अनिल कुमार मिश्र

हज़ारीबाग़,झारखण्ड

Joined January 2017

अनिल कुमार मिश्र
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
काव्य संकलन’अब दिल्ली में डर लगता है'(अमेज़न,फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध)
लगभग 20 वर्षों से शिक्षण एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन
सम्प्रति प्राचार्य,सी बी एस ई स्कूल

संपर्क-
itsanil76@gmail.com
फेसबुक पेज-Anil Mishra
पर्सनल ब्लॉग-Anil Kumar Mishra

Books:
“अब दिल्ली में डर लगता है”(काव्य संकलन)
“रिश्तों की अस्थियाँ”(काव्य संकलन)
“काव्य संगम”(साझा काव्य संकलन)
“वर्त्तमान सृजन”(साझा काव्य संकलन)
“भारत के युवा कवि और कवयित्रियाँ”(साझा संकलन)
Awards:
अशोक अंचल स्मृति सम्मान
काव्य संगम सम्मान
श्रेष्ठ शब्द शिल्पी सम्मान
नेपाल भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य रत्न सम्मान
नेपाल भारत साहित्य सेतु सम्मान
साहित्यवीर सम्मान
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निरंतर मुक्त लेखन
500 से ज्यादा रचनाएँ विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित,

सर्वोपरि-आपके स्नेह का पात्र

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आस्तीन के साँप

ऐ आस्तीन के साँपों! बाहर आज तो आओ मैं पूजन की थाली लेकर व्याकुलता से ढूँढ रहा हूँ थाली है, सब पूजन सामग्री है आस्तीन भी नया सि... Read more

श्रमिक

पसीने से लथपथ एक श्रमिक का टूटता शरीर तलवे से आधा लटका मांस का लोथड़ा तपती सड़क पर हज़ारों किलोमीटर से गांव में ... Read more

कोरोना

कोरोना! तुम जाओ ना ***************** कोरोना!तुमने बहुत सताया अब तो घर को जाओ ना तेरी मम्मी ढूँढती तुझको दूध-भात तो खाओ ना। क... Read more

अपने

अपने ***** डरती है दुनिया शत्रुओं से ज्ञात और अज्ञात वे काफी शक्तिशाली होते हैं आखिर शत्रु जो हैं रिश्तों के अंतरतम विवेक... Read more

ऐ बाबू बताना

ऐ बाबू बताना *********** ना बरगद है कोई ना पीपल कहीं पर ये कैसा शहर है ऐ बाबू बताना। ना अमवा की डाली ना छोटे टिकोरे ना जामु... Read more

दोहे

दोहे *** कोरोना के दौर ने सब कुछ दिया मरोड़ टूट-टूट बिखरे सभी नही कहीं है ठौर। अपनों का परिचय दिया कोरोना गंभीर कौन भाई-भगिनी यह... Read more

आत्महत्या : एक विश्लेषण

आत्महत्या : आखिर क्यों ******************** 'आत्महत्या'एक ऐसा शब्द है जो निश्चित रूप से हमे विचलित कर अनेक अनुत्तरित प्रश्न हमार... Read more

हे मानव

भीड़ सड़क पर पशुओं की करती सिंहनाद प्रतिपल सुनते क्यों नहीं बात जगत की बचे नही क्या आज नयन-जल। आज भीड़ सड़कों पर अपनी अपनी मंज़िल अप... Read more

ऐ हरी कलम

ऐ हरी कलम मतवाली!धीरे धीरे चल तेरी झट-झट लचक-लचक पर,जाने कितनी जानें अटकी संभल संभलकर,सोच समझकर ऐ मतवाली धीरे चल। राज दुलारी,सबकी... Read more

श्रृंगार

मत निकालो मीन तुम और मत निकालो मेख ज़िंदगी कविता रही है क्यों लिखूँ मैं लेख भावना प्रतिपल जली है प्रेम को भी बाँटकर नेह में लिपटी ... Read more

अंगुलियाँ

तड़पती हैं एक पिता की सभी अंगुलियाँ एक छोटा,नन्हा बालक कब दौड़ता हुआ आए और झट से मुझे थाम ले तपस्या करती हैं दिन रात पिता की... Read more

जिंदगी

मत सुलझना ज़िंदगी उलझी रहो तुम तुम जो सुलझी लोग उलझन में उलझते जाएँगे प्रेम कृत्रिम सा बनाकर नेह पर भी सूद लेते जाएँगे ज़िंदगी ख... Read more

आशा

आशाओं की डोर हो गयी काफी पतली बस टूटन की प्यास बसी है,अँखियन में। तिलकुट मधुर हो और कंकड़ भी मिले ना उसमें दही शुद्ध हो,दूध पाक,सब... Read more

रिश्ते

सारे रिश्ते टूट गए हैं,हम भी तुमसे रूठ गए हैं तुम जो हमसे दूर हुए हो हम भी भ्रम से दूर हुए हैं सिले-सिलाए रिश्ते लेकर क्या चलना है... Read more

आवाज़ दिल की

छोटी सी है सचमुच मगर यह बात दिल की है संभल जाओ ऐ हठधर्मियों आवाज़ दिल की है भारत लेता सदा है काम,दिल से,दिमागों से बचे हो इसलिए तु... Read more

मर्यादा

अब कहाँ हैं बुद्ध गौतम तम ही तम सर्वत्र है अन्याय की बंशी सुनो यह यत्र है और तत्र है। नवजात की लाशें हैं बिखरी कूड़ों के ढेर म... Read more

माँ

"मदर्स डे"-सुनने में अच्छा लगता है,आधुनिकता प्रमाणित होती है इससे,हाँ हम सब अंधे दौड़ में हैं,मदर्स डे मनाकर माँ को सम्मान देना चाहते... Read more

साँस

जी तो करता है बस चला जाऊँ छोड़कर सब कुछ इसी क्षण पर तेरे कारण,सिर्फ तेरे कारण हर साँस एक और साँस लेने को कह जाती है। Read more

नेह

नेह *** मनुज!तेरे ह्रदय में नेह का दीपक नहीं जलता है क्यूँ अब? भाती नहीं है रागिनी अब कंठ की है वेदना उर में जग के जलन में नेह क... Read more

गिरगिट

इस रंगीन जगत से गिरगिट तुम बाहर आ जाओ आज रंग बदलना बंद करो अब धोती-कुरता धारो आज। रंग बदलना तेरा प्रतिपल मानव को बहकाता है व... Read more

ज़िंदगी

जब कभी यह ज़िन्दगी बेचैन सी होने लगे करुण रस में हास्य रस का बीज यह बोने लगे कल्पना के जगत् में भी बात सच कहने लगे मधुशाला में भी ... Read more

आवाज़

इन साँसों की छटपट बेचैनी को जगत् में कौन समझा है,बताओ ह्रदय की आवाज़ सुनने पास आओ। राह दिल की सत्य से होकर गुज़रती है भावनाएँ बीच म... Read more

बाजार

महानगर के व्यस्त,बेचैन,छटपटाते बाजार में ज़िंदगी अपनापन ढूँढ़ते-ढूँढ़ते प्रतिपल बिकती र... Read more

प्रेम

रेत सी बंज़र ज़मीं पर,प्रेम का पौधा कहो कैसे लगाऊँ ढूँढूँ कहाँ मैं उर्वरा,जो नेह को भाये सदा। संबंध के झन-झन झिंगोले ने मस्ति... Read more

ज़िंदगी

ज़िंदगी!तुम कब तक रहोगी बनकर पहेली इस ह्रदय में बोल भी दो बेचैन होती स्वांस में तुम प्रेम का रस घोल भी दो। आज उर के बंधनों नें झंक... Read more

माँ

माँ!तेरा स्नेह मिले प्रतिपल जीवन को आलोकित कर दो मानव सच्चा बन पाऊँ मैं नीड़-नेह में रस भर दो। कृत्रिमता की होड़ लगी है मैं तेर... Read more

मुक्तक

लोग अपने ही मिले हर राह पर बन सके मेरे नहीं अपने कभी सब दूसरे मिलते रहे हर मोड़ पर साँस भी चलती रही और ज़िन्दगी बढ़ती रही। ********... Read more

गीत

मत ह्रदय से गीत गाओ आज तुम रहने भी दो मौन मन की बात मत दिल में जगाओ रहने भी दो उषा का साथ भी पल भर निशा के साथ ही था रहने भी दो... Read more

बेटी

बेटी है आधार जगत का बेटी से है सार जगत का बेटी देवी,बेटी सीता बेटी बाइबल,कुरान और गीता। बेटी में संसार छिपा है जग का सारा सार... Read more

दीप मुझको बना दो ना

मुझको दीपक बना दो ना मैं तेरे अँधेरे कमरे में यूँ ही जलता रहूँ कुछ ना दिखे पर ताप से अपनें यूँ ही तपता रहूँ ज़िन्दगी के साँस क... Read more

हाथ धर दो

मौन मन में बात कुछ आती नहीं बस तुम मेरे हाथों में अपना हाथ धर दो। मौन बेला ना खलेगी ज़िन्दगी की प्रगति के शिखर पर कदम यूँ बढ़ते र... Read more