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यकीं नही होता

गली ये मोहबत की जान पतली है चलें जो साथ दोनों इश्क़ असली है दवा मिलती नही शक की यहाँ मेरे इसी खतिर दुकानें तुम ने बदली है ... Read more

होते हुए देखा

रोशन सुबह को अँधेरी शाम होते हुए देखा मोहबत मे कइयों को बदनाम होते हुए देखा इज्जत गयी तैल लेने कुछ काम ना आयी हमने तो भाइयो ... Read more

आवाज

सुन रहा ना कोई गरीब की आह बहरा पड़ा है ये अपना समाज जगाना है इस समाज को सुना दो सबको कलम की आवाज तानाशाही ना रही फिर भी ज... Read more

ऐ खुदा जाने

चंद खुशियो के बदले बेशुमार गम दिया है ऐ खुदा जाने केसा ये सनम दिया है एक आह को जाने कितना मरहम दिया है ऐ खुदा जाने क्यों अब ग... Read more

याद गार

आयोजन : याद गार यात्रा शायद उतने समझदार नही थे हम लगभग उम्र 14 वर्ष की थी होली का वक्त था हमको मुंम्बई से राजस्थान हमारे घर ... Read more

रोटी और ग़ज़ल

रोटी और ग़ज़ल है एक समान खाने और पढ़ने में लगे आसान रोटी में आटा पानी सही माप ग़ज़ल में शब्द भाव माप समान रोटी में आटे पानी... Read more

शिकायते

वादे ज़िन्दगी भर साथ रहने के,,,, वो तो पल दो पल ठहरे है!!! दिए उनके जख्म दीखते नही ,,,, पर जख्म वो गहरे है!!!! कैसे सुनाऊ हा... Read more