म जो देती है,.... 2 सुने परायी हूँ बचपन... Read more

तिरंगा

Jyoti rai गीत Aug 15, 2019
हमारी शान तिरंगा है, हमारी जान तिरंगा है, मेरे प्यारे भारत का अभिमान तिरंगा है..... हमारी............ हमारी........... रंग ... Read more

गीत

Jyoti rai गीत Aug 15, 2019
सौगंध लिया इक बेटे ने भारत की पावन माटी से , दहशतगर्दी खत्म करूँगा कश्मीर की घाटी से, हे भारत माँ तेरे आंचल में अब दाग नहीं ... Read more

मुक्तक

जहाँ देखो वहीं पर चल रहा रफ्तार का झगड़ा, यहाँ तो मुद्दतों से चल रहा प्रतिकार का झगड़ा, कोई बेबाक बोलता रहा सब कुछ बिना सोचे, कोई... Read more

मुक्तक

दिल के सभी सवालों के जवाब लिख दिए, पत्थर पे आज देखिये गुलाब लिख दिए, अश्कों में पिरोए हैं ज़ख्मों को हमने और पानी पे देखिए किताब ... Read more

मुक्तक

वेदना को शब्द के परिधान पहनाओ ज़िंदगी के दर्द को गीतों में सजाओ खोज ही लेंगे गगन ये नन्हे परिंदे इन परिंदों के ज़रा तुम पंख फ... Read more

गीत

Jyoti rai गीत Jul 22, 2019
बाँटो ना तुम टुकड़ों मैं तो सम्पूर्ण विरासत हूँ, मैं भारत हूँ........मैं भारत हूँ........ मैं भारत हूँ मैं ऋक् हूँ, मैं सामवेद ह... Read more

मुक्तक

ख़ुदा से डर नही है जब इबादत छोड़ दो अब तो, हटा लो तख़्त से नज़रें शरारत छोड़ दो अब तो, जनेउ औ तिलकधारी, कभी टोपी की नौटंकी धरम के ना... Read more

मुक्तक

छिपाये दिल में कोई दर्द का तूफ़ान लगते हैं, ये इनसां क्यूँ मुझे इक दर्द की मुस्कान लगते हैं, ये बिंदी, चूड़ियाँ, पायल, ये बिछुये, ... Read more

गज़ल

यूँ इज्जत ना अपनी मिटा दीजिए हर किसी पे न खुद को लूटा दीजिए, बाद माँ के झुको तो ख़ुदा के झुको सबके आगे न सर यूँ झुका दीजिये ... Read more

गज़ल

नफ़रत के सारे ठिकाने हटा दें मुहब्बत भरी एक दुनियाँ बना दें, अहम की दिवारें नहीं मीत अच्छी बनाई हमीं ने चलो अब गिरा दें, दिल... Read more

गीत

Jyoti rai गीत Jul 20, 2019
आँखे तरसें हरियाली को बगिया लहूलुहान हुई प्रेम के गीत सुनाऊँ कैसे धरती जब वीरान हुई, डसती हैं सूरज की किरनें चाँद जलाता है मन ... Read more

मुक्तक

ख़तरा है खूँखारों को चोरों को मक्कारों को, ख़तरा है दरबारों को शाहों के ग़मख़ारों को, हिन्दुस्तान को नहीं है खतरा जनता जान गई खत... Read more

गज़ल

हम भी जज़्बात में, तुम भी जज़्बात में बात बनती नही ऐसे हालात में, कैसे सहते हो मिलके बिछडने का ग़म उससे पूछेंगे अब के मुलाक़ा... Read more

मुक्तक

ख्वाबों को मेरे नए खरीदार मिले हैं, फूलों की तमन्ना थी मगर ख़ार मिले हैं, आदमी बिकते हैं जहाँ कौड़ियों के भाव दुनिया में कुछ ऐसे... Read more

गज़ल

शब्द अर्थों का आयात करते रहे, लोग क्या बात,क्या बात करते रहे, आँख को नींद को मात करते रहे, रात भर ज़ख़्म उत्पात करते रहे, आप... Read more

गज़ल

हाले दिल पर शब्द का सिंगार करके आ गई, आईने का मैं ज़रा आभार करके आ गई, हो गए हैं इक यक़ीनो-दिल के टुकड़े सैंकड़ों प्यार में कित... Read more

मुक्तक

हमारा मुक़द्दर हमारा रहेगा, रिश्तों का अस्तित्व पारा रहेगा, ज़माना ज़माना-ज़माना ज़माना किसी का हुआ कि तुम्हारा रहेगा Read more

आबादी से बर्बादी

Jyoti rai गीत Jul 19, 2019
दिल्ली जैसी हालात पूरे भारत की हो जायेगी, आबादी मुश्किल की जननी बात समझ कब आयेगी ये बात समझ कब आयेगी...2 भारत माँ के आंचल में ... Read more

बोल बम

Jyoti rai गीत Jul 19, 2019
बोल बम के नारे गूँजे बाबा के दरबारों में, भक्त चले शिव के दर्शन को कावँर लिए कतारों में, भक्त सभी श्रद्धा में डूबे भक्ति का त्योहा... Read more

मुक्तक

बेवजह के न मुद्दे उठाया करो, दुश्मनी तो सही से निभाया करो, कैंची - सी ज़माने की फितरत हुई, हर जगह यूँ न पर फड़फड़ाया करो, Read more

मुक्तक

कभी क़ाबा, कभी काशी, कभी मस्जिद -शिवाला है, साज़िश है दलालों की कोई सिक्का उछाला है, मज़दूरों की बस्ती मुझे बस लगती है बेहतर जह... Read more

गज़ल

कभी क़ाबा,कभी काशी, कभी मस्जिद -शिवाला है, ये साज़िश है दलालों कि तभी सिक्का उछाला है, जो मज़दूरों की बस्ती है वहीं दो-चार दिन र... Read more

मुक्तक

मशवरा मेरा है कि बेहद सम्हलकर देखना, आसमां के ताज पर अटका मेरा पर देखना, आके मेरे कान में बेबस हवा ये कह गई जल्द ही लौटूंगी मैं ब... Read more

मुक्तक

अश्क खारे लहू लाल सबका यहां, अजनबी है यहाँ सख्स कोई कहां, दर्द का दर्द से दर्द तक का सफ़र, इक किस्सा है सब एक जैसा जहां Read more

मुक्तक

अश्क खारे लहू लाल सबका यहां, अजनबी है यहाँ सख्स कोई कहां दर्द का दर्द से दर्द तक का सफ़र, इक किस्सा है सब एक जैसा जहां Read more

गज़ल

होती है घातक अक्सर अच्छाई क्यों? होने को है क़त्ल ये नौबत आई क्यों? एक समन्दर पूछ रहा तैराकों से आँसू में मुझसे ज़्यादा गहराई... Read more

गज़ल

अंधेरे क्यों हमें बाज़ार की रस्में सिखाते है उजालों की सही लेकिन दुकां हम भी लगाते हैं, उठा जाता नहीं हमसे पकड़ के हाथ दूजे का ... Read more

मुक्तक

यकीनन ज़ख्म हमको सब पुराने याद रहते हैं, बुरे वक्त और अपनों के ताने याद रहते हैं, कोई भी पल मुहब्बत का भले ही याद न रहता करिश्मा ... Read more

मुक्तक

तेरा सच इक घाव पुराना बोल उठा, जुगनू के होठों से ताना बोल उठा, तेरे आगे तुझको ज़ालिम कौन कहे तूने फेरी पीठ ज़माना बोल उठा॥ Read more

गज़ल

" तुम जीत से हमको प्यारे न होते, तो हम दोस्तो तुमसे हारे न होते, अदब ने ही बांधी है दुनिया को वरना समन्दर ही होते किनारे न होत... Read more

गज़ल

अपनों पर विश्वास बहुत है, लगता है सब खास बहुत है, अमर नहीं होना मुझको मिली है जितनी साँस बहुत है, मैं ही दूर खड़ी हूँ ख़ु... Read more

गज़ल

ये मकड़ी आईने पर रोज़ ही जाला बनाती है वो पगली दोपहर में रात को चिथड़े सुखाती है॥ हमारी दिल की फ़ि तरत काश क़ब्रों की तरह होती ... Read more

गज़ल

जुगनुओं से सदा जगमगाते रहो, दौरे गम में भी तुम मुस्कराते रहो, जब तलक आसमां में सितारें रहें तुम सदा रौशनी में नहाते रहो, इन ... Read more

मुक्तक

परिंदों को कभी अपने परों से डर नहीं लगता, मुझको भी बदलते मौसमों से डर नहीं लगता, मुझको चाहिये वो आँख अपने हर रफ़ीक़ों में.. जिन... Read more

गज़ल

तेरी आँखों को जो भाए नज़ारे हम बनाते हैं, अँधेरी रात में काग़ज़ पे तारे हम बनाते हैं, मुझे रंगों से अपने हैरतें तख़्लीक़ करनी ह... Read more

गज़ल

फूलों से सजी कल जैसी अब डाली नहीं होती, रहबर ही बने रहजन तो रखवाली नहीं होती , जीना है बहुत मुश्किल नहीं मरना भी आसां है सुना ... Read more

गज़ल

" इश्क मोहब्बत के किस्से लिख जाओ तुम, हम वीरों की कुर्बानी लिख जायेंगे, लिखना है दरबानी पर तो लिख लो तुम हम झाँसी वाली रानी प... Read more

गज़ल

बुढ़ापा, बचपना कोई जवानी से भी डरता है, कोई सूखे से डरता है कोई पानी से डरता है, वो भी दौर था पढ़ लेते थे नयनों की हर भाषा समय ब... Read more

गज़ल

"इबादत है, इजाज़त है, शिकायत है, नजाकत है, सनम आँखों में तेरे वास्ते अब भी मुहब्बत है, हवाओं में, फ़िज़ाओं में, बहारों में, नजारो... Read more

गज़ल

तुम न सोचो हम यहाँ पैसे कमाने आए हैं अब तलक जो भी कमाया है, लुटाने आए हैं, जो सदा तन्हाई में हम गुनगुनाते थे कभी आज महफ़िल में ... Read more

मुक्तक

कभी दीपक बिना तेल जलता नहीं, हाँ उजाले बिना काम चलता नहीं, भूख मिटती नहीं ख्वाब में ये कभी बात से तो कभी पेट भरता नहीं Read more

गीत

Jyoti rai गीत Jun 26, 2019
है चार दिन की मेरी जिंदगानी, दूंगी जहां को नयी इक कहानी, दिनकर सा होगा मेरा तेज़ जग में, सागर सा धीरज धरूँगी मैं खुद में, चंदा सी... Read more

देखो सावन आया है

Jyoti rai गीत Jun 26, 2019
अंबर ने अमृत घट से यह प्रेम का रस छलकाया है, रिमझिम-रिमझिम बूँदें लेकर देखो सावन आया है, खिली खिली है हरित वसन को, पहनी है धरती सा... Read more

गज़ल

हम इश्क में हो गये बरबाद इस शहर में हैं परिन्दे भी नहीं आजाद इस शहर में, हर तरफ बौने ही दिख रहें हैं हमको तो क्या नही कोई भी शम... Read more

गज़ल

जीवन सफ़र है सबर रख ले तू कहाँ है ज़रा-सी ख़बर रख ले तू कहीं तुझको बहका के भटका न दे अपनी नज़र पर नज़र रख ले तू चला ही जो ह... Read more

गज़ल

जरूरत हो तो मेरी लेखनी अंगार लिखती है नहीं तो ये मुहब्बत के मधुर अशआर लिखती है जो अपनी जान देकर भी हमें महफूज़ रखते हैं ये ... Read more

मुक्तक

सिर्फ खुशियों के सहारे ज़िंदगी कटती नहीं आसमां पर फूंकने से बदलियाँ छंटती नहीं झूठ के बल पर कोई चेहरा बगावत क्या करे आईने की सादग... Read more