Chandani modanwal

Varanasi

Joined July 2020

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"परिंदा"

"क्या सोचा कभी परिंदा बसेरा कैसे बनाता है, अपनी छोटी सी ज़िंदगी मे सुकून कहाँ से लाता है, इस *काश!* के समंदर से सोचो कभी निकलकर , ... Read more

**जय श्री राम**

""गूंज रहा है बस इक नाद , जय श्री राम! जय श्री राम! हुई है धरती पावन आज , जय श्री राम! जय श्री राम! थाल सजाओ शंख बजाओ, गंगा की बरस... Read more

"आहट"

"हमारी चाहतों की महफ़िल तब तक सजती रहेगी, जब तक उनके आने की आहट नहीं आती, शामिल करें वो हमें अपने ख़यालो में ,इस कदर जैसे समंदर में... Read more

"अनोखा रिश्ता"

*सावन की रिमझिम फ़ुहार, रक्षाबंधन का लाया त्यौहार। रेशम के धागे से बंधा , बहना का प्यार दुलार। थोड़ा प्रेम थोड़ी तकरार, अनोखा है भाई ... Read more

"मित्रता"

"मित्रता तो सच्चे रिश्तों का एहसास होता है, समर्पण का दीपक जला, स्नेह और विश्वास होता है, जाति ,धर्म ,रंग -रूप से परे, मित्रता का... Read more

"नारी"

हे नारी! हो दया तुम, करुणा तुम, हो मातृत्व का वरदान तुम। हो धात्री तुम, क्षमा का भंडार तुम। जन्म का आधार तुम, लक्ष्मी का अवतार तु... Read more

*माता - पिता परमात्मा*

"संसार सागर है अगर ,तो माता पिता भी नाव हैं, जिसने करी सेवा , उसका तो बेड़ा पार है, जिसने दुखाई आत्मा , वो डूबते मंझधार है, माता -... Read more

* राधे राधे *

मक्खन ज्यों दही में , पुतली ज्यों नयन में । मीन ज्यों नीर में , चंदा ज्यों गगन में। शीतलता ज्यों पवन में ,खूशबू ज्यों सुमन में । ... Read more