Hrishabh Thakur

Godda , Jharkhand

Joined December 2017

जो तुम हो वही मैं हूं

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वहम

बचपन में देखा करता था दिनभर कांव-कांव करते रहने वाले कमज़ोर कौवों को, अपनी राह पर सीधी उड़ रही चील की पांखें नोच-नोच कर परेशान क... Read more

कुछ भी नहीं है

मैंने पूछा क्या ग़लत है? ये भी सही है वो भी सही है। ढूंढ कर लगा मुझे कि कुछ भी ग़लत नहीं है मैंने पूछा क्या सही है? इसमें भी कमी... Read more

चलो ना मां

चलो ना मां! चलने से पहले एक बार मिल लेते हैं | मैं अब मुझ जैसा नहीं , तुम भी कहा तुम लगती हो , चलो ना !बदलने से पहले एक बार... Read more

कविता ही तो है वो

इस भाग दौड़ में इतने मशगूल हो गए हैं हम कि पता भी नहीं चलता कब कब कहां कहां कैसे कैसे हमारी शिद्दतें समझौतों में घुलती रहती है... Read more

मायामुक्त

अधरों के रक्त से अपनी वह कंठ भिगोता है पानी के ना होने को तुम प्यास कहते हो आंखों की चिंगारी से उसका दीपक जलता है महज सूर्य के ... Read more

प्यार का वरदान

अनदेखी राह पर चल रहा हूं, संध्या के सूर्य सा ढ़ल रहा हूं, पीड़ा भरी है राह मेरी, तुम इसे विराम दो। प्यार का वरदान दो। ह्रदय ... Read more

तबाही

देखो ,एक बार और, तबाही मुझको गले लगाने आई है। नवंबर की बदतमीजी से दिसंबर की शर्माहट तक 2:30 बजे की घड़ी की टिक-टिक मुझे कहां भग... Read more

क्यों

बात-बात पर आंखों में आंसू आते क्यों हैं हैरान हूं ये लोग इतना अश्क बहाते क्यों है ं खुशबू की ओट में कांटों का मेला लगता है ये ल... Read more

मैं

गुस्ताख 'मैं' की ज़िद ही क्या? न मेरी सुने, ना खुद की; ना कुछ जाने, ना कुछ माने, पहचाने बस उसे जिसे अपना माने। इस छोटे स... Read more