Riya Gupta

Bangalore

Joined April 2020

लेखन से दोस्ती है और कविताओं से प्रेम. प्रयास है कि जितना भी लिखूँ,
सार्थक लिखूँ. लगभग सभी कविताएँ प्रकाशित हैं और कुछ लेख भी.
हालांकि दिल से कविता ही आती है, लेख के लिए दिमाग उपयोग करना पड़ता है, अभी सीख ही रहीं हूँ.

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प्रेम का चरित्र

तुमने उसे प्रेम स्वीकार भर करने का अधिकार दिया, प्रेम करने वाली स्त्रियाँ तुम्हारें लिए चरित्र हीन हो गयीं, तुमने प्रेम ... Read more

जीवन और प्रेम

जीवन की धूप में थक कर मैंने प्रेम की छांव खोजी.. प्रेम की आंच में तप कर मैंने कला की पौध रोपी.. इस पौध की ओट से अब भी आती... Read more

बसंत

आज जीवन का एक और बसंत कट गया... ये पतझड़ क्यूँ नहीं कटता? और तुम क्यूँ नहीं आते मेरे बालों में मोगरा सजाने? तुम कहीं ... Read more

भूख

मजदूरों की लाशों पर पहले नेता सेंकते हैं राजनीति की बेशर्म रोटियां, फिर उनको पलटकर तुम सेंकते हो आत्मा विहीन कविताएँ. "उन... Read more

आग वो कैसे बुझेगी

Riya Gupta गीत May 12, 2020
जो किनारों संग पली हो वो भंवर से क्या डरेगी आंधियां जिसका मसीहा आग वो कैसे बुझेगी... पंख जो कतरे गए थे देख लो फिर आ गए हैं, ... Read more

होना चाहिए

रंगी पुती सी सूरतों पर भी चढ़ी हैं सूरतें आईना कह रहा हर इक के हाथ पांव होना चाहिए गज़लें नहीं कहतीं पढ़ा जाना सुना जाना मगर खा... Read more

तो क्या होगा?

मेरे बाबुल की गुड़िया हूं, मुझे मां ने संवारा है, तू मिट्टी का खिलौना ही, समझ बैठा तो क्या होगा? बड़े नाजों से पाला है, फूलों ... Read more

उत्तर से दक्षिण की ओर

उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ते, पीछे छूटता गया साफ आसमान और घेरते गये बादलों के झुंड, ये बादलों के वही झुंड थे जो घर लौटते वक्त मैं... Read more

लॉक डाउन, मरने का डर और चिठ्ठियाँ

मरने का डर नहीं है, हाँ मगर डर है... उन चिट्ठियों के मुझसे नाराज़ हो जाने का, जो भावनाओं की पर्तों में अपनी गिनती बढ़ाती रहती... Read more

सेकंड हैंड दिल

बारिश की फुहारें, मीलों लंबी ड्राइव और हर इक मोड़ के साथ खुद में सिमटता झिझकता इश्क़, कार के शीशे से पीछे छूटती सड़क, साथ... Read more

सर्वाइवल और कला

सर्वाइवल और कला में से यदि चुनना पड़े, तुम सर्वाइवल ही चुनना क्योंकि कला तो स्वयं ही तुम्हें चुन लेगी। ये तुम्हारी इच्छा, ... Read more