Jaikrishan Uniyal

Saklana Tehri Garhwal

Joined December 2017

सामाजिक कार्यकर्ता, एवं पूर्व ॻाम प्रधान
ग्राम पंचायत भरवाकाटल,सकलाना,जौनपुर,टिहरी गढ़वाल,उत्तराखंड।

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न जांण कख पैट्यां छ?

गढ़वाली भाषा में पलायन पर वर्णित## ####################### घर कुड़ी तैं,छोडी-बाडीक, न जाण कख पैट्यां छा, बै-बुबों, भाई-बहणौं तैं,... Read more

आत्महत्या की नौबत क्यों आए?

जब इंसान का संघर्ष, विफल हो जाता, और संघर्ष वह नहीं कर पाता, तब निराशा का भाव प्रबल होकर, उसे जीवन जीने के, सारे विकल्प से हताश... Read more

धैर्य! नहीं दिखाया?

धैर्य नहीं दिखाया ,*******""******, यह बयान आज आया, अपने देश के श्रमिकों ने, धैर्य नहीं दिखाया, कृषि मंत्री ने बताया। एक तरह... Read more

उथल-पुथल!!

भारी उथल-पुथल है, मेरे ही, अंतर्मन में, मैं क्या जानूं, क्या हो रहा है, किसी और के, अंतर्मन में, इतना कुछ , हो गया है, आज ... Read more

बेबसी ही हर मुसीबत की जड़ है!!भाग एक।

भाग एक!! विडंबना तो देखिए, रेलें गंतव्य से भटक गई, तो उसे, एक योजना का रंग दे डाला, रेलें विलम्बित हुई तो इसका भी कारण कह डा... Read more

जो कहर बनकर आया है,! वह अवसर बनकर जाएगा?

यह महामारी जिसने दुनिया को हिला दिया, जिसने हमारे वजूद को झकझोर दिया, जिसके कारण हमने कष्ट सहा, जिससे जाने कितने घर बरबाद हुए, ज... Read more

हम स्वार्थ से वशीभूत हैं!

हम स्वार्थ से वसीभूत हैं, अपने सुख-दुख तक सीमित हैं, अपने कष्ट हमसे सहे नहीं जाते, दूसरों के कष्ट हमें ना सताते। ऐसा युग युगां... Read more

ज्योति!!

यह गजब की ज्योति है, जिसमें साहस की शक्ति है, जिसमें भावना की भक्ति है, जिसमें असहाय पिता की बेबसी से, पार पाने की भी शक्ति है, ... Read more

कोरोना अप डेट!!

कोरोना का संक्रमण जब चीन में ही चल रहा था, तभी कुछ समाचारों में यह चर्चा का विषय बन रहा था, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे, रोकने को... Read more

चुक हुई है तो, स्वीकारते क्यों नहीं?

माना कि कोई बिमारी नहीं चाहता है, लेकिन उसे नजर अंदाज़ कर आता है, तभी वह उस बिमारी में फंस जाता है, और यदि वह बिमारी सक्रंमण वाली... Read more

बेबसी हार गयी !व्यवस्था मार गयी!!

पिछले पांच-चार दिन, खुब सियासत की बिसात चली है मजदूरों को घर पहुंचाने का नाटक बाजी रही है, कांग्रेसियों ने सरकार से बसों को चलाने... Read more

यह सियासत नही तो और क्या है?

सड़कों पर चलने को मजबूर ये मजदूर, भूख और प्रयास से व्याकुल हुए ये मजदूर, शासन,प्रशासन की उपेक्षा से आहत ये मजदूर, व्यवस्था के कुप... Read more

एक लाख पार!!

लो हो गये हम भी,एक लाख के पार, इतने लोगों ने झेल लिया है, इस महामारी का वार । अब हम भी तो हो गये, उन देशों में सुमार, एक लाख ... Read more

शब्दों से श्रद्धांजलि!!

क्या नाम दूं मैं इस व्यथा को, समझ मैं नहीं पा रहा, हो गया हूं मजबूर इतना, कुछ भी कहा नहीं जा रहा। हुआ ना था मैं आज तक, लाचार ... Read more

सीखना होगा !हमें इन सब से सीखना होगा!!

सीखना होगा, हमें यह सब सीखना होगा, इन सब लोगों से सीखना होगा, पहले लेन देन की जानते हैं, पेमैंट कैसे करें, शशिकांत दास जी बताते... Read more

राहत में आम आदमी कहां पर है?

आधी रात में शुरू हुआ, ताला बंदी का शोर, ऐसे ही देखा था, हमने नोट बंदी का दौर, आ गई थी अचानक, ताला बंदी की आफत, तैयार नहीं था क... Read more

तो ये राहत है?

पच्चीस मार्च को आठ बजे, रात का हुआ था आगाज, और तभी,आई यह आवाज, आज की आधी रात से, देश में तालाबंदी शुरू हो जाएगी, और हमें याद आ ... Read more

पराधिनता का बोध भाव!!

स्वाधीन हैं हम तब तक ही, जब तक नहीं किसी का हस्तक्षेप, जैसे ही किसी ने दिया दखल, हमारे जीवन में, अनाधिकार, नहीं कर पाते हम उसे स... Read more

लाचार किसान!क्या है समाधान?

मजदूर तो दिख ही रहा था बेजार,, अब किसान भी दिखाई दे रहा है लाचार, हर दिन,हर माह उसका श्रम लगता है, किन्तु फल तो उसको,फसल पकने पर ... Read more

पाप की हांडी! फूटने को भरी है!!

श्रमिकों का श्रम बल , अब लुटने को है, शायद अब पाप का भांडा फूटने को है, धन पतियों के उद्यम, में वृद्धि के लिए, सरकारों ने नियमों ... Read more

पांडवों का गृहस्थी जीवन!उत्कर्ष एवं पराभव। शेष भाग

पांडवों का यह सर्वोच उत्थान का वैभव काल था, राजसूर्य यज्ञ करके उनकी यश पताका बढ़ गई, उधर दुर्योधन के मन में अपमानित ... Read more

पांडवों का गृहस्थी जीवन!उत्सर्ग एवं पराभव।।

अर्जुन ने स्वयंबर तो जीता, द्रौपदी का वरण भी कर लिया। लेकिन घर पर आकर, माता से परिहास कर बैठे, माता हम अनमोल उपहार लाए हैं, यह ... Read more

पांडवों की युवावस्था/किशोरावस्था!!

कौरव, पांडवों की शिक्षा दिक्षा पुरी हो गई, इधर हस्तिनापुर को युवराज देने की तैयारी चल रही। युवराज के पद के लिए दावेदार हैं यह दो, ... Read more

पांडव गाथा। शैशव काल

पांडू पुत्रों की यह गाथा, राज कुल में जन्म है पाया। भरत वंश के यह वाहक, कुल दीपक यह ,कुल के नायक। कुंन्ती पुत्र इनका परिचय, अनि... Read more

मुझ जैसा कोई देवव्रत होता।

मैं यदि देवव्रत होता,कभी ऐसी शपथ नहीं लेता। और अगर मजबूर कोई करता, तो अपने तर्कों को मैं रखता। यदि तब भी वह मानें नहीं होते, तो मै... Read more

देवव्रत से भीष्म पितामह तक। शेष भाग के अंश

द्रौपदी को जीत स्वयंम्बर में, पांडव पहुंचे गए अपनी कुटिया में। ‌ धीरे-धीरे सबको पता चल गया, पांडव... Read more

देवव्रत से भीष्म पितामह तक।

शांतनु के लाडले, हस्तिनापुर के राजकुमार। मां गंगा के पुत्र हैं यह, मां इनकी प्रेरणा का आधार। गंगा के चले जाने से, शांतनु रह ग्ए थे... Read more

महाभारत का सूत्रधार ।

महाभारत के सूत्रधार, इनमें प्रमुख हैं यह चार। भीष्म पितामह,ना चाहते हुए भी, कौरव पक्ष में ही खड़े थे‌। गांधार राज शकुनि, अपनी ब... Read more

दानवीर कर्ण।।

सूर्य पुत्र के रूप में जन्मा, कुन्ती है जन्मदात्री मां। पाल पोस कर बड़ा किया है, वो मुंह बोली है राधेय मां। है नहीं यह क्षतृय वर... Read more

धृतराष्ट्र का पुत्र मोह!

हस्तिनापुर के महाराज, इनका नाम है धृतराष्ट्र! नेत्रहीनता से संतप्त, अपनी कुंठा में अभिशप्त! राज सिंहासन चाहते अपने अनुकूल, पुत्... Read more

अद्भुत है पांचाली का जीवन!

यज्ञ कुण्ड से जन्मी पांचाली, द्रौपद की यह बेटी, नाम दिया इसको द्रौपदी ! विवाह को भी एक यग्य किया गया, मंछली की आंख का भेदन करना ... Read more

और कितने लोक!

मृत्यु लोक जिसे कहते हैं, हम वहीं पर रहते हैं! जीवन-मरण है जिसका कर्म, आवागमन इसका मर्म ! फिर लोग यह क्यों कहते हैं, कुछ तो अच्... Read more

मृत्यु लोक के हम हैं प्राणी!

देखा नही पर,सुना जरूर है, और कई लोक हैं यहाँ पर! कौन वहाँ पर रहते हैं, यह भी हमने सुना यहाँ पर! पर हम तो हैं मृत्यु लोक के प्राण... Read more

अपनों के लिए,मर-मर के जी जाएंगे![घरेलू हिंसा पर विचारने हेतु]

जीवन के इस सफर में,अब तक मैंने काम किया! याद नही है मुझ को,इससे पहले कभी आराम मिला! जीवन ऐसा ढल गया है अपना ! घर पर बैठ कर समय कट... Read more

बगिया की फुलवारी में दो फूल ..प्रतिकात्मक चरित्र प्रसंग..!

युद्ध की तैयारी होने लगी, हो गया शंखनाद ! दोनों पक्षों की ओर से,लग गया सेनाओं का अंबार! एक ओर,महारथियों की थी भरमार ! एक ओर, पांच... Read more

बगिया की फुलवारी में दो फूल ..प्रतिकात्मक प्रसंग !

भाग दो............प्रतीकात्मक प्रस्तुति प्रसंग !.......................... फाँस लिया अपने जाल में,रखा यह प्रस्ताव, जीत गए जो त... Read more

एक बगिया की फुलवारी के वह दो फूल![प्रतिकात्मक.प्रसंग]

..... भाग एक- . प्रथम चरण का संदर्भ ! एक बगिया की वह... Read more

सब चलता है!

येे जुमला हमने कई बार सुना है,सब चलता है! यह कहते हैं। चलने को चाहे कुछ नहीं चलता,पर अक्सर लोग यही कहते हैं। कब हमने यह सोचा था कि... Read more

क्यों डरते हैं हम, करने से सच का सामना!

डरते हैं हम क्यों,करने से सच का सामना! क्यों नही चाहते,हम उस सच को जानना! आया है जो आज हमारे समुख, चाहता है वह यह जतलाना! मैं ही ... Read more

मानवता के दुश्मनों से हो जाओ सावधान!

अपने अहंकार में हैं यह सब लहू -लुहान, पुरे विश्व समाज को करके ये परेशान! दीन-दुखी जूझ रहे,कैसे बचाएं जान, एक छोटे से वायरस से हुए... Read more

प्रसंग वश-समय चक्र-स्वाधीनता से अब तक! [प्रथम भाग!]

वर्ष तिहत्तर हो रहे,हुए हमें आजाद! अमर शहीदों का हमें मिला पुण्य प्रसाद! नौनिहाल सब सुखी रहें,रहे देश खुशहाल ! इन्हीं आकांक्षाओं ... Read more

लौक डाउन [ताला बंदी] मेरे सपने में आया !

लौक डाउन मेरे सपने में आया! आकर उसने मुझे बताया!! मुझे अभी रुकने को कहा गया है! काम नहीं पुरा हुआ है!! तू तो चाहता था,मैं चला जा... Read more

जाता क्या तू चायना!

ऐ-सुन ! सुना. ! जाता क्या तू चायना! क्या करूँ जाकर के चायना! खेलेंगे,,नौकरी करेंगे,ब्यापार करेंगे,! और लायेंग... Read more

परीक्षा

परीक्षाएँ हमने दी है कई बार,सफल-असफल का करके विचार! मिली सफलता तो खुशी का अहसास,रहे असफल तो हुए उदास रुके नही,ना हम अकुलाए,फिर किय... Read more

चलो,जंलाएं दिए!

राह में चलते हुए, मिल जाते हैं कितने ही राही-राहगीर! और बिछुड जाते हैं, दो राहों पर! जो चले थे साथ हम सबके । पर ,यह देखना हमारा... Read more

प्रसंग वश-वचन-प्रण-या हठ!

युगों युगों से चली आ रही है यह प्रथा!कभी वचन,कहीं प्रण की कथा!आज हम उसको हठ कहते हैं,कुछ लोग इसे जीद भी कहते हैं! पर है यह एक प्रका... Read more

छोड़ भी दो अब राग कोरोना!

छोड़ भी दो अब राग कोरोना! उससे डर कर भयभीत होना! उठो चलो कुछ पुरुषार्थ करो ना,क्या दिनभर बैठे,रात को सोना! दीन-दुखियों का साथ भी द... Read more

पलायन का संकट!-गाँवों की उपेक्षा-शहरों का आकर्षण!

जैसे ही हुआ यह ऐलान,सड़कें हो गई सुनशान! महामारी से बचने का यह उपाय है,घर पर ही रुकने का सुझाव है! शहरों में था सन्नाटा पसरा, गाँवो... Read more

जीवन जीने की जंग-गांव शहर के संग!

अदृश्य शत्रु की आहट बडी है,यह संकट की विकट घड़ी है! घर पर रहने का आग्रह है,इसमें नहीं कोई दुराग्रह है! ठहरे हुए भी हैं लोग घरों पर... Read more

महाभारत का संदर्भ!कोरोना से जंग !!

महाभारत का युद्ध,जो शताब्दियों पूर्व हुआ था, जिस युद्ध में,दुश्मन भी जाना- पहचाना था! और दुश्मनी की चाहत भी स्पष्ट थी पता, युद्ध... Read more