डा0 रजनी रंजन

घाटशिला

Joined November 2016

पेशे से शिक्षिका, लेखन में रूचि एवं पाठिका भी ।

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वर्ण पिरामिड

(1) है भोर, किरणें सतरंगी, धरती पर सब जाग उठे, नया सवेरा आया। (2) ओ मन जाग जा भोर हुई चहचहाती चिड़ियों के स्वर तुम्हे... Read more

प्रकृति

(1) बहती नदी साथ ही खड़े पेड़ संबल देते। (2) नीला आकाश छुने को व्याकुल हैं वनदेवता। (3) तीन तत्व नदी ,वन, आकाश जीवनाधार। ... Read more

आँगन का चुल्हा

सांझ-सवेरे जब लकड़ी सुलग जाती है। शाम होते आंगन का चुल्हा याद आता है । माँ याद आती है रोटी बनाती बहन याद आती है बेलन घुमाती भा... Read more

मंझली भाभी

मंझले भैया सिर्फ नाम के मंझले थे पर रौब में वही बड़े भैया थे। वही घर के सभी काम करते थे । बड़े भाई साहब के स्वभाव से शान्त और संकोच... Read more

हाईकु

सीखना तुम तौर तरीके सब बेटी हो तुम। सीखना होगा सिमट के रहना तहजीब भी। औरत हो सीख लेना जरूर खुद को पढना आना औ जाना ... Read more

मत कह देना

मत कह देना दिल की बातें बात कहानी बन जाएगी। इस घर से उस घर में जाकर पानी पानी हो जाएगी।। मन में अगर कोई जख्म भरा हो खुद से ही तु... Read more

मानवधर्म

मेरी गलती सिर्फ इतनी थी, परसेवा का दायित्व लिया मैने, फल-फूल तोड़े मेरे,खुश हुए वे, मै भी खुश हुई। सोने का हिण्डोला डाल, मुझे ब... Read more

बेटियाँ

अर्धनारीश्वर  के सृजन में बेटियाँ सहभागी औ सहगामी जीवनपथ में बेटियाँ । धरती  और आकाश तक या फिर पाताल तक हैं गूढ अर्थ में बेटिया... Read more