जागती है रात

सोता है दिन- जागती है रात, दिन का उजाला- अब बनता है पाप। कौन किसे रोके- कौन किसे टोके, दृष्टि पर सभी के - है मटमैली राख । कर... Read more

सन्तान

कविता जब हाथ बढ़े दो मुस्काते हर सुबह रुकी हर शाम रुकी। तुतलाते शब्दों में जैसे ये सारी कायनात रुकी। वो पल सपनों में बीत गए सुध... Read more

कहा

कहां चले गए वो लोग जो कि दिल के पास थे न जाने कब बगल गए जो हमारी आस थे। विश्वास की हमारे लो धज्जियां सी उड़ गईं चाहतें चुप हो ग... Read more

आम आदमी

आम आदमी एक गधा है, उसका मुंह बनंधा है। नियति का चाबुक, उसपे साधा है। कदम कदम पर- लहू लुहान परकटे, पंछी की तरह- भरने को उड़ान... Read more

तुम

सम्बन्ध या रिश्ते यदि, नामों में बंध पाते- तो कितने ही रिश्ते, क्यों अनाम रह जाते। बन्धु, मीत, साथी सब तुमको समझती हूँ, शब्दो... Read more

जिस तरह

जैसे रात के - सायों में घिरी, बिन पतवार- कोई कश्ती हो रवाँ। जिस तरह- चांदनी की, ओढ़ कर चूनर- हुई हो रात जवां । गल रहा हैदर्द ... Read more

भ्रम

मैं अपने आप को मुक्त समझने वाला गर्वीला प्राणी। किसी बन्धन को न स्वीकारने की जिसने थी ठानी। अपनी ही जेल का कैदी बन गया गर्व ... Read more

छोटी कविता

कसम ववश्वास की- जो साथ तेरा, हो सुलभ मुझको - हर दर्द का सहारा , भी पगडंडी बनेगा। शेष न रह जायेगी- शंका कोई हमको, हर श्वांस एक... Read more

मैं

एक छोटा सा बिंदु, फैलकर इतना बड़ा हो गया- की वह बन गया मैं, और मैं होगया उसका दास- उसने मुझे लील लिया। वह सब कूछ- और मैं कुछ ... Read more

कल्पना और यथार्थ

चांदनी के रथ पर- कल्पना की दुल्हन, उमंगों की चुनर ओढ़- चली छम छमा छ म । यथार्थ के राक्षस ने- रोक दिया रस्थ, मोड़ दिया जाना पहचान... Read more

छोटी कविता

कसम विश्वास की- जो साथ तेरा, हो सुलभ मुझको- हर दर्द का सहरा, भी पगडंडी बस्नेग। शेष न राह जाएगी- शंका कोई हमको, हर स्वांस एक ए... Read more

हाइकू

मादक रात फूले रजनीगन्धा हाथ मे हाथ। मन भावनी सुगन्धित पवन शांति दायिनी चाँद बिखेरे धरा पर चंद्रिका रूप निखरे। मीठा सं... Read more

हाइकू

आँखिन सोहे तीखो कजरा स्याम मनवा मोहे। कान्हा के मुख दीं दिठौना मैया आत्मा को सुख। नजर लगे बाहर न भेजूंगी घर मे रहे। ... Read more

शेर

बरछी चुभ के आप सहलाते हैं देखिए क्या दामने हवा से कभी आग बुझी है? नकोई शिकवा न परेशानी है क्या जानिए कैसी ये बदगुमानी है । मन ... Read more

कल्पना और यथार्थ

चांदनी के रथ पर कल्पना की दुल्हन, उमंगों की चुनर ओढ़- चली छ म छ मा छ म। यथार्थ के राक्षस ने- रोक दिया रथ, मोड़ दिया जाना पहचाना ... Read more

शेर

मौत जो मांगी तो न आई तमाम उम्र जीने की तमन्ना है तो आई गले लगने। ख़ुद आया तेरे दर पे तो तूने भिखारी समझा अब तू भी बुलायेगा तो ... Read more

शिखरिणी छ नंद

नाइ कोपलें झांक झांक सुनतीं फागुन गीत। गदरा गए पेड़ पत्तों से लदे गूंजे संगीत। फूली बगिया हंसती सुगन्ध है ये मतवारी। ... Read more

जीवन वधू

सँजोये स्वर्ण का सेंदुर पहनकर वासना मुदरी पिये दुर्बुद्धि की मदिरा उदात्त लाज जी चुनरी। बना मद को नयन काजल सजा हीरों से निज सेज... Read more

याद

घाटियों पे- घिर रहा, गहरा अंधेरा। मन मे उभरता, आ रहा है- नक्श तेरा। जैसे आंसुओं के, नन्हे नन्हे हंस- तैरते से आ रहे है, पल... Read more

निर्झर

ऊपर से नीचे गिरता हूँ। कौन रोताहै- कौन हंसता है, बिन देखे बिन रुके- सीधे चल पड़ता हूँ। अनंत कर्म पथ का- गूंजता स्वर हूँ, हाँ ... Read more

दस्तक

रात की ओस में, नहाई ये पीत आभा- सारे मन के कल्मष की, कलुष मिट गई है। हवाओं में मादक, संगीत से भरा है- भोर भीबसन्ती , होने लगी... Read more

सांध्य धूप

थक गई है धूप- की पेड़ों के काढ़े पे, सर टेके पसरी है। चेहरा पीला, आंखें नील गगन पर- कि चन्दा के रथ पर, चांदनी आ जाये- समेटे बा... Read more

यादें

घाटियों पर, घिर रहा- गहरा अंधेरा। मन मे उभरता, आ रहा है- नक्श तेरा। जैसे आनसों के, नन्हे नन्हे हंस- तैरते से आ रहे हैं, प... Read more

मुक्तक

पतझड़ लाया उदासी फागुन बसंत बाहर नई कोपलें। मुस्काई प्रकृति का हुआ सृगार। जीवन मे बसाया भरष्टाचार भगवान से करवाया व्यापार फ़ोट... Read more

मुक्तक

अपनी आजादी को माइक हमे बचाना है सर पर उड़ते इन गिद्धों को जड़ से मार गिराने है। व्यभिचार का खून करे सभी समस्या दूर करें भारत ... Read more

विनती

शिखरिणी चंद है दीना नाथ अर्ज सुनो मेरी चेरी हूँ तेरी। कष्टों की वर्षा ये मन घबराए परीक्षा मेरी। थकी है सांसे थका है तन मन स... Read more

जागे कौन जगाये कौन

छ नंद मुक्त कविता सब पूछते है एक दूसरे से हम कहां जा रहे है? क्या ज्ज्माना आ गया है व्यभिचार सब पे छ आ गया है। जैसे हम जमाने... Read more

चलो

आवो हम सब मिल चलें जमुना जी के टिड उत श्याम बंसी बजे राधा भर लावे नीर। राधा भर ल्यावे नीर कदम्ब की छांव है बैठी कान्ह ढ़ेर की ब... Read more

सन्तान

जब हाथ बढ़े दो मुस्काते हर सुबह रुकी हर शाम रुकी । तुतलाते शब्दों में जैसे ये सारी कायनात रुकी। वो पल सपनो से बीत गए सुधा कलश अब... Read more

दिल

दिल मे है आंधी कोई अंदर दबी हुई वरना यह इतना परेशान सा क्यों है। अब तो चाहतों का भी कुछ शोर नहीं है कुछ नया करने का भी जोर न... Read more

तुम

हमने तो कहा नही था। तुम खुद ही चले आये दिल और दिमाग पर कुछ इस तरह छाए। आदि से अंत तक सब कुछ बदल गया नैनो में हास मन को जैसे प... Read more

तीन शेर

मुझे देखो मैं बूत हूँ मन्दिर में आस्था का बतौर रस्म आवोगे तो खाली ही हाथ जावोगे। दूरी भी नहीं कोई और पासभी नहीं हैं हु... Read more

जज़्बा

लघु कथा हरखू हड़बड़ा के उठा।"ओह बड़ी देर हो गई।माँ ई दावा कहि की नहीं, मैं जानता था, ले दावा"मैं कहा लेती हूं बेटा तू क्यों परेशान हो... Read more

कविता तुम

तुम तुम क्या गए इस जिंदगी से जान ले गए खिलखिलातीसांसो की पहचान ले गए बोल छुटे सब यहीं स्वर तान ले गए झूमती खुशियों कामधुर गान ल... Read more

आंसू

आंसू कभी बड़े आघात भी -- हुम् झेल जाते है , कभी जरा सी बात पर-- भर आते हैं आंसू। क्या हुआ, बस इतना सा -- पूछ लेने पर , झर झर झ... Read more

कविता यादें

यादें घाटियों पर , घिर रहा गहरा अंधेरा। मन मे उभरता, आ रहा है -- नक्श तेरा। जैसे आंसुओं के , नन्हे नन्हे हंस -- तैरते से ... Read more

शेर

मौत जो मांगी तो न आई तमाम उम्र अब जीने की तमन्ना है तो आई गले लगने। देने को यह जिंदगी बची। है मेरे पास पर कोई नही मिलता इसका तल... Read more

विश्वास(छंद मुक्त कविता)

पहाड़ से गिरते झरने के जल सा, सर पटकता है चट्टानों पर मेरा विश्वास। इस जंगल मे जानवर ही जानवर हैं इंसान हो तो सुने मेरी चीख ... Read more

आत्म आलोचना

अपनी कमी देखना आसान नहीं है व्यवहार में इसका प्रचार नहीं है। पूर्वाग्रह नहीं हो हो दृष्टि ईमानदार हर रात समीक्षा करो करो क... Read more

दोहे,,,,,,,,,,,,,(साधना)

त्रितप, दान, और प्रार्थना मानव की है साधना आध्यात्मक उन्नति करे करे पूर्ण आराधना। मनसा वाचा, कर्मणा त्रितप करे जो को आत्म शु... Read more

मत पुकारो,,,,,,,,,गीत

मत पुकारो तुम मुझे मैं हूँ दीवाना तुम्हारा। झूठ को भी सच समझ दौड़ कर आ जाऊंगा तुम हो जलती शमा मैं हूँ परवाना तुम्हारा। मत पुकार... Read more

सम्बन्ध

ज्यों मकड़ी जाल बुने हम बुनते सम्बन्ध उलझ पुलझ उनमे फंसे स्वीकारे प्रतिबन्ध। आशा सुख की संसार मे मात्र निराशा है भौतिकता में आ... Read more

दोहजा रे काग जा उड़ जा

जा रे काग जा उड़ि जा मोरे पिया के देस तुम्हरी जोगन राह में बैठी खईयो यह संदेस। यदि करते हो सचमुच प्यार करो समय से तुम इजहार। मन... Read more

ब्रह्म स्तय जगत मिथ्या

माया शक्ति है ब्रह्म की पर उसको न चु पाये उसकी इच्छा आज्ञा से पल में यह संसार बनाये। जो है लेकिन मिट जाता है सत्य नही कहलाता है... Read more

दोहे

करूं तिहारी चाकरी नित्य रहूं मैं संग संसार ये सारा न दिखे ऐसा हो सत्संग। दया क्षमा नेकी करे कर के जाए भूल दूजे की नेकी न भूले... Read more

चल रे हंसा

चल रे हंसा उड़ि चले नहि रहना या देस इट कागामोती चुगे हिरनउड़ावे रेत। हिरण उड़ावे रेत बढ़ रहे अत्याचारी उजियारे पर मिट्टी डारे छा... Read more

आत्म आलोचना

अपनी कमी देखना आसान नही है । व्यवहार में इसका प्रचार नही है। पूर्वाग्रह नही हो हो दृष्टि ईमानदार। हर रात समीक्षा करो है इसक... Read more

दीवाली

दीप अवलि किजगमग ज्योति धरा पर जब मुस्कायेगी अमावस्या की अंधियारी स्वयम दूर हो जाएगी । दीप नेह के ऐसे बालो हृदय हृदय से मिल जाये... Read more