D.S. JHARIYA

Joined January 2017

Copy link to share

प्रेम

फिर आई रात सुहानी फिर नया गीत गुनगुनायेंगे बिखर गया ज़माने के सितम से फिर से उसे बसायेंग नफरत की आंधिया ले उड़ी जिसे प्यार... Read more

बादल

आसमान के काले बादल लगते हैं कितने जिंदादिल अपने मे भी जोश जगाए उड़ जाने को ज़ी ललचाये पल -पल अपना रंग बदलकर जीवन को रंगीन बन... Read more