शेख़ जाफ़र खान

साईंखेड़ा जिला-नरसिहपुर म.प्र.

Joined May 2018

शिक्षक
शासकीय माध्यमिक शाला मिढ़वानी
तहसील गाडरवारा
जिला नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

Awards:
आचार्य सम्मान मध्यप्रदेश शासन भोपाल

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मुक्तक

सच-झूठ का आईना तू रख कांटों के बीच कलम तू रख , अंधेरा चीर दस दिशाओं का सुबह की नींव का पत्थर तू रख। ----------------------------... Read more

घनाक्षरी छंद

वो बुतकशी में रोता, होंठों पे बेवसीहैं , खुशियों का शामियाना,दौर मुफलिसी हैं । दूर जाती हैं मंजिल ,राहें कठिन बड़ी है , तमाशा दिख... Read more

गीत

प्रेम जब ह्दय होता है , तो दिल गाफिल होता है। न दिखता कोई अपना , इश्क जब नाजिल होता है। लहरें होश खोती है , समंदर ज़ोश भरता है... Read more

हरिगीतिका

पुलक परिन्दे नभ जाय ================ मीठी तान सुना दे मितवा , जे मन मगन हो जाय , मन के मैल मिटाए मानवां, मन उजयार हो जाय, मन ... Read more

गाँव से शहर

पूरब की धरा में पल्वित , पश्चिम का पनपा ये कन्द । गाँव से शहर तक पसरा , मान मर्यादा कर रहा मन्द । प्राचीन प्रथा बिसरा रहा , काग... Read more

नया उजयारा

जले दीप जल जाय हिन्द के दुश्मन दंश , नेह प्रीत का बंधन आँगन ओटा मिले । प्रेम जोत तेरी फैले भारत मन मंदिर , विषधर सीमा बैठे खो... Read more

माँ की दुआ [घनाक्षरी छंद ]

कृषक हरष जात खेत लहरातें देख , माँ हरष जात अपने पूत को निहार के । चातक हरष जात मिले जब स्वाति बूंद , माँ हरष जात निज पूत को जिव... Read more

कवित्य

[ प्रीत न करने थी ] जब से रिझाया दिल इश्क ने फसाया यार । ऐसी चाहत तुझे कभी नहीं भुलाने थी ।। कर दी कुर्बान जान मेरी ऐ जवान यार ... Read more

वाक्य से पोथी पढ़

शिशु की अंगुलि थामे , पिता शाला लाएं । हिय के बसत दुलारे , गुरु पग छाड़ि आएं ।। कर जोड़ कर कि नमन , तुम ही ज्ञान दाता। बनाना सुत ... Read more

प्रीत पगे पावन बंधन

उमड़ आएं कारे बदरा दामिनी चमक जात , बरसत धरा पे मेघा मानहुं अम्बर फट जात । व्याकुल विहग वृंद विभोर होत प्रणय गीत गात , आधीर अवनि ... Read more

जुद़ा किनारे हो गये

वेपर्द़ा नशी गलियों के पर्द़ा हो गये , मतलब की गरज़ से हमारे हो गये । जग यार बने यारी की दम दे गये , वक्त पर नदी के किनारे ... Read more

मुक्तक

[ संवेदना छल है ] निज हित पूरन करने के जतन , दंगा रचाकर बेच रहे कफ़न , शव सफ़र की संवेदना छल है, खुद की दुकान रोशन के यतन ।। ==... Read more

कविता

||सपने हो गये चकनाचूर || पहले म्हारै गाँव पधारे कहते जी हजूर । कर जोड़कर की वंदगी जिताना हमें जरूर ।। जीते जी सेवा करूँगा वादे सा... Read more

कविता

[आओ अब यशोदा के नन्द ] पूरब की धरा में पल्लवित , पश्चिम का पनपा ये कन्द । नगरों से गाँव तक पसरा , मान -मर्यादा कर रहा मन्द । ... Read more

इंसानियत दम तोड़ती

हक़ बोल कलम हलक में चुभती है अंधेरा चीरती एक किरण दिखती है, राज करती है अमीरी आज महलों में गरीबी पत्थर तोड़ती सड़क में दिखती ... Read more

कुण्डलियाँ

विचार सोचकर बोलिए , अति बोलन बकवास । मोल रहे नहि बोल की , बनि जाबे उपहास ।। बनि जाबे उपहास , नहि श्रोता के हिय भाय । कम बोल अधिक ... Read more

मुक्तक

चलता जा राही थम नहीं, गर मंजिल को पाना है । पथ की बधाएँँ रोकेगी, पग से उनको दलना है ।। काल से करले करजोरी, सिर नहीं झुकाना है । म... Read more

गीत

नागफनी बो रहे लोग =============== नई सुबह के नव सपने संजो रहे लोग , गुलाब की जगह नागफनी बो रहे लोग। पश्चिमी फिजाओ का छाया क्या ... Read more

खमोशी है जिसका गहना

खमोशी है जिसका गहना सदा शांत और सीधे चलना वसुधा का हम सबसे कहना वरबादी है नव कुछ करना । कहते कल्प सब फलों- फूलों ... Read more

गीत

प्रेम का एहसास --------------------- प्रेम एक एहसास है उमंगो के उत्सव का, अंबर को छूने का अवनि पर मिटने का, बर्फ... Read more

कविता

सूखी नदी ======= सूखी नदी के किनारों ने पूछा ? सखी ! तुम क्यों सूख रही हो । प्रश्न सुन व्याकुल हो गई , जी भर रोई ! नीर गिरे , ... Read more

[ कुण्डलिया]

लियत देत को दोष नहिं ,ये सब लोकाचार । अवनि-अंबर चहुँ दिश , बिखरा जहाँ आपार ।। बिखरा जहाँ आपार , सियार को स्वांग धरके । मांस नोच ह... Read more

[ कुण्डलिया]

नजर द्वार पर जा लगी , आए कंत की पतियां । विरहन के संग में जगी ,हिय हिलोरे बतियां ।। हिय हिलोरे बतियां , श्रंगार तन का सूना । पीला... Read more

साथ चलेगे

रंग उडे़ उमंगे रीती दुनियां की कैसी प्रीती, हम दोनो साथ चलेगे वह मौसम कब आयेगा । यूं तो जीवन बीत रहा धूप-छाँव शाम ए राते , बिन... Read more

कवित्य

[जल ही जीवन] जल महा अनमोल,भैया बेच रहे तोल ।जल बिन जग जीव की, जिंदगी कौन काम की ।। जल को मान करो , बिरथा न वरबाद करो । जल को तरसे... Read more

मुक्तक

[जल से जीवन ] जल सूनो वारि बिन दल बिन पेड़ सूनो , कानन सूनो पेड़ बिन, शशि बिन रात है । कूप सूनो जल बिन,नृप बिन राज सूनो, बाग सूनो ... Read more