GEETA BHATIA

Delhi

Joined January 2017

बचपन देहरादून में बीता शुरू से लेखन से लगाव रहा कालेज पत्रिका में भी रचनाऐं प्रकाशित होती रही शादी के बाद काफी समय लेखन रुक सा गया बीते कुछ वर्षो में फिर से लिखना शुरु किया और दो पुस्तकें प्रकाशित हुई

Books:
1. Kuch geet kuch sapne kuch pyaar bhare kuch apne
2. Ehsaas

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कैसे रंगों की होली आई

होली आई होली आई कैसे रंगों की होली आई हर कोई अपने रंग रंगा है इक दूजे कीचड़ उछला है शर्म करो माटी के पुतलों बात बात में र... Read more

बेपरवाहियों ने सिखा दिया

बेपरवाईयों ने सिखा दिया जीना परवाह करते तो मर ही जाते होश खोकर सूकून मिल ही गया होश रखते तो खो ही जाते Read more

हर रोज

हर रोज एक पन्ना पलट लेता हूँ और जिन्दगी के मायने समझ लेता हूँ ये रोज बदल लेती है अपना लिबास आँखों में भर देती है इक नया खाब इन... Read more

दर्द

जब लगता है जनाज़ा अरमानो का उठता है तब दर्द पिघल कर आँसुओं में ढलता है ####################### जिन्दगी के दर्द का यूँ छुपा ग... Read more

नम आँखे

आँखें नम तो ठिठुरती हवाओं की भी हुआ करती हैं तभी तो ओंस बन के फूलों पे गिरा करती हैं कौन जाने ये आँसू हैं या शबनम के मोती ये किस... Read more

खामोशी

संभाल के रखी है तेरी खामोशी हमने जब उदास होता हूँ सुन लेता हूँ बूँदों की टप टप कानों में गूँजती है थोड़ा मौसम का मज़ा लेता ह... Read more

तिरंगा

तीन रंग तिरंगा फहरे आसमान को छूले चक्र चले ऐसा सुन्दर दिल दुनियां का जीते वीर सुभाष वीर भगत सिंह वीरों की है धरती वीर... Read more

"मैं"

आखिर ये "मैं" क्या है ? क्या ये अभिमान है या स्वाभिमान है या आत्मसम्मान है या रहेगा एक प्रश्न हमेशा उत्तर है जिसका अंहकार ... Read more

बेटियाँ

श्रृंगार रस में जब जब सजती हैं बेटियाँ बड़ी नाजुक सी कोमल सी दिखती हैं बेटियाँ वक्त आये तो दुर्गा रुप भी धरती हैं बेटियाँ मा... Read more