मैं काव्य का सृजन उतने ही मन से करती हूँ जितना एक ऋषि अपनी साधना!! पर मेरी साधना का मोल ईश्वर नहीं,, आपकी टिप्पणी तय करती है……

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ज़िन्दगी

तरह-तरह के रंग बदलती है ज़िन्दगी कभी तितली तो कभी गिरगिट लगती है ज़िन्दगी! Read more

किस ओर ज़िन्दगी है!

आँसुओं के बाढ़ में खुशियाँ फ़ना हुयी हैं! जब-जब हँसी हूँ मैं खुद की नज़र लगी है! जाना कभी नही ये किस ओर ज़िन्दगी है! हम साथ चल दि... Read more

एक उडान बाकि है अभी!!

इस तरह हमनें न कोई रिश्ता बनाना चाहा ! जिस तरह तुमने हमसे निभाना चाहा ! आजा़द कर दिया मैंने परिन्दे को ! जब देखा फड़फड़ाते परों न... Read more