Urdu and hindi poetry writer

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मसीहा

ज़ख्मो को कुरेद कर, हम बेचते हैं आसूं.. यूँ दर्द की तिज़ारत से, झोली को भर रहें हैं.. जो चंद ख़ैर ख्वाह थे, नोटों पे बिक गए हैं.. ... Read more

हर रोज़.

बेटियां सिर्फ कोख में नहीं मरती थोड़ा थोड़ा हर रोज़ मरती हैं जैसे मैं अपनापन ढूंढती या मां जो जन्म देके भी मां नहीं फिर भी अक्सर ढ... Read more

राष्ट्रपिता

ज़रूर गांधी नास्तिक रहे होंगे, या निर्गुण निराकार के उपासक.. क्योंकि मैंने पढ़ा है, भगवानो के किस्से.. युद्ध के, हिंसा के, और मार ... Read more

वजूद

अक्सर ढूंढती हूँ अपना वजूद, एक बेटी की तरह.. एक बहन की तरह, बड़ी हसरत से.. बड़ी बेचैनी से, और पाती हूँ बस ; खुद को तन्हा.. बेबस... Read more

ये उदास शामें..

रात से भी गहरी, ये उदास शामें.. जाने क्या कुछ समेटती हुई.. चुपचाप खामोश सहर सी, खुद के अंदर घुलती जैसे.. दो चार पल की शाम, जैसे... Read more

अधूरी मुहब्बत..

मोहब्बतों का अधूरा रह जाना , खतरनाक होता है .. क्योंकि एक अधूरी मुहब्बत की कशिश, जो बन जाती है एक खालिश.. और सालती रहती है भीतर... Read more

लौट रही हूँ...

लौट रही हूं, पुरानी रविश पर तन्हा... पर ये लौटना, न लौटने के बराबर है। क्योंकि एक बार का जाना, सब ले जाता है.. खुशियां, उमंगे... Read more

अभी बारिश पे लिखना है...

अभी बारिश पे लिखना है, अभी बादल पे लिखना हैं .. तुम्हारी आंख के भींगे, हसीं काजल पे लिखना है.. अभी तो गीत गाने हैं, मुहब्बत की... Read more

कंक्रीट का जंगल...

बड़ी बड़ी बिल्डिंगों से बना, ये कंक्रीट का जंगल... निगलता जा रहा है खेत, हरियाली, और पेड़ों को.. कसता जा रहा पंजा प्रदूषण , मानव क... Read more

कहानियां..

वो कहानियां जो बचपन मे सुनी थीं, रूपा खाला के चबूतरे पर बैठ; नानी से जिद करती, उनकी सारी शर्ते मान.. की टोकूँगी नही, उन शब्दों ... Read more

बेटियां

डाल दो जंजीरें पैरों में की , हिरनें अब कुचालें भर गयीं .. तो जाने कितने भेड़ियों की , आंखों में ये गड़ गयीं.. काटो परों को ,कैद क... Read more

विजय

जब निरंकुश लिप्साओं के पुजारी, मानव वेश में स्वघोषित, स्वचयनित, आसीन होते हैं, एक मर्यादित स्थान पर.. गूंज उठती हैं चीत्कारें... Read more

सौ बार तेरा शुक्रिया..

बाग़ियों की सर ज़मीन, सौ बार तेरा शुक्रिया.. सुर्खरू हैं हम की हमने, जन्म बलियाँ में लिया.. सौ बार तेरा शुक्रिया.. सौ बार तेरा शु... Read more

जागते हुए सोना

सोए रहो, की सोना अच्छा होता है। लम्बा सुकून,अच्छे ख्वाब, जो हक़ीक़त में नही मिलते, उन हसरतों के ख्वाब.. इन्होंने ही भर दिए हैं ,... Read more

चाँद

चाँद जैसे निर्जर वृक्ष का, एकलौता फल। जो ऊगा है सांझ की बेला में.. रात की शोभा बढ़ाने, की कम हो अंधेरा... ताकि न करना पड़े, जुग... Read more

ये राजनेता

एक वेश्या भी धंधा करती है, पर देह का.. क्योंकि पेट का सवाल उसे स्त्री से, वेश्या बनने को करता है मजबूर .. पर ये राजनेता, देह ... Read more

बच्चा गरीब का

अचानक से हुमकते, ज़िद करते नन्हे बच्चे, बड़े हो जाते हैं। जब बाप के पैरों के छाले, उनसे लाख छुपाने पर भी, नज़र आ जाते है। खुद के ... Read more

विधवा जनता..

जनता जैसे कोई जवान विधवा, सब्ज़बाग दिख कर सुहाने दिनों के.. राजनेता हर पांच साल के लिए, पटक देतें हैं लोकतंत्र के बिस्तर पर, और त... Read more

अरमानों की बरसी..

"बांध लेते हैं अक्सर, धड़कते दिलों के गीत.. अपनी सहर भरी , मीठी आवाज़ों में.. जिन में हल्की सी , थरथराहट के साथ.. मचलते हुए अरमा... Read more

जनपथ ..

जनपथ.. जिस पर चलते हुए, देश की जनता.. करती है तुम्हारा सम्मान, क्योंकि एक गौरवशाली.. मर्यादित स्थान, जिसपर राज कर गयीं.. न जा... Read more

अनाथ

सोच रही हूं, मरने से पहले .. अपनी कब्र , फूलों से सजा दूंगी.. और कुछ पैसे पेशगी में, माली को दे कर .. वसीयत कर जाऊंगी, की मेर... Read more

एक दिन ..

एक दिन जब तुम जागो, और मैं न मिलूं कहीं भी.. न मेरी कोई खबर , मत ढूंढना मुझे.. उजालों में दिन के, न दुनिया के किसी कोने में.. ... Read more

बुरा वक्त

बुरा वक्त जिसमे, छोड़ जाता है भगवान भी.. कोई मन्नत ,कोई दुआ ; काम नही आती.. ऐसे में हम उनसे, क्यों रूठे? जो हमारी खुशियों में , ... Read more

ये मजदूर

गर्मी की शिद्दत से नींद टूटी, लाइट चली गयी थी। अभी जाना था इसे भी; ऊपर से रोजा.. मन उखड़ा उखड़ा सा था कि, औरतों के हंसने की आवाज़े... Read more

उपभोग की वस्तु "औरत"

कला और साहित्य दोनों ने औरत को निखारने के नाम पर उसे नंगा किया, बजाए इसके की वो उनमे आत्मविश्वास भरता, उनके भीतर छिपी हुई कुशलता को ... Read more

अबोध मन..

अबोध मन.. आज फिर ज़िद पे अड़ा है, जाने कैसी? आज फिर से कैद, मन की अंधेरी कोठरी में, आंसू बहाना चाहता है... जाने कैसा बोझ मन म... Read more

तेरा ख़याल...

पतझड़ की एक शाम चिनारों के साए में चलते हुए तेरा ख़याल ... यक ब यक ही आ पहुंचा.. मुस्कुराते हुए मेरी आँखों में झाँकता.. मेरा हाथ ... Read more

मुल्क

हर शख़्स यहाँ रोता हुआ मिल जाएगा, दामन अपना भिगोता हुआ मिल जाएगा.. चंद नोटों के लिए हो गयी ज़िन्दगी बर्बाद, हर शख्श ये कहते हुए मिल... Read more

इबादत

अज्म की हौसलों की एक पैकर है तू , मेरी राहों की रहबर मुकद्दर है तू .. मेरी जन्नत तेरे पाक कदमों तले , मेरी आखिरत की ज़मानत है तू .... Read more

हथियार...

हथियार मिटाते हैं इंसानियत, लातें हैं भयावह तबाही .. असीम शांति की , गुंज उठती हैं चीखें .. दर्द भरी , कराहती आवाजें .. बिखर जा... Read more

प्रतीक

कण कण में ज़िसका वास फिर क्यूँ उसका एक निवास ये प्रतीक बस नाम मात्र है हर हृदय में करे जो निवास क्या वो कोई मलमल का लठ्ठ ... Read more

दौर

हर बड़े मुद्दे को एक नये मुद्दे से दबाया गया , जुल्म जब भी बढा और जुल्म ढ़ाया गया .. चीखें बेटियों की दबाने के लिए , तालिब ए इल्मों... Read more

हिजड़ा

हमारे समाज का एक हिस्सा जिसे समाज पता नहीं क्यूँ अपनाने में शर्माता है , तौहीन समझता है ,वो है किन्नर य़ा हिजड़ा जो जन्म तो इसी समा... Read more

मेहनतकश

हर शब् की तारीकी उम्मीद के सूरज बुझा देती है लौट आता हूँ सब्र के साथ रात की स्याही में अपने गम आंसुओ में ढाल बहा देता हूँ मजदूर... Read more

जनाज़ा ख्वाबों का ...

ज़िन्दगी के कांधों पर , लेकर जनाज़ा ख्वाबों का ... उजड़े बिखरे ,टूटे फूटे चल रहे थे ..जल रहे थे ... न अश्क थे, न दर्द था .. ... Read more

इंसाफ

बुझ रहीं हैं अब तो जल जल के मशालें भी यूँ आँधियों से कब तक लड़ते चराग होंगे कब तक रहेंगे फिरते इंसाफ की तलब में कब तक लूटेगी अस... Read more

असीफा !

किस किसपे रोऊं ? अब आँसू भी नहीं आते .. आती है तो बस हँसी , हर बात पे ; असीफा ! जो कुचली गई , झुलसी ,मसली गई .. और मरने के ... Read more

दर्द भी शर्मा जाए

है इतना दर्द की दर्द भी शर्मा जाए इब्ने आदम बता हम बेटियां कहाँ जाएं इल्जाम किरदार का मुझ पे जो तुम लगाते हो गोद से छीन के मसली... Read more

हे राम !

हे राम ! तुम्हारी सेना ने , कैसा अनर्थ कर डाला है ? जहाँ वास तुम्हारा होता है , वहाँ घोर पाप कर डाला है .. एक फूल सी बच्ची म... Read more

समाज

बिंदिया दीदी ने उसकी चूड़ियाँ तोड़ डाली, काकी ने उसका सिंदूर पोछा और बाकि बचे मांग के सिंदूर को धो डाला वो अवाक थी हत्प्रभ् जिसने कभ... Read more

"एक रूपाजीवा"

एक स्त्री बिकती है, या बेच दी जाती है जिस्मफ़रोशो की मंडी में; संसार के लिए , खो देती है स्त्रीत्व, न बहन, न बेटी, न बेटी, न माँ; ... Read more

अनाम की मौत

ज़िन्दगी उसे नचाती रही कठपुतली की तरह, और वो हर दिन उम्मीद तलाश करता जीने की...हर रात ख्वाब बुनता एक नये सुबह की खुद को तसल्ली देता..... Read more

चहकार

गर्मी के इस मौसम में, एक सूखे दरख्त की शाख पर. एक नन्ही सी चिड़िया बैठी; जाने क्या क्या कहती है.. कभी कूदती इस डाल पर; कभी उस द... Read more

पतंग

डोर से नथी पतंग डोलती रहती है उंगलियो के इशारो पर कन्नी ,मंझा ,ढील इनमे उलझी हवाओ के चक्कर काटती डोर से नथी पतंग .... इतराती... Read more