बलकार सिंह हरियाणवी

गांव गोरखपुर जिला फतेहाबाद हरियाणा

Joined October 2016

तमन्ना है मेरी कि मैं हर इक दिल तक पहुँच जाऊं,
गमो को दूर कर खुशियों की सुख धारा बहा पाऊं,
हर तरफ खुशनसीबी हो जिधर देखें मेरी आँखे..
हर एक चेहरे पे भीनी सी मै एक मुस्कान दे पाऊं।

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"माँ"

नन्हे से बच्चे की वो जाँ होती है, आखिर माँ तो ईक माँ होती है। भूख,प्यास, संकट के समय, कड़ी धूप में, वो छाँ होती है। आखिर माँ तो ... Read more

आदमी...?

आदमी क्यूं आदमी से दूर हो गया, क्यूं पैसे का ईतना गरूर हो गया ईक ईशारे पे घरवाले नाचते थे जिसके, आज वो अकेला बेठने पे मजबूर ह... Read more

बाबुल के आगंन की चिडियां

बाबुल के आंगन की चिडियां ईक दिन तो तुझे उड़ जाना हे, जिसके संग में खाई खैली छोड़ उसी को जाना हे , महक रही उपवन की डाली घर आं... Read more

कभी अलविदा ना कहना

आप सब की नजर मेरी नई कविता... "कभी अलविदा ना कहना" मां की ममता,पिता के प्यार को बहन के स्नेह,भैया के दुलार को गुरू के आदर,अतिथि... Read more

बाबुल की बिटिया

बाबुल के आंगन की चिडि़यां ईक दिन तो तुझे उड़ जाना हे, जिसके संग में खाई खैली छोड़ उसी को जाना हे , महक रही उपवन की डाली घर आ... Read more

किसान की दशा

उठ सवेरे मुंह अंधेरे पकङे दो बैलोँ कि डोर,वो जाता खेतोँ कीओर खुन के आंसू सोखता किसान,वो खेत जोतता किसान! भूख ओर पयास मेँ,जिने की आस... Read more