J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS)
“कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और तारे सभी को कविता में ही खोजना तब मन में असीम शांति का अनुभव होता हैं”

मेरा काव्य संग्रह ” मन की मधुर चेतना ” प्रकाशित हो चुका है, जो online अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है ।

Books:
मन की मधुर चेतना काव्य संग्रह

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चलो चले मेरे गाँव चले

चलो चले सब मेरे गाँव चले, तपती धरा पर नंगे पाँव जले, सड़क किनारे लगे दौड़ने, पेड़ो की छाया फिर ढूँढने, सिर पर ढूँढे हम सब पगड़ी,... Read more

हमने उनकी राह तकी

हमने उनकी राह तकी, फिर भी वो आ न सकी, हमने चाहत छुपा रखी, बनाकर उन्हें अपनी सखी, वो खुद न आये द्वार, हम लेकर बैठे हार, क... Read more

माँ का दरबार

शुभ दिवस यह आया हैं , संग खुशियां हजार लाया हैं । चलो चले माँ के दरबार में, लगाने भक्ति का अम्बार । जब करते मन से देवी दर्शन... Read more