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संविधान

भारत का संविधान घनाक्षरी छंद ,उपमा अलंकार महीने में एक बार मिलने के क्षण तेरे, सरकारी, कार्ड के राशन जैसे लगते। आते पग ... Read more

सुंदरी सवैया

सुंदरी सवैया सबका वह पालनहार सदा जग का भरपेट भला करता है। हम तो तुम तो धन ही हरते वह तो सबके दुख को हरता है। मरते सब हैं जनम... Read more

घनाक्षरी छंद

चित्र की चर्चा घनाक्षरी छंद जीएसटी नोटबंदी जनता को लाए लाभ, जै जैकार व्यापारी किसान करने लगा। विदेशों से काला धन ल... Read more

बाल कविता (हास्य)

बाल दिवस पर बाल केंद्रित एक कविता बाल दिवस पर विद्यालय में, बोल रहे थे बाबूलाल। नेहरु जी के सिर के ऊपर, नहीं जमे थे ... Read more

कवियों की सरकार 1

कवियों की सरकार घनाक्षरी छंद एक बोला कवियोंकाक्या है ?सभी मंच पर, देशहित गाते बातें करते बड़ी-बड... Read more

कवियों की सरकार

रेत की दीवार कवियों की सरकार घनाक्षरी छंद रूपक अलंकार कवियों की सरकार बना रहे थे गुरु जी, बनी या कि शेष भाग कुछ बचा काम का। क्... Read more

घनाक्षरी छंद

लीला भंसाली से घनाक्षरी छंद लीला भंसाली है दिमाग से तू खाली तूने, नजर ना डाली क्या कहानी हिंदुवाने की । राजस... Read more

यथा क्रम अलंकार

एक से पाँच राम तक यथाक्रम अलंकार घनाक्षरी छंद राम की कृपा से आते जाते दो अभिन्न मिले, वाणी पै विराज... Read more

पुत्र को सीख

घनाक्षरी छंद पंच सरपंच मिलने से मंच नहीं मिला, कुंठित भड़ास कहीं भी निकालता है क्यों। सर्वहित लिख, कुछ अल... Read more

चाणक्य की चोटी

घनाक्षरी छंद सत्य बात को अगर नब्बेआदमी नकारें, दस के दिमाग में जाके जरूर गड़ेगी। दीप छोटा है भले वजूद उसका है कुछ, अंधकार की पत... Read more

डमरू घनाक्षरी

लोगों से सुना है कि ,इस प्रकार की कविता नर काव्य के रूप में नहीं लिखना चाहिए ।उसका बहुत बड़ा परिणाम भुगतना पड़ता है क्योंकि इस कवित... Read more

हम और वे

हरि गीतिका छंद जो तालियों की गड़गड़ाहट से ,गगन तक छा रहे। जो गाय गंगा और, गायत्री की महिमा गा रहे । जो जाति बंधन वर्ग बंधन ,राज... Read more

चदरिया

1-चदरिया सवैया लालच लोभ भरी लिप्सा लिपटी जस होय पिटारी विषैली काम व क्रोध की बेल बनी जब जो थल पास रहा तहां फैली होकर मोह महाम... Read more

जटायु गाथा

जटायु गाथा सवैया छंद सीय बिठा रथ ले चला रावण जैसे कसाई के हाथ में गायू कीन्ह पुकार सिया वन में पर पास कोउ बलवा... Read more

कालिया मर्दन

ज्योतिषी शंकर जी बनके जिनके पद का स्पर्श था पाया गौतम नारी तरी तप से प्रभु ने अपना पद शीश लगाया जो पद पाने ऋषि मुनि संत अनंत... Read more

श्राद्ध पक्ष

श्राद्ध पक्ष घनाक्षरी छंद कभी नहीं जाना हाल जरा ना किया ख्याल बीमारियां पिताजी को आती रहीं घेर घेर सेवा कार्य नहीं किया मौका दे... Read more

हिन्दुस्तान है

हिंदुस्तान है (घनाक्षरी छंद) गुरूजी ने कहा एक शब्द के अनेक अर्थ होते बेटा शब्दों की पूरण करो छान है सत्य, प्रेम, सदभाव, क्षमा,... Read more

भ्रष्ट नेता चतुर नायिका

भ्रष्ट नेता चतुर नायिका रूपक,उपमा अलंकार, घनाक्षरी छंद नेताजी ने कहा खुशहाल कर दूंगा तुझे, पूरे परिवार की गरीबी भी मिटाऊंगा।... Read more

गणेश बाल लीला

बाल गणेश लीला(हास्य) बालक गणेश बोले माता तुम कहती हो पिताजी का देवों में श्रेष्ठ स्थान है सबको सपरिवार खाने पै बुलाते लोग हंसी ख... Read more

बाल गणेश लीला (हास्य)

बाल गणेश लीला(हास्य) बालक गणेश बोले माता तुम कहती हो पिताजी का देवों में श्रेष्ठ स्थान है सबको सपरिवार खाने पै बुलाते लोग हंसी... Read more

मन और आत्मा

आत्मा ने कहा परमात्मा में ध्यान लगा मनचाहे और थोड़ा सा रोमांस देख लूं। आत्मा ने कहा सौ सौ बार देखा छोड़ इसे मनचाहे और बस एक चांस ... Read more

हे राम

हे राम साधू सन्यासी वा बाबा त्यागी तपसी तीर्थ समान दर्शन कर चरणों में लागो मिले तुरत ही पुण्य महान मान्यतायें हैं यही पुरातन हम... Read more

खुद फूंक रहे हैं

खुद फूंक रहे हैं घनाक्षरी छंद काट काट रेल की पटरियां उखाड़ रहे, स्टेशन मिटाने में नहीं चूक रहे हैं। आफिसों में तोड़फोड़ सभी श... Read more

एक संतान शेर समान

(एक संतान शेर समान" परिवार नियोजन के इस नारे पर एक छंद) हवा बंद है सरकारी नौकर हूं एक पुत्र पैदा किया, शेर के समान मान समझा... Read more

राम रहीम

बाबा राम रहीम (घनाक्षरी छंद समान भाव) राम व रहीम में नहीं है कुछ फर्क यारो, दोनों की हैं नीतियां समाज खुशहाल की। राम करें जैसा... Read more

पैरोडी

बाबा राम रहीम के उद्गार (फिल्मी तर्ज पर एक गीत) जज ने जरा रहम नहीं खाया है दोस्तो बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तो उम्मीद न... Read more

ब्रज की रज

सवैया (ब्रज की रज) ब्रज के वन बाग तड़ाग हैं धन्य जहाँ जन्मे श्रीकृष्ण कन्हाई धन्य धरा वह धन्य कदंब जहाँ मुरली घनश्याम बजाई ... Read more

रानी अवंती बाई

रानी अवंतीबाई को श्रद्धांजलि दुर्गा जैसी उतरी रण में रखा देश का पानी जीवन भर वह रही जूझती हार कभी ना मानी अठ्ठारह सौ सत्तावन की ... Read more

अनुमान प्रमाण

घनाक्षरी छंद अनुमान प्रमाण अलंकार संभव है किसी दिन ऐसी कोई आंधी चले, कट्टर विचारों वाले पीले पत्ते झड़ेंगे। ज्वालामुखी शांत ह... Read more

वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम् यह दिन शहीदों के बलिदान का यह दिन भारत के स्वाभिमान का यह दिन शौर्य पराक्रम का प्रतीक तिरंगे की आन बान और शान का ... Read more

तिरंगा

तिरंगा, सवैया छंद दे रहे लोग सलामी तुझे यह पाकर पर्व महान तिरंगा तू बतला रहा मोल आजादी का कैसे हुए बलिदान तिरंगा देख तुझे जनमान... Read more

तिरंगा

तिरंगा आपस में मतभेद विचारों का देते विरोधी बयान तिरंगा सत्ता में कोई तो... Read more

सिचवेशन कविता

वर्षा की फुहार :-सिचुवेशन-: एक नायिका बारिश में भीग रही है उसे देखकर देश के चर्चित कवियों की काव्य मय अभिव्यक्ति क्या होगी इस पर आप... Read more

सिचवेशन कविता

वर्षा की फुहार :-सिचुवेशन-: एक नायिका बारिश में भीग रही है उसे देखकर देश के चर्चित कवियों की काव्य मय अभिव्यक्ति क्या होगी मैंने लि... Read more

कलाम साहब को समर्पित

सादगी सहजता सरलता से भरे हुए मानवतावादी गुण धर्म धारे धाम थे। थे महान इंसान विज्ञान ज्ञान लिए, भारत की प्रगति के चढ़ते मुकाम थे।... Read more

कृपान घनाक्षरी

कृपान घनाक्षरी बैरी आज सीना तान करे जंग का ऐलान, ओ सपूतो सावधान,आन-बान जा न पाय। माता भारती का मान,वीरो राखो देके प्रान, ललकारो... Read more

कारगिल विजय दिवस पर

पाकियों को पकड़ पकड़ पीस डाला ऐसे जैसे कोई चटनी सी पीस डालें सिल में । हौसला बुलंद जैसे मत्त से गयंद सारे शत्रुओं को कुचल बिछाय... Read more

जरा बतिया ले

सवैया छंद आदमी कि नहिं गैस मिटे चहे बीस प्रकार की औषधि खा ले औरत को जब गैस बने वह कोई दवाई का टंटा न घाले एक भी पैसा न खर्चे क... Read more

हिमालय

कुंदलता सवैया ( 8 सगण 2 लघु) चलते नित हैं सत् के पथ में, फिर हो किस भांति हमारी पराजय। जिस ठौर रहें सब ताप सहें, कुछ भी न कहें न... Read more

घूमें कभी मन में घने

घूमें कभी मन में घने क्षण क्षण यही विचार किस किस पर कविता लिखें किसे छोड़ दें यार किसे छोड़ दें यार व्यंग्य मोदी पर मारें या फिर ... Read more

नेता जी और यमराज

एक नेता जाके यमराज की अदालत में, अड़ गया बोला मुझे स्वर्ग भिजवाइये। स्वर्ग भिजवाया बोला क्या धरा सदस्यता में, इंद्र के निकट किसी प... Read more

कुन्डलिया

सब प्रकार से सफल है, मोदी जी का राज अन्न सड़ा गोदाम में, फिकी सड़क पर प्याज फिकी सड़क पर प्याज, कृषक फांसी पर लटके सीमा पर घुस ची... Read more

कवी मंच वालो

व्यंग्य विनोद कवी मंच वालो कवी मंच वालो यहां मैं जमाऊं वहां तुम जमालो मदारी के लटके सभी एक जैसे ये बातों के झटके सभी एक जैसे ... Read more

मनहरण दंडक छंद (सैनिकों से निवेदन)

पाक की मिटाने धाक,आगे बढ़ो काटो नाक, मारो शाक पर शाक नहीं रहे दीन का। सिंह से दहाड़ो अरिदल वक्ष फाड़ो, ... Read more

भाषा समक अलंकार

राम के अनेक नाम, राम के अनेक धाम, राम के अनेक काम, सेंट परसेंट में। राम की लहर कभी बन के कहर चली, शहर शहर गाँव छाई अरजेंट में। ... Read more

वीर रस की हास्य कविता

मन करता है गीत सुनाऊं वीरों की परिपाटी के मन करता है गीत सुनाऊं काश्मीर की घाटी के कभी-कभी यह भाव सोचकर मैं माइक पर जाता हूं चीन-... Read more

नया कवि

जवानी के जोश में जवान कहां जाके फंसा जोश क्या करा दे कोई होश नहीं रहता अपराधी करे अपराध बार-बार उसे मन में जरा भी अफसोस नहीं रहता... Read more