Jaikrishan Uniyal

Saklana Tehri Garhwal

Joined December 2017

सामाजिक कार्यकर्ता,पुर्व ॻाम प्रधान

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पंचायत चुनाव-अबकी बारी

मैं हूँ डिग्री धारी,फिर भी चुनाव लड़ने का नहीं अधिकारी! माना मैं तीन बच्चों का बाप सही,इसी लिए चुनाव के योग्य नहीं! हां मैं सवर्ण भ... Read more

अभिनन्दन. का. अभिनन्दन

शूरवीर हो तुम सैनिको,यह तुमने हर बार दिखलाया था, अभी आतंकियों के घर में घुसकर,तुमने उन्हेें ढहाया था, फिर भी कर गया हिमाकत,दुश्मन,... Read more

शहीदों की शहादत और शहीदी का मर्म

शहादत देते वीर अपने, शहादत से कब घबराये हैं, पर अफशोस रहता इस. बात का है, दुश्मन धोखे से आए हैं, आकर सामने से वह वार करते, तब ह... Read more

विरांगना का उदघोष

हर आंख में आंसू बह रहे थे, पर वह तो आंसू पी गयी थी, सुबक रहे थे जहां सब नर-नारी, वह दृढ-निश्चयी अडिग खडी थी, लोग दे रहे थे गमगीं... Read more

गले लगना-गले मिलना-और गले पडना

बहुत पुराने साथी से भेंट क्या हुई,कि वह गले लग गयेे, एक दुसरे का हाल पूछा,पुरानी यादौं को ताजा किया,व चल दिये, जाते हुए फिर मिलने ... Read more

मेरी राशी किलै पैट्यां छैं

ऐ लठ्यालौं,कुकर बिरालौं , ं मेरी राशी पर किलै पैट्यां छैं, कुई बुरुणू छै,अपना नगुंन,... Read more

माँ बसन्ती-पिता राम कृष्ण

मां बसन्ती,पिता राम कृष्ण,जन्म जिन्होने दिया मुझे, मुझसे पहले,आए जो भाई बहन,उन सबको मेरा अभिन्नदन। माँ समान रमा दीदी,सबसे पहले वो ... Read more

कृष्ण - द्रौपदी सवांद

कृष्ण- -सखी ,यह मैं क्या देख रहा हूँ, ललाट पर चिंता की लकीरें हैं आई, चेहरे पर उदासी है,आंखे हैं सजल,किस चिंता में हो समाई। है रु... Read more

भूत लगी या देवता आई

जब एक मनखी जोर से चिल्लाई, आवाज सुणीक मैं बौखलाई, पुछी मैंन क्या ह्वै भाई, क्ंयाक कि खातीर तू ऐनू बरम्नडाई। मेरी बात तैन न धराई,... Read more

जद्दो जहद की तिसरी कडी, सडक और नाली !

जैसे तैसे घर बना दिया,अब सडक बनवानी है, जिस बस्ती में मैं बसा हुँ,वहाँ अभी तक पगडण्डी से काम चलाते हैं,पगडण्डी को सडक बनायें कैसे, ... Read more

जिन्दगी की जद्दो जहद के मध्य,ब्यथा और ब्यवस्था की जंग!

विद्युत सयोंजन,- द्वीतीय भाग- घर नया बनाया तो विद्युत का सयोंजन चाहिए था, विद्युत कार्यालय गया,और पुछा कैसे मिलेगा संयोजन, वह ... Read more

आम आदमी की जद्दो -जहद्द के मध्य,ब्यथा और ब्यवस्था की जंग

प्रथम भाग ! ब्यथा और ब्यवस्था के मध्य है एक जंग, ब्यवस्था बनाने वाले देते हैं,इसको अनेकों रंग, सीधे -सीधे कोई ब्यथा नहीँ होती है ... Read more

वेदना में हैं पहाड

ये टूटते पहाड, ये खिसकते पहाड, कहीं बिखरते पहाड, तो कहीं चटकते पहाड, हा! ये छिटकते पहाड । जहां लहलहाती थी हरियालियां, जहां सु... Read more

तीस साल पहले का दौर-व-तीस साल बाद का शोर

तीस साल पहले जब बोफोर्स का था शोर , तीस साल बाद अब-जब राफेल पर है जोर। बोफोर्स में तब चौंसठ करो... Read more

जो मैं होता कुंआरा,या पत्नी होती टीचर

जो यदि मैं कुंआरा होता,या पत्नी होती टीचर,मै मौजां ही मौजां मे रहता। ना जल्दी उठने की कोई चिन्ता होती, ना देर में सोने का कोई चक्क... Read more

मैं थका हुआ हूँ

कोई काम नहीं है,पर मैं थका हुआ हूँ भारी, मन है बोझिल बना हुआ,और तन में है थकान भारी, शायद इसलिए कि बच्चों को पढा लिखा कर निभाई है ... Read more

यह दोष किसका है‼यहाँ दोषी कौन नहीं❗

देश कि राजधानी,दिल्ली में, तीन बच्चे भुख से मर गये, तो खबर बन गयी। दूर किसी गांव में अक्सर मर जाते हैं किसी न किसी अभाव के चलते,... Read more

यह रिस्ता,कैसा है

हम्मी से शिकवा,और हम्ही से शिकायत, हम्ही से पाती वो हर रियायत। हम्ही से रहता हैउसको गिला भी, हम्ही से जुडा है,उनका हर सिलसिला भी।... Read more

गुस्से और नसे के दौर में करें यह उपाय

रोड रेज पे लड कर मरते, नसे में दुर्घटना से मरते, मोबाइल से ध्यान भटक कर मरते, पर फिर भी हम नहीं सुधरते। घातक हैं यह जीने की खाति... Read more

बेटियां अपनी,बेटे पराये

बेटे अपनी ससुराल कि सोचें, मां बाप कि सोचे बेटी, जमीन जायदाद कि चाहत सबको, पर बझंर रह गयी खेती, सोच नयी यह बिकषित हो रही, नित इ... Read more

कुर्सी की चाह,नेताओं की डाह

कुछ लोग उन्हे युवराज पुकारें, तो कोई डाह से पप्पू कह कर पुचकारे। कुछ बडे उल्लास से नमो-नमो हैं जपते, तो कोई उन्हे,फेंकू,और चाय वा... Read more

एक और कार्य काल

पुरा होता एक और कार्य काल, आस्था और अविश्वास के साथ, बनता विश्वास और टूटती आस, बीत गये चार साल। एक सपना मतदाता का, एक सपना,जन औ... Read more

अपने अपने मन की

अपने मन की करते थे हम जब उनसे आस लगा बैठे अब जो अपने मन की कहते हैं हम चाहते थे अपने मन की, वो अपने मन की कर बैठे। हम भी क्या ... Read more

पत्नी वन्दना

दिलवर जानी, रानी, महारानी, मैं तेरी वन्दना करुं, नित तेरा ध्यान धरुं, मान करुं,सम्मान करुं, । तू होती,क्यों रुष्ट बता मुझे अपना... Read more

चोरी

मेरी,भी एक चोरी हुई, बहुत नही,थोडी हुई, रहते थे,हम आर्यनगर, बच्चे,पढते थे शहर, गये गांव,थे हम अपने, कल्पना नही कि थी,चोरी कि सप... Read more

दिगभ्रमित

मैं,दिगभ्रमित सा खडा सोचता, जाऊँ किधर ,किस राह, आगे है चौराहा, चहुँ दिशाओं में,छाया है अन्धकार, जाऊं किस दिशा में,सुझता नही कोइ ... Read more

जीवन -मृत्यु के मध्य के वह पल

जीवन -मृत्यु के मध्य का वह फासला जो जन्म से शुरु होकर,एक पल से शतआयु तक कुछ भी हो सकता है,उसके प्रारभ्बध्द के अनुसार इसे,न माने ह... Read more

जीवन-मृत्यु का संघर्ष "एक वानगी"

जीवन है संघर्ष पथ, मृत्यु है,कटु एवम् अन्तिम सत्य। जीवन और मृत्यु के मध्य, दूरी है,एक अनिश्चित, प्राणी,तय करता है जब यह सफर, जब... Read more

ये चुनाव , हम और वो

प्रथम पक्ष- ये चुनाव हमसे क्या ले जाते हैं- मत ,अभिमत चैन,शकुन रिश्तों में खटास सम्बन्धों में दरार, आस-पास कि शान्ति, और मिठा... Read more

पक्ष-विपक्ष का तर्क -वितर्क

१-वो लुटे पिटे हैं पर घुटे हुए हैं, हैं झूठे नम्बर एक। हम अच्छे हैं,हम सच्चे हैं, हैं,हम सेवक नम्बर एक। दस पांच नही,बीस तीस नही... Read more

लो बीतने को है एक और कार्य काल

पुरा होता एक और कार्य-काल आस्था और अविश्वास के साथ बनता हुआ विश्वाश और टुटती आस बीत गये हैं ये चार साल । एक सपना मत दाता का, एक... Read more

कृष्ण-कर्ण संम्वाद ,प्रसंगवस-आज के परिवेश में

कृष्ण-कौन्तेय,करो तुम इस पर विचार, पाण्डवों का साथ देकर,करो भूल में तुम सुधार। कर्ण-"हे मधुसूदन,देर हुई अब, लौट मै नही सकता, दिय... Read more

अटल -नवाज-सम्वाद

अटल जी- विश्व बन्धुत्व है मूल मंत्र,मै उस देश से आया हूँ मित्रता का हाथ बढाने,मैं अटल बिहारी आया हूँ, गर साथ निभावो तुम,तो युद्ध ... Read more

कुम्भ की डुबकी संग देवदर्शन

गोविन्द की लीला रंग लाई, कृष्ण हरि ने राह बनाई,:(योजना): आस्था कि डुबकी लगाने, प्रयाग राज के संगम पे नहाने, चले हम कुछ भाई, साथ... Read more

यमनोत्री धाम में यमुना जी कि छवि वर्णन

यम कि बहन यमुना जी, हिम शिखरों से यह बह निकली, श्वेत,धवल, इसकी धारा, दृश्य मनोरम अति प्यारा, शान्त स्वरुपा सी यह निश्छल भी, धार... Read more

बदलता समय,बदलते हालात,पर न बदलता नजरिया

७८कि बाढ से लेकर,९१ कि कांपती धरती तक, एक दशक से अधिक समय बीत गया, सोचें जरा हम,इस बीच क्या नहीं बदला, जो तब चलना भी नहीं,सीखे थे... Read more

अंग्रेजी का जब से ये दौर चला

जब से अंॻेजी का दौर चला,कहने सुनने वालो का होता भला,न कह सकने वालों का हो गया बुरा,परदेश से आया और यहीं का हो चला, भारत कि माटी मे... Read more

हेमवतीनन्दन रुपी मेरा सूरज

ऐ सुर्य देव,तुम्हारा अवसान हर साझं को होता है, लेकिन हर सुबह,तुम्हारे प्रकाष से शुरु होती है। इस रोज मेरा सुरज भी डूबा, सत्रह मार... Read more

गठबन्धन पार्ट टू

साइनिंग इन्डिया के बाद भी, सरकार अटल जी से फिसल गई, छींका टुट कर गिरा ही था, सोनिया ने थाम लिया, हाथ बढा कर पकड उसे, मनमोहन को ... Read more

तीसरा मोर्चा➖एक मौका➖धोखा ही धोखा

बी ० पी० तेरे शासन में, मण्डल कमण्डल की चासन में, जनता खडी है अनुशासन में, कैरासिन हो या गैस घरेलु, डीजल हो या पैट्रौल, हर जगह ... Read more

पंक्तिवद्ध होना,यानि की लाइन लगाना

पंक्तिवद्ध होना यानि की लाइन में लगना, लाइन लाइन ही है,चाहे वह छोटी हो या लम्बी,लाइन लाइन है,आडी हो या तिरछी, लाइन लाइन है,चाहे वह... Read more

अटल जी मोहे,मैं नहीं प्याज खायो

अटल जी मोहे,मैं नहीं प्याज खायो, साझं ढले,जब मण्डी गयो, तो प्याज का भाव चकरायो, आलू चौदह,टमाटर चालीस, प्याज सत्तर बतलायो, लौकी,... Read more

जार्ज ठहरे सयोंजक,यह अतिरिक्त है भार ।

अटल जी कि टीम में,हैं बडे बडे मठाधीस, झुकता नहीं एक दूजे के सम्मुख,इनका शीष, अटल जी को सालती रहती इसकी टीस, दो दर्जन दलों से मिलक... Read more

गठवन्धन पार्ट वन

अटल जी हुए लाचार,कैसे चलाएं वो सरकार, करुणानिधि पर जया कि तलवार, ज्योतिबसु पर ममता का वार, बंसी से चौटाला कि खार, माया मुलायम कल... Read more

ऐ बलिदानी,अमर सैनानी,कोटि कोटि है नमन तुम्हे

ऐ बलिदानी,अमर सैनानी, कोटि कोटि है नमन तुम्हे, अटल निश्चयी,अनशन कारी, है तेरी बलिहारी, सौंपा जो तुमने,आजाद चमन । राजशाही से तु... Read more

गुम होती,ईमानदारी,व इन्सानियत

सोने कि चिडिया कहते थे, जिसे कभी, उस देश में आज हम, धारण कर चुके हैं भेडिये का रुप। आदम जात,आज आदमी को काट खाने को है तत्पर,इस बात... Read more

क्यों होता है यह झगडा

झगडा ➖झगडा है आज हर तरफ यह झगडा, पर है किस कारण यह झगडा, उधर देखो दो देषों में झगडा, ईधर भी है दो राज्यों का झगडा, कहीं पर है स... Read more

झगडा,मन्दिर मस्जिद का

आज कल है फिर,यह हल चल, मस्जिद है बाबरी,या फिर जन बल । जन्म राम ने लिया जहाँ, था बना मन्दिर वहाँ ❓ कौन गवाह है अब यहाँ, खसरा खतौ... Read more

काट नही पेड लगा

वो देखो कोई,पेड काटता, उसे रोको, टोको, वह जो पेड काटता, कहो उससे, औरों के लिए ना सही, अपने लिए ही सही, क्यों,पर्यावरण का खोते ह... Read more

समाज कल्याण,एक मत्रांलय

एक अदद मत्रांलय है, जिसका नाम है समाज कल्याण, जहाँ नितियां तो तय होनी थी, हर समाज के लिये, पर प्राथमिकताएं,आरक्षित हैं, कुछ ही... Read more