Jaikrishan Uniyal

Saklana Tehri Garhwal

Joined December 2017

सामाजिक कार्यकर्ता, एवं पूर्व ॻाम प्रधान
ग्राम पंचायत भरवाकाटल,सकलाना,जौनपुर,टिहरी गढ़वाल,उत्तराखंड।

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ये मास्क दिखावे के लिए है क्या?!

मास्क को मास्क रहने दो, इसे हार ना बनाओ! गर दूरियां ज्यादा नही अच्छी, किन्तु थोड़ी सी तो बनाओ, जो मिलाया हाथ को तुमने, तो धोने ... Read more

हम प्राइम टाइम देखने में लगे हैं!

सुशांत दुनिया से चले गए, रिया को हो गई जेल, अब कंगना की एंट्री हुई,देख सियासत का खेल! सुशांत एक बार नहीं मरा,बार बार मारा गया, और... Read more

पप्पू की बातें!!

जिसे वह पप्पू बता रहे थे, उसे उसके भी उसे,पप्पू ठहरा रहे थे, हम भी उसे पप्पू ही जता रहे थे! वो पप्पू हम सबको समझा रहा था, इनका... Read more

प्राथमिकता की विश्वसनीयता! प्रतिबद्धता एवं व्यवस्था का आत्मावलोकन!!!!

प्राथमिकता है हर किसी को मिले सुविधाएं, जीवन जीने से लेकर,खाने-पीने तक की, पढ़ने-लिखने, और कहने-सूनने की, सोचने-समझने, और चयन करन... Read more

कांग्रेस!! "भूत-बर्तमान-भविष्य"!!

सौ सालों से अधिक का इतिहास है जिसका, कांग्रेस नाम है उसका! एक फिरंगी ने जिसे जन्म दिया है, एक फिरंगन के हाथों में दम तोड रही है, ... Read more

भगवान भरोसे!

चलो भाई राम भरोसे, राम भरोसे,राम भरोसे, कभी सुना था ये गाना, इतने वर्षों बाद याद दिलाया, निर्मला सीतारमण ने यह तराना। अर्थ व... Read more

ये वादा तो न किया था !!

साल चौदह में आपने कहा था, अच्छे दिनों को लाने का वादा किया था, दो करोड़ नौकरियां हम देंगे, पंन्द्रह लाख को बैंक खाते में भेजेंगे,... Read more

प्रशांत तुम ऐसे तो न थे!!

प्रशांत तुम ऐसे तो न थे, फिर क्यों ऐसा कर रहे, तुम प्रशांत हो, हमने तुम्हें चेताया, तुम फिर भी शान्त हो, तुमसे क्षमा मांगने को ... Read more

एक मौत-और इतना शोर!

सुशांत-चिर-शान्त,प्रिय एवं परिजन आक्रान्त, जन-मानस दिग्भ्रमित, और मिडिया अशांत। हे सुशांत तुम क्यों मर गये, मिडिया वाले तड़प रह... Read more

समय की गति, और सामाजिक परिवेश!!

यह कैसा समय आया, अपना भी दिख रहा पराया, पहले मिलने पर हर्षित हो जाया करते थे, अब दिखते हैं तो, दूर से ही मुस्करा कर निकल जाते हैं... Read more

ये अब मुझे, मरने भी नहीं देती!!

बना-और बनी जब गये हम बन, मिल गया एक नव जीवन, अब तक मात -पिता एवं भाई भौजाई, यही तो थे अपने मन मस्तिष्क में समाए, कभी-कभार बहने औ... Read more

हे निरीह प्राणी तू चाहता क्या है?

हे निरीह प्राणी तू क्या चाहता है, क्या मैं अपना अधिकार छोड़ दूं, क्या मैं अपना विवेक खो दूं, और तेरी खिदमत में लग जाऊं, अपने अरम... Read more

रक्षा सूत्र से रक्षा बंधन तक, का पड़ाव!!

कहते हैं पहली बार, माता लक्ष्मी ने, राजा बलि को, रक्षा सूत्र बांध कर, इसका सूत्र पात किया था, चुंकि,श्री हरि विष्णु जी को, राज... Read more

स हा रा !!

जब जीवन में हताशा भर जाए, मन उच्चाट सा हो जाए, जीने की इच्छा मिट जाए। तब कांधे पर कोई हाथ धरे, और मुस्कान भरे लहजे में कहे, क... Read more

मोदी-जिनपिंग वार्ता!! एक काल्पनिक आधार!?

हाल के घटनाक्रम से, मोदी जी को आघात लगा, जब से चीन ने, सीमाओं पर अतिक्रमण किया, तब मोदी जी ने, जिनपिंग से कहा, भाई मेरे तू ये बत... Read more

इंच भर!!

इंच है एक पैमाना, चाहे कुछ भी हो नापना, किन्तु बन गया है यह, प्रतिष्ठा को आंकने का , एक अजीब सा नजराना। हम एक इंच भी अपनी, ज... Read more

.................. शोषण!!

शोषण एक मानसिक बिमारी है, शोषित होना लाचारी है, हम इसे सहजता से लेते हैं, हर रोज,हर बात पर शोषित होते रहते हैं, हमें अपनी सामर्थ... Read more

................................मंडियां!!

देखा है मैंने भी कभी, मंडियों को लगते हुए, बचपने में होके उत्सुक, जाते थे हम दौड़े हुए, आज गांव के तप्पड में, बैलों की मंडी ल... Read more

..................... करवट!!

करवट, ऐसा कौन है जो करवट नहीं बदलता, बदलना पड़ता है, जब एक ही स्थिति में, रहते हुए थक जाते हैं, तो मजबूरन करवट बदल जाते हैं। ... Read more

एनकाउंटर!!

फिर हो गया है एनकाउंटर, पर पहली बार नहीं हुआ है, अनेकों बार इस प्रक्रिया को अपनाया गया... Read more

अब आ भी जाओ तुम अवतारी!

अब आ भी जाओ तुम अवतारी, राह देख रहे हैं हम तुम्हारी, सुनते हैं तुम, आते रहते हो, भक्तों के कष्टों को हरते हो, मैं भी तो हूं भक्त... Read more

नित बढ़ रहें हैं जिनके दाम! डीजल पैट्रोल हैं इनके नाम!!

विगत कुछ दिनों से, थोड़े-थोडे करके, बढ़ते रहे, जिनके दाम, डीजल पैट्रोल हैं इनके नाम। यूं तो इनके बढ़ने का सिलसिला, तब शुरू हु... Read more

कोरोना को भगाने के लिए, आत्मबल का संबल चाहिए!!

सर्दी खांसी पहले भी होती थी, कितने ही बार इसको झेला है, जुखाम बुखार भी कितनी बार हुआ, इसको भी बार बार झेला है, कभी ना हम इनसे घब... Read more

चीन के चक्कर में चल पड़ी चिक-चिक!

चीन ने गलवन घाटी में, बढ़ाई अपनी सक्रियता, आम आदमी को चल गया, जल्दी ही इसका पता। डेढ़ माह तक तो, दोनों ने सब्र से काम लिया, ... Read more

मित्रों नेक सलाह पर ध्यान धरो!!

सीमाओं पर है तनातनी, युद्ध की है आशंका बनी, यदि ना सुलझा यह विवाद, तो सुनाई देगी, गोला-बारूद की ध्वनि। इस चीन को अचानक क्या हु... Read more

जिसे पलकों पर बिठाया ,वहीं काट खाने को आया!!

हे जिनपिंग तूने यह क्या करवाया, पहले विषाणु से सारे जग को रुलाया, अब तूने सैनिकों को मरवाया, तूझे मानवता की परवाह नहीं है क्या? ... Read more

मनरेगा का अर्थ शास्त्र!!

सौ दिन का है काम, मनरेगा है नाम, खर्च का ब्यौरा, एक दिन का, टमाटर सब्जी पर रुपए बीस, द... Read more

पड़ोसी की अहमियत!!

हमारे लिए पड़ोसी की कितनी अहमियत है, यह पड़ोसी के व्यवहार पर निर्भर है, पड़ोसी सुख-दुख में सहायक होता है, पड़ोसी पर अपनों से ज्या... Read more

कोरोना काल की हवाई यात्रा संस्मरण!!

हम घर लौटने के लिए, एयरपोर्ट पहुंचे, वहां का नजारा पिछले दिनों से बदला हुआ दिख रहा, हर नागरिक एक दूसरे से दूर होकर था चल रहा, आज... Read more

अपनी छत!

कैसी भी हो अपनी छत, अपनी ही होती है, जब चाहे, उस पर चढ़ जाओ, जब चाहे उतर आओ, ना कोई ठोका-टोकी, ना किसी से बक झक होती । जैसा... Read more

जीवन जीना सबकी जरूरत है!!

जीवन जीना सबकी जरूरत, जीने को सभी प्रयत्नरत्त, अपनी सुविधा, अपनी हैसियत, जो हो जाए, जितना मिल जाए, उसमें ही हम रम जाते, स्वंय... Read more

उडान

एक संस्मरण हवाई यात्रा पर! ************************ मैं और मेरी पत्नी,ने भरी उड़ान, इंडिगो एयरलाइंस का था विमान, मैंने तो इससे ... Read more

न जांण कख पैट्यां छ?

गढ़वाली भाषा में पलायन पर वर्णित## ####################### घर कुड़ी तैं,छोडी-बाडीक, न जाण कख पैट्यां छा, बै-बुबों, भाई-बहणौं तैं,... Read more

आत्महत्या की नौबत क्यों आए?

जब इंसान का संघर्ष, विफल हो जाता, और संघर्ष वह नहीं कर पाता, तब निराशा का भाव प्रबल होकर, उसे जीवन जीने के, सारे विकल्प से हताश... Read more

धैर्य! नहीं दिखाया?

धैर्य नहीं दिखाया ,*******""******, यह बयान आज आया, अपने देश के श्रमिकों ने, धैर्य नहीं दिखाया, कृषि मंत्री ने बताया। एक तरह... Read more

उथल-पुथल!!

भारी उथल-पुथल है, मेरे ही, अंतर्मन में, मैं क्या जानूं, क्या हो रहा है, किसी और के, अंतर्मन में, इतना कुछ , हो गया है, आज ... Read more

बेबसी ही हर मुसीबत की जड़ है!!भाग एक।

भाग एक!! विडंबना तो देखिए, रेलें गंतव्य से भटक गई, तो उसे, एक योजना का रंग दे डाला, रेलें विलम्बित हुई तो इसका भी कारण कह डा... Read more

जो कहर बनकर आया है,! वह अवसर बनकर जाएगा?

यह महामारी जिसने दुनिया को हिला दिया, जिसने हमारे वजूद को झकझोर दिया, जिसके कारण हमने कष्ट सहा, जिससे जाने कितने घर बरबाद हुए, ज... Read more

हम स्वार्थ से वशीभूत हैं!

हम स्वार्थ से वसीभूत हैं, अपने सुख-दुख तक सीमित हैं, अपने कष्ट हमसे सहे नहीं जाते, दूसरों के कष्ट हमें ना सताते। ऐसा युग युगां... Read more

ज्योति!!

यह गजब की ज्योति है, जिसमें साहस की शक्ति है, जिसमें भावना की भक्ति है, जिसमें असहाय पिता की बेबसी से, पार पाने की भी शक्ति है, ... Read more

कोरोना अप डेट!!

कोरोना का संक्रमण जब चीन में ही चल रहा था, तभी कुछ समाचारों में यह चर्चा का विषय बन रहा था, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे, रोकने को... Read more

चुक हुई है तो, स्वीकारते क्यों नहीं?

माना कि कोई बिमारी नहीं चाहता है, लेकिन उसे नजर अंदाज़ कर आता है, तभी वह उस बिमारी में फंस जाता है, और यदि वह बिमारी सक्रंमण वाली... Read more

बेबसी हार गयी !व्यवस्था मार गयी!!

पिछले पांच-चार दिन, खुब सियासत की बिसात चली है मजदूरों को घर पहुंचाने का नाटक बाजी रही है, कांग्रेसियों ने सरकार से बसों को चलाने... Read more

यह सियासत नही तो और क्या है?

सड़कों पर चलने को मजबूर ये मजदूर, भूख और प्रयास से व्याकुल हुए ये मजदूर, शासन,प्रशासन की उपेक्षा से आहत ये मजदूर, व्यवस्था के कुप... Read more

एक लाख पार!!

लो हो गये हम भी,एक लाख के पार, इतने लोगों ने झेल लिया है, इस महामारी का वार । अब हम भी तो हो गये, उन देशों में सुमार, एक लाख ... Read more

शब्दों से श्रद्धांजलि!!

क्या नाम दूं मैं इस व्यथा को, समझ मैं नहीं पा रहा, हो गया हूं मजबूर इतना, कुछ भी कहा नहीं जा रहा। हुआ ना था मैं आज तक, लाचार ... Read more

सीखना होगा !हमें इन सब से सीखना होगा!!

सीखना होगा, हमें यह सब सीखना होगा, इन सब लोगों से सीखना होगा, पहले लेन देन की जानते हैं, पेमैंट कैसे करें, शशिकांत दास जी बताते... Read more

राहत में आम आदमी कहां पर है?

आधी रात में शुरू हुआ, ताला बंदी का शोर, ऐसे ही देखा था, हमने नोट बंदी का दौर, आ गई थी अचानक, ताला बंदी की आफत, तैयार नहीं था क... Read more

तो ये राहत है?

पच्चीस मार्च को आठ बजे, रात का हुआ था आगाज, और तभी,आई यह आवाज, आज की आधी रात से, देश में तालाबंदी शुरू हो जाएगी, और हमें याद आ ... Read more

पराधिनता का बोध भाव!!

स्वाधीन हैं हम तब तक ही, जब तक नहीं किसी का हस्तक्षेप, जैसे ही किसी ने दिया दखल, हमारे जीवन में, अनाधिकार, नहीं कर पाते हम उसे स... Read more