पुकारती भारती

अंग -अंग काट दिये, प्रांत -प्रांत बांट दिये, शूल चित्त में चुभे हैं, रोय रही... Read more

ख़ूब -रू से सिर्फ मैं आँखें लड़ाता ही रहा...

ख़ूब -रू से सिर्फ मैं आँखें लड़ाता ही रहा। ख़्वाब में उसको मैं बस अपना बनाता ही रहा। वो बदलता ही रहा है काफ़िया सा इश्क़... Read more