Dayashankar Tiwari"Maun"

Nagpur(Maharashtra)

Joined February 2020

दयाशंकर तिवारी ‘मौन’
पिता का नाम : श्यामलाल तिवारी
मां का नाम : सुंदरबाई तिवारी
जन्मतिथि : 4-6-1945
जन्म स्थान : नागपुर (महाराष्ट्र)
*
उपलब्धि :
* पहला गीत, निर्माता गोपाल शर्मा और निर्देशक वी.के. शर्मा की फिल्म ‘मौन’ में सुश्री लता मंगेशकर की आवाज में.
* दूसरा गीत, फिल्म ‘माटी की मूरतें’ में श्रीमती आशा भोसले की आवाज में.
* तीसरा युगल गीत, स्व. मोहम्मद रफी और कमला शिष्टा ने गाया, जो विदर्भ के एक नेता जांबुवंतराव धोटे की फिल्म ‘जागो’ में लोगों ने सुना.
* भारत सरकार के बाल चित्रपट विकास निगम की फिल्म ‘अश्व’ में एक गीत कविता कृष्णमूर्ति और दूसरा बसंत मांडके ने गाया. (फिल्म अंतरराष्ट्रीय बाल चित्रपट महोत्सव शिकागो में पुरस्कृत)
* प्रख्यात खलनायक अमजद खान निर्देशित फिल्म ‘अधूरा आदमी’ में संवाद लिखे.
* टीवी फिल्म ‘सौगात’ में कहानी, पटकथा, संवाद तथा गीत.
* टीवी फिल्म ‘नई सुबह’ में पटकथा और गीत.
* हिंदी फिल्म ‘आ जाओ पिया’ में एक गीत सुरेश वाडकर की आवाज में.
* फिल्म ‘मैं हूं खुद्दार’, ‘मुजरिम एक दास्तान’, * ‘रक्षक’, ‘मजदूरों का मसीहा’, ‘रॉबरी एट बैंकॉक’, ‘सफाया’, ‘बच्चे धमाल के’ , ‘स्वामी’ में गीत लिखे हैं. ये सभी फिल्में कन्नड, तेलुगू , मलयालम और * तमिल भाषी फिल्मों की हिंदी में डब की हुई हैं.
*इसके अलावा देश भर में अगणित अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में शिरकत.
* दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल से होली के गीत और बाल गीतों का प्रसारण हो चुका है. आकाशवाणी से अनेक काव्य गोष्ठियों और परिचर्चाओं का प्रसारण.
* महानाट्य ‘मां भारती के सारथी पं. दीनदयाल उपाध्याय’Email : dsmaun@gmail.com
Mo : 9423680156

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घास की रोटी का वो निवाला रे

अमर हो गया भाला-वो राणा का रखवाला अमर हो गया घास की रोटी का वो निवाला रे जो प्रताप सुत के हाथों से छीन ले गया बिडाला रे। अमर हु... Read more

कहलाए क्या ?

पात झरें पतझर कहलाएं अश्रु झरें कहलाएं क्या ? निभते तक तो प्रीत कहाए जब न निभे कहलाए क्या ? पलक पे हैं तब तक आंसू हैं ढलक गए ... Read more

सपनों का अश्व

कोई मानव को समझाए काहे सुख ही पाना चाहे क्यों सपनों का अश्व उड़ाए जिसकी रास हाथ न आए ! जबसे देखा पहला सपना आंखें भूल गई हैं... Read more

सुख की छाया

दुख की सीमा पार छन रही सुख की छाया किंतु मैं अब तक दुख की सीमा छू नहीं पाया। दुर्दिन की कलियां अब तक के फूल नहीं बन पाई है... Read more

दुख की अग्नि

मैं तो हंस कर दुख की अग्नि पी जांऊगा किंतु हृदय का क्या होगा इस तृषित हृदय का क्या होगा ? मन सागर की द्वंद्व लहरिया तृष्णा-तट... Read more

पगडंडी ने पग छीले हैं

हरियाली ही हरियाली है मेरे पथ के दोनों ओर व्यथा यही है पगडंडी ने पग छीले हैं। प्रथम चरण जब धरा दूब पर एक सुखद स्पर्श हुआ तब न... Read more

आकांक्षा

टाप का लीडर बनूं आकांक्षा यह दिल में है क्योंकि अब गिनती मेरी कानून के कातिल में है। जो भी अब तक पढ़ न पाया पाठ भ्रष्टाचार का आज-... Read more

ओझल न होना

तनिक भी ओझल न होना नैन भर कर देख लूं मैं स्वयं ही अपने हृदय का चैन हर कर देख लूं मैं। क्यों रहूं बैठा यूं ही मैं प्यास के तटबंध पर... Read more

आंख तेरी मेरी भर आई

मैं न समझा दर्द किसी का, तुम न समझे पीर पराई अपने-अपने दुख को लेकर आंख तेरी मेरी भर आई । चंचल चंदा का चकोर चित सदा रहा पूनम का प्य... Read more

मुस्कान भी है

आंख में है गर दर्द का डेरा, होठों पर मुस्कान भी है जीवन-डगर बहुत मुश्किल है उतनी ही आसान भी है । गर खरीदने की इच्छा है, जो चाहोगे ... Read more

मकड़ी के जाले

मेरे नैनों ने ऐसे सपने रच डाले जैसे सूने घर में हों मकड़ी के जाले । चंदा-सूरज रहे उतरते अंत:तल पर किंतु नहीं कर पाया मैं ही कैद उ... Read more