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माँ कविता नहीं, महाकाब्य है

माँ कविता नहीं, महाकाब्य है | प्रकृति-पुरुष को समझने के लिए - माँ शब्द ही प्रयाप्त है | जो ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र को झुलाए, अष्टा... Read more

विचारणीय

यहाँ साहित्य गौण है, कविता पीछे छूट गयी, निर्झर लेखिनी रूठ गयी, कवि भिक्षुक बन आगे बढ़ गया, साहित्य के नाम पर देदो बाबा ! साहित... Read more

ईश्वर की अनुपम सौगात है माँ

ईश्वर की अनुपम सौगात है माँ, सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है माँ | चाहो तो दिल चीर कर दिखा दूँ, हर स्पंदन में संव्याप्त ... Read more

सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में

तुम्ही हो, तुम्हीं हो, यह जीवन तुम्हारा, तुम्हीं इसका कारण, अकारण तुम्हीं हो, तुम्हीं हर ख़ुशी हो नयन के निलय में, सदा मुझको रखन... Read more

बिलख रहा साहित्य

साहित्यकारों, वोट-याचना, कायरता है मन की, बिलख रहा साहित्य, आत्मा सिसक रही रचना की | एक पंथ है स्वाभि... Read more

सत्य का संवाहक है साहित्यकार

साहित्य साधना है, याचना नहीं | साहित्य साधना है, उस अनाम तक पहुँचने की | कल्पना के पंख लगाकर - अंनत ब्रह्माण्ड में विचरने की |... Read more

जीवन के हर पृष्ठ पर है माँ

वोट की इस दौड़ में - कविता पीछे छूट गयी, छंद छूट गए, लयबद्धता टूट गई | साहित्य गौण हो गया, वोट की मार्केटिंग में - कवि... Read more

कैसे माँ पर लिख पाऊँ

मैं शब्द कहाँ से लाऊँ, कैसे माँ पर लिख पाऊँ | माँ प्रकृति की अद्भुत घटना, ईश्वर की सर्वश्रे... Read more