मैं “इंदु वर्मा” राजस्थान की निवासी हूं,कोई बहुत बड़ी लेखिका या कवयित्री नहीं हूं लेकिन हाँ लिखना अच्छा लगता है सामाजिक विषयों और परिस्थितियों पर मन और कलम का गठबंधन करके ☺
कोई किताब या पत्रिका भी नहीं छपी पर हां सोशल साइट पर बड़ी संख्या में कॉपी पेस्ट और उन पर सकारात्मक और भावनात्मक टिप्पणियों और दोस्तों के द्वारा उत्साहवर्धन से लगा “हां मैं भी लिख सकती हूं”? और लिखूंगी ☺

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"पहले जैसी दीवाली"

समय के साथ सब कुछ बदला और बदल गई दीवाली भी वो बचपन वाली दीवाली जो साल भर की आखरी उम्मीद होती थी हर ख्वाहिश को पूरा करने की,जो लेना ... Read more

"बेटियां"

वो फ़िक्र भी,वो फ़ख़्र भी सीधी सी बात में घुला तर्क सी, वो हकीकत भी,ख्वाब भी घर के खर्चे से बचा हुआ हिसाब सी, कभी नीम की निम्बोली ... Read more

"मैं क्यूँ पुरुष हूँ???"

#पीड़ापुरुषकी #painofmen मैं पुरुष हूँ और मैं भी प्रताड़ित होता हूँ मैं भी घुटता हूँ पिसता हूँ टूटता हूँ,बिखरता हूँ भीतर ही भी... Read more

बचपन वाली दुर्गाष्टमी 😊

#छोले_पूड़ी_सी_नमकीन_हलवे_सी_मीठी_यादें "तेरे पास कितने रुपये इकठ्ठे हुए" "19" हैं?????? :o "तो मेरे पास 18 कैसे हैं".... :/ ... Read more

"बहुत कुछ शहीद होता है" ?

हां बहुत कुछ शहीद होता है एक सैनिक के साथ उम्र भर साथ निभाने की तसल्लियाँ जो हर बार बीवी को देकर जाता था और कुछ दिलासायें जो ... Read more

"बचपने वाला बचपन" ?

दुबका पड़ा है घर का हर कोना छुपम छुपाई में कोई छुपता नहीं है सूनी पड़ी हैं मोहल्ले की गालियां पकड़म पकड़ाई में कोई पकड़ता नहीं है... Read more

"हे प्रिये" ?

तुम सीख लिखे से श्यामपट्ट मैं बिन शिक्षक सी शाला प्रिये तुम INCOM TEX की रेड सी हो मैं छिपा हुआ धन काला प्रिये ? तुम सदाबहार ... Read more

"माँ मुझे डर लगता है"?

मां मुझे डर लगता है . . . . बहुत डर लगता है . . . . सूरज की रौशनी आग सी लगती है . . . . पानी की बुँदे भी तेजाब सी लगती हैं . . . ... Read more

"प्रेमगीत" ?

दिल चाहता हैं मैं भी प्रेमगीत लिखूँ शब्दों से सजाकर अपना मनमीत लिखूँ बारिश की बूँदें,फूलों की खुशबू हवा की सनसनाहट,चाँद की आहट... Read more

"खुबसीरत" सी बेटियाँ" :)

कितना आसान है न.... गैरों की बेटियों का वजूद तय कर जाना … नज़रिए के तराजू को अपमान से भरकर… उसके तन और मन को एक साथ तोल जाना अप... Read more

" चलो इक दूजे से कुछ ऐसे मिल जायें" ☺

चलो इक दूजे से कुछ ऐसे मिल जायें। पानी में जैसे,कोई मिश्री घुल जाए एक मस्ज़िद में कहीं "आरती" सुन आयें कुछ दूर मंदिर में वहीँ "आयत... Read more

"शरीर ही तो झुलसा है"

शरीर ही तो झुलसा है... रूह में जान अब भी बाकी है.. हिम्मत से लड़ूंगी ज़िन्दगी की लड़ाई आत्मसम्मान मेरा अब भी बाकी है... मिटाई है ... Read more

"दिल में बसता बचपन का बस्ता" :)

एक लाइन वाली,चार लाइन वाली और डब्बे वाली, तीन तरह कॉपियां होती थी तब बैग में न.. न.. "बस्ते" में अख़बार के कवर से सजी हुई :) और वही... Read more

"एंटीने वाली कहानी"?

"अब साफ़ आया??? नहीं झर झर आ रहा है... थोड़ा सा और टेढ़ा कर हाँ हाँ अब ठीक है आजा अब नीचे...." हर घर की छत की "एंटीने वाली कहानी"... Read more

दीयों में जल रहा बचपन

"साहब साहब 10 के छः हैं ले लीजिये न एक दम पक्के हैं देखो तो सही ये देखो इस दीये पर रंगो से डिज़ाइन भी बना है... अच्छा ठीक है आपके ... Read more

"कोई कुछ तो बता दो बस इक बार":(

गाँव शहर या छत आँगन गली मोहल्ला और बाजार लूँ सांस कहाँ बेडर होके वो जगह दिखा दो बस इक बार कसे हुए या ढीले ढाले जीन्स स्कर्ट ... Read more

"खुदा को रुलाता बचपन"

भीख के कटोरे में मजूबूरी को भरकर... ट्रॅफिक सिग्नल पे ख्वाबों को बेच कर... ज़रूरत की प्यास बुझाता बचपन......... नन्हे से जिस्म ... Read more

"अगले जनम मोहे बिटिया न देना" ?

माँ बहुत दर्द सह कर, बहुत दर्द दे कर, तुझसे कुछ कह कर मैं जा रही हूँ। आज मेरी विदाई में जब सखियाँ मिलने आएंगी, सफ़ेद जोड़े में ... Read more