Sailaxmi Gumma

Joined November 2018

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कविता

सजना जबसे, तुम दूर गए l दिल को करके, मजबूर गए ll दिन -रात तुम्हें, प्रिय याद करूँ l जब पीर बढ़े, तब आह भरूँ ll ... Read more

कविता

प्रिये! आज कोई नया गीत गाओ l सदा ज़िंदगी में सखी! मुस्कुराओ ll खिले बाग में फूल रंगीन सारे l समा है सुहाना, हसीं है ... Read more

गंगा

शुचित पावन नदी गंगा l नहाकर मनु रहे चंगा ll सभी के पाप धोती है l हृदय में आस बोती है ll भगीरथ की तपस्या... Read more

कुण्डलिया छंद

हे! त्रिपुरारी आपकी ,महिमा अपरंपार l भक्तों की हर आपदा,दूर करें हर बार l दूर करें हर बार, सभी के मन की पीड़ा l ब... Read more

मैना

सुहानी शाम है आई l पिया की याद गहराई ll सजल होते रहे नैना l कहीं खोयी रही मैना ll बड़ा रंगीन था सावन l सजन ... Read more

कविता

सदा हम सत्य ही बोलें l वचन में प्रीति रस घोलें ll मनुज जो सभ्य कहलाते l नहीं वह झूठ कह पाते ll दया का भाव ... Read more

कुण्डलिया

मानव अपने कर्म पर, करके पश्चाताप l मन में भरकर वेदना, करता रहे विलाप ll करता रहे विलाप, अश्रु बन जाते दरिया l इस... Read more