Author Hemant Gautam

Rewa, Madhya Pradesh

Joined January 2018

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बघेली मुक्तक

हम आपनि सगली दौलति हुअई छोड़ि आयेन खइत त हयेन पई पिआसि हुअई छोड़ि आयेन देखित हयेन कब तक जिअब अबे अऊर 'व्यथित ' काहे से हम त आयेन ... Read more

दोस्त तो दो !

जो हो पैसे से गरीब, दिल का हो बड़ा अमीर, ए खुदा!, ए मेरे मौला ! कोई ऐसा दोस्त तो दो । भले इफरात जाजिब न हो, पर हो बेशक वह बे ... Read more

कुछ दिनों से

वो गुमे हुए लोगों को खोजता है, कहीं मिल नहीं रहे हैं, कुछ दिनों से। मिलेंगे कभी या ना मिलेंगे कभी, शायद मिल जाएंगे, कुछ दिनों स... Read more