ila singh

Joined January 2017

अंतर में बहती नदी पन्नों पर बहना चाहती है …

……………इला सिंह
……….रायपुर

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कविता

शाम जब उतरती है ****************** शाम जब उतरती है आँगन में मन कहीं भागता है पीछे लौटते पक्षियों को देखकर आकाश में मन रिहा... Read more

कविता

माँ, तुमको मुक्त कर लूँ ********************** सूखे पत्ते -सी झर रही हो पल-पल बदल रही हो वक्त की बंद मुट्ठी से रेत-सी फिस... Read more

कविता

वो पुरानी घर-गली **************** सोचती हूँ तोड़ दूँ बंधन सभी और मुक्त हो उडूँ गगन की गली या लौट जाऊँ बन वही नन्ही चिरैया वो... Read more

कविता

मुद्दत बाद ********* पहचाने हुए रास्ते कितने बदल जाते हैं, मुद्दत बाद चलो तो फिर नए से लगते हैं । वक्त मिटा देता है सारे... Read more

कविता

वो मेरा गाँव ************ जो छोड़ आई थी अपनी ठाँव वो गली मुहल्ले ,अपना गाँव क्या अब भी वैसा ही होगा सुबह का सूरज शाम की छाँव । ... Read more

कविता

खाली घरोंदे ********** पंछी उड़ चुके हैं घरोंदे खाली पड़े हैं वीरान से घरों में बचे लोग कुछ पड़े हैं यादों में... Read more

बसंतोत्सव

???बसंतोत्सव??? "बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं" ?????? आया है बसंत फिर से आओ प्रिय कुछ प्रीत बुनें जीवन की आपाधापी छोड़ फ... Read more

मेकिंगचार्ज

*********** मेकिंगचार्ज *********** "टमाटर किस भाव? "बड़े-बड़े लाल-लाल टमाटर एक तरफ करते हुए बुजुर्गवार ने प्रश्न किया । "सात ... Read more

कहानी

*********** मेकिंगचार्ज *********** "टमाटर किस भाव? "बड़े-बड़े लाल-लाल टमाटर एक तरफ करते हुए बुजुर्गवार ने प्रश्न किया । "सात ... Read more

पट समय के खोलने दो

पट समय के खोलने दो ******************** दीप बनकर जलने दो रोशनियों को रंग लेने दो इंतहा हुई कैद की अब खुलकर अब ... Read more