कवि गोपाल पाठक''कृष्णा''

मीरगंज ,बरेली ,उत्तर प्रदेश ,243504,+918279648462

Joined April 2017

+918279648462, कवि गोपाल पाठक जी अन्तर्राष्ट्रीय कवि हैं।इन्होंने कई एलबम में गीत लिखे हैं और कई किसान गीत लिखे हैं जिन्हें विभिन्न गायकों ने गाया है।इन्हें कवि सम्मेलन में जाना और किसानों पर कविता करना बेहद पसंद है।

Books:
हमसफ़र मई २०१७,अपनी अधूरी कहानी, भारतीय किसान दुर्दशा, आत्मसम्मान

Awards:
Gandhi piece award Nepal, परुशुराम युवा साहित्यकार सम्मान २०१६ रोहणी नयी दिल्ली,साहित्य गौरव(फिरोजाबाद),किसान साहित्य सम्मान(मंदसौर) आदि कई सम्मान

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इस्लाम में थोड़े मंसूर होते

दूर तुम भी न होते न हम दूर होते। इश्क में क्यों भला आज मजबूर होते।। महफिलों से निकाला न जाता कभी मै । फैसले हर तरह के जो मंजूर ... Read more

ग़ज़ल

क्या किया वर्षों पुराने आपने अहसास का। एक पल ही जान लेते हाल जिंदा लाश का।। हम तुम्हारी बाट में ही रात को सोते नहीं। आप अंदाजा ... Read more

ग़ज़ल

महका दिया है तूने पाकीज़गी से यूं। पहचानती है दुनिया दीवानगी से अब।। देखा नहीं है उसको सच बात है लेकिन। मिलने लगा हूं हर दिन उस... Read more

तन्हाइयों में भी नहीं तन्हा रहा हूं मै

तन्हाइयों में भी नहीं तन्हा रहा हूं मैं। सब भूलकर इकवार जो खुद से मिला हूं मै।। मिलता नहीं, दिखता नहीं,सुनता नहीं फिर भी। हर एक... Read more

ग़ज़ल

आप नुकसान दें चाहे दे दें नफा। सामने पर तुम्हारे ये सिर है झुका।। मान जाओ जरा रुक भी जाओ कभी। दे रहे हैं तुम्हे प्यार का वास्ता... Read more

ग़ज़ल

भले पत्थर मुझे कह ले,मगर पत्थर नहीं हूं मैं। लगे जो पीठ पे आकर तिरे खंजर नहीं हूं मैं।। जहां समझा रखा मुझको जहां चाहा वहां फेंका... Read more

ग़ज़ल

रोज झांसा नया एक झांसे के बाद। अब दिलासा न दो इस दिलासे के बाद।। तिश्नगी प्यार की अब किसी को नहीं। राह तकता रहा एक प्यासे के बा... Read more

मां सरस्वती की वंदना

ज्ञान का दीपक जला ये मोह माया मार दे। ले बना चरणों का सेवक मातु मेरी शारदे।। कर मेरा कल्याण माता भाग्य रेखा खीच दे। ज्ञान गुण द... Read more

मत ठहरना एक पल भी पैर अपना रोककर

मत ठहरना एक पल भी पैर अपना रोककर। जीत लोगे तुम जहां को नेक ताकत झोंककर।। तुम विरोधी से कभी भी एकपल डरना नहीं। सोच लेना क्या करे... Read more

जिंदगी अब तेरा ये कहर ही सही।

जिंदगी अब तेरा ये कहर ही सही। हर कदम दर कदम ये सफर ही सही।। कुछ न बाकी रहे तुम दिखा दो अगर। मेरे महबूब को इक नजर ही सही।। या... Read more

लड़ाई के लिए

लड़ाई के लिए खुदको सदा तैयार कहते हैं। खुदी को सूरमा अक्सर बही हरबार कहते हैं।। बताऊं हाल तुमको मै अगर जो दुश्मनों का तो। बुराई... Read more

आज वक़्त का साथ मिला है

आज वक़्त का साथ मिला है तो इतना न इतराओ। तुम कोई सम्राट नहीं हो खुदको इतना समझाओ। आसमान को चूमने वाले ऐसा न हो न लौटो। एक मशविर... Read more

खुद्दार कविता

राह मैंने ढूंढ ली है टोंककर भी क्या करोगे। बन गया हूं मै हवा अब रोककर भी क्या करोगे।। अब जुबां खामोश करलो रोकना बस में नहीं। आज... Read more

तिलमास की घटना पर

::-तिलमास की घटना पर::- ----------------------------------------------- आज कलम को रोना आया अपने ही अहसास पर। राज व्यवस्था कुछ लोग... Read more

खुशियों से दामन क्यूँ हमारा भर नही देता ! न जाने क्यूँ प्रभु हमको हमारा घर नही देता!!

खुशियों से दामन क्यूँ हमारा भर नही देता ! न जाने क्यूँ प्रभु हमको हमारा घर नही देता!! कई जन्मो से मांगा है मगर अब भी तो है प्या... Read more

दुखी हूँ मन से फिर भी मिल रहा हूँ !

दुखी हूँ मन से फिर भी मिल रहा हूँ ! मै दिया हूँ इसलिये ही ज़ल रहा हूँ !! कभी मिल ही जायेगी मंजिल मुझे ! आज तक इसीलिये ही चल रहा ... Read more

वो मिले आज जैसे अंजान हों

वो मिले आज जैसे अंजान हों! मुलाकात ऐसी की मेहमान हों !! मेरी आरजू है -ए- मेरे खुदा ! वो दिल से भी अच्छे इंसान हों !! कभी रास... Read more

इतना भी क्यूँ याद आता है तू

इतना भी याद क्यूँ आता है तू इतना भीमुझे क्यूँ रुलाता है तू मोहब्बत तो तू भी करता है मुझसे आखिर क्यूँ छुपाता है तू मेरी जि... Read more

कुछ मुक्तक

तेरे इस अहसास को अहसान बना लू तुझको जिन्दगी का महमान बना लू पलकों पर रखु तुझको या दिल में सहज लू लगता है तुझको अपना भगवान बना ... Read more

बाहर क्यू न आते हो

मै बिखरा हूँ याद में तेरी क्यू इतना तड़पाते हो एकबार मुझे देखने खातिर बाहर क्यू न आते हो पल पल याद में जीता हु पल पल आहें भरता ... Read more

प्यार की कहानी

खुला छोड़ा है जिनको दरवाजा अन्दर वो अभी तक आये नहीं हैं हमने तो अपनी कहानी बता दी पर जज्वात उनने जताए नहीं है वो नागिन सी बल खाती... Read more

हम जैसे शायद दिवाने नहीं है

खुला छोड़ा था जिनको दरवाजा अन्दर वो अभी तक आये नहीं है हमने तो अपनी कहानी बता दी पर जज्वात उनने जताए नहीं है वो नागिन के जैसी बलख... Read more

लिखते रहते है

गुल तो गुलशन में रोज खिलते रहेते है कभी नए तो कभी पुराने मिलते रहते है तुम भी कदर् करो क्यों आखिर मेरे इन जज्वातो की कितने तुम... Read more